संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-1: जनसंख्या और उससे संबंधित मुद्दे।
सामान्य अध्ययन -2: सरकारी नीतियाँ एवं विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
सामान्य अध्ययन -2: स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास एवं प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को, जिसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कर दिया गया है, वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक पाँच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए कुल ₹53,428 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
अन्य संबंधित जानकारी
• इस मंजूरी में कार्यक्रम और इसकी उप-योजनाओं का नाम बदलना, दिव्यांगजनों के लिए पात्रता मानदंडों एवं सहायता दरों में संशोधन करना तथा वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना को उनके मौजूदा स्वरूप में जारी रखना शामिल है।
• इस मंजूरी से सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 3.20 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिलने की अपेक्षा है। दिव्यांगता पेंशन के संशोधित दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी करके लागू किए जाएँगे।

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के बारे में
• शुभारंभ: राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) का शुभारंभ 15 अगस्त, 1995 को किया गया था।
• नोडल मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय।
• उद्देश्य: गरीब परिवारों, विशेष रूप से कमजोर वृद्धजनों, विधवाओं, दिव्यांगजनों तथा परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु का सामना करने वाले परिवारों को सामाजिक सहायता प्रदान करना।
• संवैधानिक आधार: राज्य के नीति निदेशक तत्त्वों के अंतर्गत संविधान का अनुच्छेद 41, राज्य की आर्थिक क्षमता और विकास की सीमाओं के भीतर बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी, दिव्यांगता तथा अभाव की अन्य अनुचित परिस्थितियों में सार्वजनिक सहायता प्रदान करने का प्रावधान करता है।
• वित्तपोषण: देशभर में एकसमान सहायता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार NSAP के अंतर्गत 100% केंद्रीय सहायता प्रदान करती है।

• दिव्यांगता पेंशन में प्रमुख बदलाव:
- मासिक सहायता: 0–79 वर्ष की आयु के लाभार्थियों के लिए ₹375 तथा 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए ₹625।
- मानदंड दिव्यांगता: इसे 80% से घटाकर 40% कर दिया गया है।
- न्यूनतम आयु: पात्रता का विस्तार जन्म से ही कर दिया गया है।
- अन्य घटक: वृद्धावस्था पेंशन एवं विधवा पेंशन योजनाएँ तथा पारिवारिक लाभ योजना अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी।
योजना की आवश्यकता एवं महत्त्व
• सामाजिक सुरक्षा: सीमित आय और औपचारिक सामाजिक सुरक्षा तक अपर्याप्त पहुँच वाले कमजोर वर्गों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
• समावेशी कल्याण: वृद्धजनों, विधवाओं, दिव्यांगजनों तथा परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य को खोने वाले गरीब परिवारों को सहायता प्रदान करती है।
• वृद्ध होती जनसंख्या की आवश्यकता को पूरा करना: भारत की वृद्ध जनसंख्या लगभग 15 करोड़ से बढ़कर 34 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। वर्ष 2050 तक भारत के लगभग प्रत्येक पाँच में से एक व्यक्ति की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होने की अपेक्षा है।
• दिव्यांगजनों का समावेशन: मानदंड दिव्यांगता की सीमा को घटाकर 40% करके दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप बनाती है।
• संवैधानिक प्रतिबद्धता: कमजोर वर्गों के लिए सार्वजनिक सहायता को मजबूत करके संविधान के अनुच्छेद 41 के उद्देश्य को आगे बढ़ाती है।
योजना में कमियाँ/खामियाँ
• अपर्याप्त पेंशन राशि: केंद्र का वृद्धावस्था पेंशन योगदान वर्ष 2007 से 60–79 वर्ष की आयु के लाभार्थियों के लिए ₹200 प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए ₹500 प्रति माह बना हुआ है, जिससे मुद्रास्फीति के कारण क्रय शक्ति में कमी आई है।
• लाभार्थियों का सीमित दायरा: एनएसएपी की तीन पेंशन योजनाओं के अंतर्गत केंद्र स्तर पर लगभग 3.09 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं, जबकि पात्र जनसंख्या इससे कहीं अधिक है। गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से संबंधित पुराने आँकड़े और लाभार्थियों की निर्धारित सीमाएँ पहुँच को बाधित करती हैं।
• मुद्रास्फीति के अनुसार समायोजन का अभाव: पेंशन सहायता में मुद्रास्फीति के अनुसार स्वतः संशोधन नहीं किया जाता, जिससे आवश्यक जीवन-यापन और स्वास्थ्य देखभाल संबंधी खर्चों को पूरा करने की इसकी क्षमता कमजोर होती है।
• राज्यों की सहायता में असमानता: राज्यों का योगदान काफी भिन्न होता है, जिससे विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लाभार्थियों को मिलने वाली कुल पेंशन राशि में अंतर उत्पन्न होता है।
आगे की राह
• मुद्रास्फीति से जुड़ी पेंशन: क्रय शक्ति बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सहायता बढ़ती जीवन-यापन तथा स्वास्थ्य देखभाल संबंधी लागतों के अनुरूप बनी रहे, पेंशन सहायता में समय-समय पर संशोधन किया जाना चाहिए।
• लाभार्थियों का दायरा बढ़ाना: विश्वसनीय और नवीन सामाजिक-आर्थिक आँकड़ों का उपयोग करके लाभार्थियों की पहचान को अद्यतन किया जाना चाहिए तथा वर्तमान में वंचित पात्र व्यक्तियों को शामिल करने के लिए पुरानी निर्धारित सीमाओं में संशोधन किया जाना चाहिए।
• केंद्र–राज्य समन्वय को सुदृढ़ करना: देशभर में पेंशन सहायता में असमानताओं को कम करने के लिए राज्यों के अधिक समान और पर्याप्त योगदान को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
• साक्ष्य-आधारित कार्यान्वयन: पर्याप्तता का आकलन करने, सहायता वितरण में सुधार करने तथा पेंशन दरों और लाभार्थियों के दायरे की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय के मूल्यांकनों और लाभार्थी सर्वेक्षणों के निष्कर्षों का उपयोग किया जाना चाहिए।
