संबंधित पाठ्यक्रम:
सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: जैव विविधता अभिसमय (CBD) के पक्षकारों के 17वें सम्मेलन (COP17) का समापन 31 अक्टूबर, 2026 को आर्मेनिया के येरेवान में हुआ। इसमें लगभग 50 निर्णयों को अपनाया गया तथा वर्ष 2030 तक कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (KMGBF) के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए ‘येरेवान पाथवे’ को स्वीकृति दी गई।
COP17 के प्रमुख परिणाम
- येरेवान पाथवे: यह वर्ष 2030 तक KMGBF के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए एक रोडमैप प्रदान करता है।
- पहली वैश्विक समीक्षा में पाया गया कि जैव विविधता से संबंधित 23 लक्ष्यों में से 22 को प्राप्त करने की दिशा में विश्व निर्धारित मार्ग से पीछे है। इससे हानिकारक सब्सिडी में सुधार, संरक्षण के अनुरूप राष्ट्रीय बजट तैयार करने तथा विकासशील देशों को अधिक सहायता प्रदान करने की आवश्यकता महसूस हुई।
- जैव विविधता वित्तपोषण: देशों ने वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष कम-से-कम 200 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने के लक्ष्य को दोहराया। इसमें विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को प्रतिवर्ष 30 अरब अमेरिकी डॉलर का अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण प्रदान करना शामिल है।
- विकसित देश वर्ष 2025 तक प्रतिवर्ष 20 अरब अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराने की अपनी पूर्व प्रतिबद्धता पूरी करने में विफल रहे। COP17 में जैव विविधता के लिए लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर के नए वित्तपोषण की घोषणा की गई।
- स्वदेशी समुदाय: COP17 में ‘सेवान दिशानिर्देश’ (Sevan Guidelines) को अपनाया गया। ये COP16 में स्थापित अनुच्छेद 8(j) पर स्थायी सहायक निकाय के लिए परिचालन संबंधी नियम हैं।
- ये दिशानिर्देश स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों को वैश्विक जैव विविधता नीति में अपने पारंपरिक ज्ञान और सुझावों का योगदान देने के लिए एक औपचारिक मंच प्रदान करते हैं।
- डिजिटल अनुक्रम सूचना (DSI): DSI से तात्पर्य जैविक संसाधनों से प्राप्त डिजिटल आनुवंशिक जानकारी, जैसे DNA और RNA अनुक्रमों से है।
- COP17 में कंपनियों द्वारा कैली फंड (Cali Fund) में अपने लाभ का 1% या राजस्व का 0.1% योगदान देने की दर की पुनः पुष्टि की गई। हालाँकि, केवल 10,565 अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता के साथ यह कोष काफी हद तक खाली रहा।
- जैव विविधता निगरानी: जैव विविधता निगरानी रूपरेखा को क्रियान्वित करने तथा देशों को अपनी आठवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट तैयार करने में सहायता देने के लिए एक तदर्थ तकनीकी विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया।
- अतिरिक्त वैकल्पिक संकेतकों को भी मान्यता दी गई।
- अन्यनिर्णय: देशों ने संरक्षित क्षेत्रों, वन जैव विविधता, आक्रामक विदेशी प्रजातियों, सतत वन्यजीव प्रबंधन, सिंथेटिक जीव विज्ञान और जैव सुरक्षा से संबंधित निर्णय अपनाए।
- इसके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रकृति-आधारित समाधानों पर स्वैच्छिक दिशानिर्देशों पर भी सहमति व्यक्त की गई।
- अगला सम्मेलन: पक्षकारों का अगला सम्मेलन (COP18) वर्ष 2028 में इक्वाडोर में आयोजित किया जाएगा।
- COP17 में भारत का रुख: भारत के राष्ट्रीय वक्तव्य में कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा (KMGBF) के कार्यान्वयन को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, परिस्थितियों और कानूनों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया गया।
- इसमें विकसित देशों से पूर्वानुमेय वित्तपोषण, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का आह्वान किया गया।
