संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरणीय प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन।
संदर्भ: मध्य प्रदेश ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (VDTR) में दो चीतों को छोड़कर प्रोजेक्ट चीता का विस्तार तीसरे आवास क्षेत्र तक किया है। यह रिजर्व सागर जिले में स्थित है।
अन्य संबंधित जानकारी

- मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के समापन दिवस पर दो चीतों—व्योम और नीरा—को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़ा। इन चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाया गया था।
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा आवास क्षेत्र बन गया है।
- यह स्थानांतरण मध्य प्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक चीता संरक्षण परियोजना के विस्तार को दर्शाता है।
- अगले महीने दो और चीतों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में लाए जाने की संभावना है।
चीता आबादी की वर्तमान स्थिति

- भारत में चीतों की आबादी बढ़कर 60 हो गई है, जिसमें भारत में जन्मे 41 चीते शामिल हैं।
- वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों को छोड़े जाने के बाद, 54 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान, 4 गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और 2 वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में हैं।
- आबादी में वृद्धि को सफल प्रजनन और भारत में जन्मे शावकों के जीवित रहने से समर्थन मिला है।
- भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 के पाँच शावकों को जन्म देने के साथ ही भारत में बोत्सवाना वंशावली की भी शुरुआत हुई।
प्रोजेक्ट चीता के बारे में
- भारत में चीते को 1952 में विलुप्त घोषित किया गया था। इसके प्रमुख कारणों में आवास का नुकसान, शिकार प्रजातियों में कमी और शिकार शामिल थे।
- वर्ष 2020 में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रायोगिक आधार पर सीमित संख्या में अफ्रीकी चीतों को भारत में लाने की अनुमति दी।
- प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में की गई।
- नामीबिया से आठ चीतों का पहला जत्था सितंबर 2022 में भारत पहुँचा। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते फरवरी 2023 में और बोत्सवाना से 9 चीते फरवरी 2026 में लाए गए।
- यह विश्व में किसी बड़े जंगली मांसाहारी जीव का पहला अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण है।
- इस कार्यक्रम का उद्देश्य मेटापॉपुलेशन के रूप में प्रबंधित एक व्यवहार्य और आत्मनिर्भर चीता आबादी स्थापित करना तथा उपयुक्त खुले पारिस्थितिक तंत्रों में इस प्रजाति की पारिस्थितिक भूमिका को पुनर्स्थापित करना है।
- यह कार्यक्रम पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत संचालित है और इसका नेतृत्व राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा किया जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और राज्य वन विभाग भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान को प्राथमिक चीता आवास के रूप में विकसित किया गया था। इसके बाद गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीता आवास के रूप में विकसित किया गया है।

