रविदासिया समुदाय ने जनगणना में पृथक धर्म श्रेणी की मांग की

संदर्भ:

रविदासिया समुदाय के सदस्यों ने जनगणना 2027 में “रविदासिया” को एक पृथक धर्म श्रेणी के रूप में शामिल करने की अपनी मांग दोहराई है। उनका तर्क है कि यह समुदाय अब अपने धार्मिक ग्रंथ, धार्मिक प्रतीक, उपासना स्थल तथा धार्मिक परंपराओं वाले एक विशिष्ट धार्मिक मत के रूप में विकसित हो चुका है।

रविदासिया समुदाय के बारे में

  • उत्पत्ति: रविदासिया मुख्यतः दलित समुदाय है, जो गुरु रविदास की आध्यात्मिक शिक्षाओं का अनुसरण करता है। गुरु रविदास एक भक्ति संत थे, जिन्होंने समानता, सामाजिक न्याय तथा जाति-आधारित भेदभाव के विरोध का संदेश दिया।
  • जनसांख्यिकीय वितरण: यह समुदाय मुख्य रूप से पंजाब के दोआब क्षेत्र (जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला तथा शहीद भगत सिंह नगर/नवांशहर) में केंद्रित है। इसके अतिरिक्त, इसकी एक बड़ी प्रवासी आबादी भी विभिन्न देशों में रहती है।
  • प्रमुख धार्मिक संस्था: डेरा सचखंड बल्लां (जालंधर), जिसकी स्थापना 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में बाबा संत पीपल दास ने की थी, रविदासिया समुदाय की सबसे बड़ी और सर्वाधिक प्रभावशाली धार्मिक संस्था है।
  • पृथक धार्मिक पहचान: 2009 के वियना हमले, जिसमें संत रामानंद की मृत्यु हो गई थी, के बाद डेरा सचखंड बल्लां ने वर्ष 2010 में औपचारिक रूप से रविदासिया को एक पृथक धर्म घोषित किया। यह समुदाय की विशिष्ट धार्मिक पहचान की स्पष्ट एवं निर्णायक घोषणा थी।
  • पवित्र धार्मिक ग्रंथ: समुदाय ने अमृतबाणी गुरु रविदास जी (अमृत बाणी) को अपना पवित्र धार्मिक ग्रंथ स्वीकार किया, जिसमें गुरु रविदास के 200 भजनों का संकलन है।
    • इसके बाद डेरा सचखंड बल्लां से जुड़े अनेक रविदासिया मंदिरों एवं डेरों ने अपने उपासना स्थलों में गुरु ग्रंथ साहिब के स्थान पर अमृतबाणी गुरु रविदास जी को स्थापित कर दिया।
  • पवित्र तीर्थस्थल: श्री गुरु रविदास जिनका जन्म स्थान, सीर गोवर्धनपुर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश) है, रविदासिया परंपरा के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है।
  • मांग का कारण: समुदाय की मांग है कि जनगणना में रविदासिया को एक पृथक धर्म श्रेणी के रूप में मान्यता दी जाए, ताकि उसकी विशिष्ट धार्मिक पहचान को आधिकारिक मान्यता मिले तथा उसकी सटीक गणना हो सके, न कि उसे व्यापक धार्मिक श्रेणियों के अंतर्गत शामिल किया जाए।

गुरु रविदास के बारे में

  • गुरु रविदास (लगभग 15वीं–16वीं शताब्दी) वाराणसी के एक भक्ति संत, रहस्यवादी कवि तथा समाज सुधारक थे। उन्होंने समानता, भक्ति तथा मानव गरिमा का समर्थन किया और जाति-आधारित भेदभाव का विरोध किया।
  • उन्होंने बेगमपुरा (“the city without sorrow“) की अवधारणा प्रस्तुत की, जो न्याय, समानता, जातिविहीन तथा भेदभाव-मुक्त समाज की परिकल्पना पर आधारित थी।
  • गुरु रविदास द्वारा रचित 41 भजन गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हैं, जो भक्ति आंदोलन तथा सिख धर्म पर उनके स्थायी प्रभाव को दर्शाते हैं।

व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी आधारित भारतीय मानक समय का उद्घाटन

संदर्भ:

केंद्र सरकार ने ‘एक राष्ट्र, एक समय’ पहल के अंतर्गत व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी आधारित भारतीय मानक समय (IST) प्रसारण प्रदर्शन नेटवर्क का उद्घाटन किया।

व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी आधारित भारतीय मानक समय (IST) प्रसारण नेटवर्क के बारे में

