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सामान्य अध्ययन-2: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, e-शासन- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और क्षमता|

संदर्भ: केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने ‘न्याय तक समग्र पहुँच के लिए अभिनव समाधान अभिकल्पित करना (DISHA)’ नामक केंद्रीय क्षेत्र की योजना को ‘दिशा 2.0’ के रूप में पुनर्गठित करते हुए, 2026 से 2031 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है।

दिशा 2.0 के बारे में:

  • दिशा 2.0 के लिए XVI (सोलहवें) वित्त आयोग चक्र के तहत 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए कुल 255 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है।
  • यह न्याय विभाग की एक पुनर्गठित केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य “न्याय तक पहुँच” (Access to Justice) के संवैधानिक अधिदेश को पूरा करना है।
  • इसका आधार संविधान की प्रस्तावना का अनुच्छेद 14, 21 और 39A है, जो कानून के समक्ष समानता, जीवन और स्वतंत्रता के संरक्षण, और समान न्याय सुनिश्चित करने के लिए निःशुल्क कानूनी सहायता की गारंटी देते हैं।
  • यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्त पोषण के साथ लागू की जाएगी।
  • इसका लक्ष्य 2031 तक पूरे भारत में 3 करोड़ लाभार्थियों तक पहुँच बनाना है।
  • यह सतत विकास लक्ष्य (SDG) 16 के अनुरूप है, जो शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और समावेशी समाजों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, और ‘विकसित भारत 2047’ के भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करता है।

दिशा 2.0 के प्रमुख घटक

  • टेली-लॉ (वंचितों तक पहुँच): 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 784 जिलों में ग्राम पंचायत स्तर पर 2.5 लाख सीएससी (CSCs) के माध्यम से मुकदमों से पूर्व निःशुल्क कानूनी सलाह प्रदान करता है।
  • न्याय बंधु (प्रो-बोनो लीगल सर्विसेज) कार्यक्रम: पात्र व्यक्तियों के लिए निःशुल्क कानूनी सहायता और अदालती प्रतिनिधित्व को सक्षम बनाकर प्रो-बोनो (स्वैच्छिक/निःशुल्क) संस्कृति को बढ़ावा देता है।
  • कानूनी साक्षरता और कानूनी जागरूकता कार्यक्रम (LLLAP): मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), नागरिक समाज संगठनों (CSOs), विधि विश्वविद्यालयों और मीडिया के साथ सहयोग के माध्यम से कानूनी जागरूकता का प्रसार करता है।
  • विधि संजीवनी: निगरानी और डेटा-संचालित शासन के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच।

दिशा योजना (2021–26) की उपलब्धियाँ:

  • न्याय विभाग द्वारा ₹250 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ कार्यान्वित पूर्ववर्ती दिशा योजना (2021–26) ने पूरे भारत में 2.37 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक अपनी पहुँच बनाई।
  • इसमें टेली-लॉ के तहत 1.13 करोड़ से अधिक मुकदमे से पूर्व कानूनी सलाह, न्याय बंधु के अंतर्गत 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 10,681 प्रो-बोनो (स्वैच्छिक) अधिवक्ताओं का पंजीकरण और 109 प्रो-बोनो क्लबों की स्थापना, तथा कानूनी साक्षरता और कानूनी जागरूकता कार्यक्रम (LLLAP) के तहत 1.24 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पहुँच शामिल है।
  • इन उपलब्धियों ने योजना के विस्तार और ‘दिशा 2.0’ के रूप में इसके पुनर्गठन की नींव रखी।

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