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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; अर्थव्यवस्था पर उदारीकरण का प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन  तथा औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव।

संदर्भ: उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अंतर्गत आर्थिक सलाहकार कार्यालय ने प्रमुख (कोर) उद्योगों का सूचकांक (ICI) की संशोधित श्रृंखला जारी की है, जिसमें 2022–23 को नया आधार वर्ष बनाया गया है। यह 2011–12 की पुरानी श्रृंखला को प्रतिस्थापित करती है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • पहली बार लौह अयस्क को 9वें प्रमुख उद्योग के रूप में शामिल किया गया है, जिससे प्रमुख क्षेत्रों की संख्या आठ से बढ़कर नौ हो गई है।
  • जून 2026 में प्रमुख उद्योग सूचकांक में वर्ष-दर-वर्ष 5.0% की वृद्धि दर्ज की गई, जो मई 2026 के 3.2% की तुलना में अधिक है। यह पिछले पाँच महीनों की सबसे तीव्र वृद्धि दर है।
  • लौह अयस्क (43.9%), विद्युत (9.8%), सीमेंट (9.8%), इस्पात (4.6%) तथा कोयला (1.4%) में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
  • प्राकृतिक गैस (-7.4%), कच्चा तेल (-4.2%), पेट्रोलियम शोधन उत्पाद (-4.7%) तथा उर्वरक (-3.3%) में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
  • लौह अयस्क और विद्युत समग्र वृद्धि के प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभरे।
  • अप्रैल–जून 2026 के दौरान प्रमुख उद्योग सूचकांक की संचयी वृद्धि 3.6% रही, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 1.0% थी।

संशोधित प्रमुख उद्योगों का सूचकांक में मुख्य बदलाव

  • आधार वर्ष को 2011–12 से संशोधित कर 2022–23 कर दिया गया है।
  • लौह अयस्क को औद्योगिक उत्पादन में इसके व्यापक उपयोग तथा औद्योगिक विकास में इसके महत्त्वपूर्ण योगदान के कारण नए प्रमुख उद्योग के रूप में शामिल किया गया है।
  • इस्पात सूचकांक अब शुद्ध उत्पादन के स्थान पर सकल उत्पादन के आँकड़ों के आधार पर तैयार किया जाएगा, ताकि इसे संशोधित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की कार्यप्रणाली के अनुरूप बनाया जा सके।
  • कोयला श्रेणी में अब केवल कच्चे कोयला को रखा गया है, जबकि मध्यम श्रेणी का कोयला तथा धुले हुए कोयला को दोहरी गणना से बचने के लिए बाहर कर दिया गया है।
  • क्षेत्रीय भार को संशोधित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (2022–23) के आधार पर निर्धारित किया गया है तथा इन्हें आनुपातिक रूप से 100 पर समायोजित किया गया है।
  • पुरानी और संशोधित प्रमुख उद्योग सूचकांक श्रृंखला के बीच तुलना को सुगम बनाने के लिए 1.47 का संयोजक गुणांक निर्धारित किया गया है।

प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (ICI) के बारे में

  • प्रमुख उद्योग सूचकांक एक मासिक उत्पादन मात्रा सूचकांक है, जिसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा संकलित किया जाता है।
  • यह नौ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन प्रदर्शन का आकलन करता है तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जारी होने से पहले औद्योगिक वृद्धि का अग्रिम संकेत देता है।

प्रमुख उद्योगों का सूचकांक की विशेषताएँ

  • प्रमुख उद्योग सूचकांक की औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के कुल भार में 40.27% हिस्सा है।
  • अनंतिम प्रमुख उद्योग सूचकांक प्रत्येक माह की 20 तारीख को जारी किया जाता है। यदि 20 तारीख को अवकाश हो, तो इसे अगले कार्य दिवस पर जारी किया जाता है।
  • यह लासपेयर प्रकार का भारित उत्पादन मात्रा सूचकांक है, जो आधार वर्ष की तुलना में उत्पादन में हुए परिवर्तन को मापता है।

प्रमुख उद्योगों का सूचकांक का महत्त्व

  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जारी होने से पहले औद्योगिक गतिविधियों का अग्रिम संकेतक प्रदान करता है।
  • आधारभूत संरचना तथा विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन का आकलन करने में नीति-निर्माताओं की सहायता करता है।
  • वित्त मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, नीति आयोग, बैंकों तथा आधारभूत संरचना योजनाकारों द्वारा आर्थिक विश्लेषण एवं नीति-निर्माण के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  • यह उन क्षेत्रों की स्थिति को दर्शाता है जिनका समग्र आर्थिक एवं औद्योगिक विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

आधार वर्ष बदलने की आवश्यकता

  • संरचनात्मक परिवर्तनों को प्रतिबिंबित करता है: वर्ष 2011–12 के बाद भारत की औद्योगिक संरचना, उत्पादन प्रतिरूपों तथा आर्थिक संरचना में हुए परिवर्तनों को दर्शाता है।
  • प्रतिनिधित्व में सुधार करता है: नवीनतम औद्योगिक उत्पादन आँकड़ों के आधार पर क्षेत्रीय भार को अद्यतन कर सूचकांक को वर्तमान अर्थव्यवस्था का अधिक सटीक प्रतिनिधि बनाता है।
  • संशोधित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के अनुरूप: 2022–23 आधारित संशोधित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की कार्यप्रणाली एवं भार के साथ सामंजस्य स्थापित करता है।
  • सटीकता में सुधार: सकल इस्पात उत्पादन के आँकड़ों का उपयोग करता है तथा धोया हुआ कोयला एवं मध्यम श्रेणी के कोयले को हटाकर दोहरी गणना को समाप्त करता है।
  • उभरते औद्योगिक महत्त्व को मान्यता: लौह अयस्क की बढ़ती औद्योगिक भूमिका को स्वीकार करते हुए इसे प्रमुख उद्योग में शामिल किया गया है।
  • आँकड़ों की तुलनीयता बढ़ाता है: 1.47 का संयोजक गुणांक पुरानी और संशोधित श्रृंखला के बीच तुलना को संभव बनाता है।
  • बेहतर नीति-निर्माण में सहायक: आर्थिक योजना, पूर्वानुमान तथा नीति-निर्णयों के लिए औद्योगिक प्रदर्शन का अधिक सटीक, समकालीन और विश्वसनीय आकलन उपलब्ध कराता है।
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