  • एक राष्ट्र, एक समय पहल: इसका उद्देश्य स्वदेशी समय-प्रसारण अवसंरचना के माध्यम से पूरे देश में एक समान, सुरक्षित तथा अत्यंत सटीक भारतीय मानक समय (IST) स्थापित करना है।
  • यह क्या है? यह प्रदर्शन नेटवर्क परिशुद्ध समय प्रोटोकॉल (PTP) आधारित व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए UTC (NPLI) से अनुरेखणीय भारतीय मानक समय का सुरक्षित प्रसारण करता है, जिससे अत्यधिक सटीक तथा विश्वसनीय समय समकालिकीकरण सुनिश्चित होता है।
  • विकसित करने वाले संस्थान: इसका संयुक्त रूप से विकास उपभोक्ता मामले विभाग, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR–NPL) तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा किया गया है। इसके कार्यान्वयन एवं सत्यापन में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने सहयोग प्रदान किया है।
    • उपभोक्ता मामले मंत्रालय का विधिक मापविज्ञान प्रभाग इस परियोजना की नोडल एजेंसी है।
  • आवश्यकता: यह जीपीएस जैसी विदेशी समय-निर्धारण प्रणालियों पर निर्भरता कम करके संप्रभु एवं विश्वसनीय राष्ट्रीय समय स्रोत स्थापित करता है। इससे साइबर लचीलापन बढ़ता है तथा महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना को डेटा में छेड़छाड़ और साइबर हमलों से सुरक्षा मिलती है।
  • अनुप्रयोग: यह बैंकिंग एवं वित्तीय बाजारों, दूरसंचार, विद्युत प्रणालियों, परिवहन, डिजिटल शासन तथा अन्य रणनीतिक अवसंरचनाओं के लिए विश्वसनीय समय समकालिकीकरण उपलब्ध कराता है। साथ ही, उपभोक्ता संरक्षण, निष्पक्ष व्यापार तथा सुरक्षित डिजिटल लेन-देन को भी प्रोत्साहित करता है।

व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी के बारे में

  • व्हाइट रैबिट (WR) एक ईथरनेट-आधारित नेटवर्क प्रौद्योगिकी है, जो परिशुद्ध समय प्रोटोकॉल (IEEE 1588) तथा सिंक्रोनस ईथरनेट (SyncE) को संयोजित करके फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क पर एक नैनोसेकंड से भी कम स्तर की समय समकालिकीकरण (Time Synchronisation) सुनिश्चित करती है।
  • इसका मूल विकास यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन (CERN) द्वारा बड़े पैमाने के वैज्ञानिक प्रयोगों के समय समकालिकीकरण के लिए किया गया था। वर्तमान में इसका व्यापक उपयोग उन क्षेत्रों में किया जाता है, जहाँ अत्यंत सटीक समय समकालिकीकरण की आवश्यकता होती है।

स्वच्छ खेलों के लिए सरकार ने दो डोपिंग-रोधी अधिनियम अधिसूचित किए

संदर्भ:

भारत सरकार ने राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी अधिनियम, 2022 तथा राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी (संशोधन) अधिनियम, 2025 के प्रवर्तन की अधिसूचना जारी की है, जिससे स्वच्छ खेलों को बढ़ावा देने के लिए भारत के कानूनी एवं संस्थागत ढाँचे को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • उद्देश्य: खेलों में डोपिंग की रोकथाम, खिलाड़ियों के अधिकारों की सुरक्षा तथा खेल प्रतियोगिताओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एक व्यापक वैधानिक ढाँचा प्रदान करना, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत डोपिंग-रोधी मानकों के अनुरूप हो।
  • वैधानिक ढाँचा: राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी अधिनियम, 2022 के अंतर्गत राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी अभिकरण (NADA) को एक वैधानिक निकाय का दर्जा दिया गया है तथा खेलों में डोपिंग-रोधी राष्ट्रीय बोर्ड की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जिससे डोपिंग-रोधी प्रशासन को सुदृढ़ किया जा सके।
    • इस अधिनियम से पहले भारत की डोपिंग-रोधी व्यवस्था राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी अभिकरण (NADA) तथा राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी नियमों के माध्यम से, विश्व डोपिंग-रोधी संहिता के आधार पर संचालित होती थी, परंतु इसके लिए कोई पृथक वैधानिक ढाँचा नहीं था।
  • वैश्विक अनुरूपता: यह अधिनियम भारत की डोपिंग-रोधी व्यवस्था को विश्व डोपिंग-रोधी संहिता (WADA संहिता) के अनुरूप बनाता है तथा खेलों में डोपिंग के विरुद्ध यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय अभिसमय (2005) के अंतर्गत भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करता है।
    • विश्व डोपिंग-रोधी अभिकरण (WADA) की स्थापना 1999 में हुई थी। इसका उद्देश्य विश्व स्तर पर डोपिंग के विरुद्ध अभियान को प्रोत्साहित करना, समन्वित करना तथा निगरानी करना है। साथ ही यह विश्व डोपिंग-रोधी संहिता का निर्माण एवं विकास करता है।
  • संस्थागत सुधार: राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी (संशोधन) अधिनियम, 2025 के माध्यम से डोपिंग-रोधी निर्णय एवं अपील तंत्र का पुनर्गठन किया गया है, जिससे संस्थागत स्वतंत्रता को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, पारदर्शिता, जवाबदेही तथा विधिसम्मत प्रक्रिया को विकसित होते अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुदृढ़ किया गया है।
  • व्यापक डोपिंग-रोधी उपाय: अधिनियम के अंतर्गत डोप परीक्षण, परिणाम प्रबंधन, डोपिंग-रोधी शिक्षा, खुफिया जानकारी एकत्र करना तथा जांच जैसी गतिविधियों को वैधानिक आधार प्रदान किया गया है, ताकि सभी खेलों में डोपिंग-रोधी नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा समिति (NCDS) की 12वीं बैठक

संदर्भ:

हाल ही में राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा समिति (NCDS) की 12वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक में बाँध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई तथा देश में बाँध सुरक्षा प्रशासन को सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा समिति (NCDS) के बारे में

  • वैधानिक निकाय: इसका गठन बाँध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की धारा 5 के अंतर्गत किया गया है। यह बाँध सुरक्षा से संबंधित मामलों का सर्वोच्च नीतिगत निकाय है।
  • अध्यक्ष: इसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अध्यक्ष द्वारा की जाती है।
  • कार्य: यह बाँध सुरक्षा से संबंधित नीतियों, विनियमों तथा तकनीकी मानकों की अनुशंसा करता है तथा राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) के नीतिगत थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है।
  • संरचना: इसमें केंद्र एवं राज्य सरकारों, राज्य बाँध सुरक्षा संगठनों (SDSOs) के प्रतिनिधि तथा बाँध सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल होते हैं।

बाँध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के बारे में

उद्देश्य: निर्दिष्ट बाँधों की निगरानी, निरीक्षण, संचालन तथा रखरखाव के लिए एक समान कानूनी ढाँचा प्रदान करना, ताकि बाँध विफलता से होने वाली आपदाओं को रोका जा सके।

  • लागू होने का दायरा: यह अधिनियम उन निर्दिष्ट बाँधों पर लागू होता है जिनकी ऊँचाई 15 मीटर से अधिक है अथवा 10–15 मीटर ऊँचाई वाले ऐसे बाँधों पर, जो निर्धारित डिजाइन एवं जोखिम संबंधी मानदंडों को पूरा करते हैं।
  • संस्थागत ढाँचा: इसके अंतर्गत राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा समिति (NCDS), राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा प्राधिकरण, राज्य बाँध सुरक्षा संगठन तथा राज्य बाँध सुरक्षा समितियों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
  • प्रमुख प्रावधान: अधिनियम के अनुसार निर्दिष्ट बाँधों के लिए समय-समय पर सुरक्षा निरीक्षण, व्यापक बाँध सुरक्षा मूल्यांकन, जोखिम आकलन अध्ययन, आपातकालीन कार्य योजना (EAPs) तथा संचालन एवं रखरखाव (O&M) पुस्तिका तैयार करना अनिवार्य है।
  • महत्त्वपूर्ण तथ्य: बड़े बाँधों की संख्या के आधार पर भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद विश्व में तीसरे स्थान पर है। देश में 6,628 निर्दिष्ट बाँध हैं, जिससे बाँध सुरक्षा राष्ट्रीय जल सुरक्षा तथा आपदा जोखिम प्रबंधन का अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय बन जाती है।

अभ्यास पिच ब्लैक 2026

संदर्भ:

भारतीय वायु सेना का एक दल अभ्यास पिच ब्लैक 2026 में भाग ले रहा है। यह रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF) का प्रमुख द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय वायु युद्धाभ्यास है, जिसका आयोजन 20 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक आरएएएफ बेस डार्विन, ऑस्ट्रेलिया में किया जा रहा है।

अभ्यास पिच ब्लैक के बारे में

  • आयोजक: इसका आयोजन रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स द्वारा किया जाता है। यह आरएएएफ का सबसे बड़ा एवं प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वायु युद्धाभ्यास है।
  • इतिहास: पहली बार इसका आयोजन 1981 में हुआ था। वर्ष 1983 से इसका आयोजन आरएएएफ बेस डार्विन में किया जा रहा है तथा 1988 से यह प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित किया जाता है (केवल 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण इसका आयोजन नहीं हुआ था)।
  • नाम की उत्पत्ति: इस अभ्यास का नाम उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के विशाल एवं कम आबादी वाले क्षेत्रों में रात्रिकालीन उड़ान पर विशेष बल दिए जाने के कारण “पिच ब्लैक” रखा गया है।
  • प्रकृति: यह एक उच्च स्तरीय बहुराष्ट्रीय वायु युद्धाभ्यास है, जिसमें बड़े पैमाने पर वायु अभियान (लार्ज फोर्स एम्प्लॉयमेंट) तथा जटिल युद्ध-केंद्रित परिदृश्यों का अभ्यास विश्व के सबसे बड़े सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में से एक में किया जाता है।
  • भागीदारी: 2026 संस्करण में 100 से अधिक विमान, लगभग 2,500 सैन्य कर्मी तथा 21 देश (ऑस्ट्रेलिया सहित 20 साझेदार देश) भाग ले रहे हैं।
  • उद्देश्य: अभियान आधारित वायु अभियानों की क्षमता का परीक्षण करना, बहुराष्ट्रीय पारस्परिक संचालन क्षमता को बढ़ाना, साझा वायु अभियानों को सुदृढ़ करना, युद्धक तैयारी में सुधार करना तथा भाग लेने वाली वायु सेनाओं के बीच व्यावसायिक सहयोग को प्रोत्साहित करना।
  • भारत की भागीदारी: भारतीय वायु सेना इससे पहले 2018, 2022 तथा 2024 के संस्करणों में भी भाग ले चुकी है, जो ऑस्ट्रेलिया तथा अन्य हिंद-प्रशांत साझेदार देशों के साथ भारत के बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है।

FIFA विश्व कप 2026

संदर्भ:

स्पेन ने अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय में 1–0 से हराकर न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम (मेटलाइफ स्टेडियम), न्यू जर्सी, संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित फीफा विश्व कप 2026 का फाइनल जीता।

प्रमुख तथ्य

  • संस्करण: यह 23वाँ फीफा विश्व कप था तथा 48 टीमों के साथ आयोजित होने वाला पहला संस्करण था। इससे पहले प्रतियोगिता में 32 टीमें भाग लेती थीं।
  • मेज़बान देश: इसका संयुक्त रूप से आयोजन कनाडा, मेक्सिको तथा संयुक्त राज्य अमेरिका ने किया। यह तीन देशों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित पहला फीफा विश्व कप था। साथ ही, मेक्सिको तीसरी बार विश्व कप की मेज़बानी करने वाला पहला देश बना।
  • प्रतियोगिता प्रारूप: इसमें 48 टीमों को चार-चार टीमों वाले 12 समूहों में विभाजित किया गया। प्रतियोगिता में 39 दिनों के दौरान कुल 104 मैच खेले गए।
  • विजेता: स्पेन ने 2010 में अपना पहला खिताब जीतने के 16 वर्ष बाद दूसरी बार फीफा विश्व कप अपने नाम किया।
    • उपविजेता: अर्जेंटीना
    • तीसरा स्थान: इंग्लैंड
    • स्पेन पुरुष एवं महिला फीफा विश्व कप दोनों खिताब एक साथ अपने नाम करने वाला विश्व का पहला देश बन गया।
  • प्रतियोगिता पुरस्कार:
    • गोल्डन बूट: किलियन एमबाप्पे (फ्रांस)
    • गोल्डन बॉल: रोड्री (स्पेन)
    • गोल्डन ग्लव: उनाई सिमोन (स्पेन)
    • सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी: पाउ क्यूबार्सी (स्पेन)
  • सर्वाधिक फीफा विश्व कप खिताब:
    • ब्राज़ील5 (1958, 1962, 1970, 1994, 2002)
    • जर्मनी4 (1954, 1974, 1990, 2014)
    • इटली4 (1934, 1938, 1982, 2006)
    • अर्जेंटीना3 (1978, 1986, 2022)
    • स्पेन2 (2010, 2026)
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