- भारत ने बहुपक्षीय तंत्र के माध्यम से डिजिटल अनुक्रम सूचना (DSI) से प्राप्त लाभों के बँटवारे का समर्थन किया, जिसमें कैली फंड भी शामिल है।
- भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्ययोजना में 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य और 142 संकेतक निर्धारित किए गए हैं।

जैव विविधता अभिसमय (CBD) के बारे में
- CBD एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसे वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण एवं विकास सम्मेलन (पृथ्वी शिखर सम्मेलन) में अपनाया गया था।
- यह 29 दिसंबर, 1993 को लागू हुआ।
- इसके 196 पक्षकार हैं: संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस अभिसमय पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन इसका अनुमोदन नहीं किया है।
- इसका सचिवालय मॉन्ट्रियल, कनाडा में स्थित है।
- तीन प्रमुख उद्देश्य: CBD के तीन मुख्य उद्देश्य हैं:
- 1. जैव विविधता का संरक्षण: पारिस्थितिकी तंत्रों, प्रजातियों और आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण करना।
- 2. जैव विविधता का सतत उपयोग: जैविक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना।
- 3. लाभों का उचित एवं न्यायसंगत बँटवारा: आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त होने वाले लाभों का उचित एवं न्यायसंगत बँटवारा सुनिश्चित करना।
- संस्थागत संरचना:
- पक्षकारों का सम्मेलन (COP): यह CBD का शासी निकाय है। यह कार्यान्वयन की समीक्षा करने, प्राथमिकताएँ निर्धारित करने और निर्णयों को अपनाने के लिए प्रत्येक दो वर्ष में बैठक करता है।
- CBD सचिवालय: यह मॉन्ट्रियल, कनाडा में स्थित है। यह अभिसमय के कार्यान्वयन में सरकारों की सहायता करता है, बैठकों का आयोजन करता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का समन्वय करता है।
- CBD के अंतर्गत प्रमुख समझौते:
- कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल (2000; वर्ष 2003 में लागू): जीवित संशोधित जीवों (LMOs) के सुरक्षित प्रबंधन, परिवहन और उपयोग से संबंधित।
- नागोया प्रोटोकॉल (2010; वर्ष 2014 में लागू): आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच तथा उनसे प्राप्त लाभों के उचित एवं न्यायसंगत बँटवारे से संबंधित।
- कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा (2022)।
कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा (KMGBF), 2022 के बारे में
- इसे दिसंबर 2022 में मॉन्ट्रियल, कनाडा में आयोजित CBD के 15वें पक्षकार सम्मेलन (COP15) में अपनाया गया था।
- यह वर्ष 2030 तक जैव विविधता के ह्रास को रोकने और उसकी स्थिति में सुधार लाने तथा वर्ष 2050 तक प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके रहने वाली दुनिया के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक वैश्विक रूपरेखा प्रदान करती है।
- इसमें वर्ष 2050 के लिए 4 दीर्घकालिक लक्ष्य और वर्ष 2030 के लिए 23 लक्ष्य शामिल हैं।
- महत्त्वपूर्ण लक्ष्यों में शामिल हैं:
- लक्ष्य 2: वर्ष 2030 तक क्षरित स्थलीय, अंतर्देशीय जल, तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों के कम-से-कम 30% हिस्से का पुनर्स्थापन करना।
- लक्ष्य 3 (30×30 लक्ष्य): वर्ष 2030 तक कम-से-कम 30% स्थलीय एवं अंतर्देशीय जल क्षेत्रों तथा 30% समुद्री एवं तटीय क्षेत्रों का संरक्षण करना।
- लक्ष्य 18: हानिकारक प्रोत्साहनों, जिनमें सब्सिडी भी शामिल हैं, की पहचान करना तथा उन्हें समाप्त करना, चरणबद्ध रूप से हटाना या उनमें सुधार करना और वर्ष 2030 तक इनमें प्रतिवर्ष कम-से-कम 500 अरब अमेरिकी डॉलर की कमी करना।
- लक्ष्य 19: वर्ष 2030 तक जैव विविधता के लिए सभी स्रोतों से प्रतिवर्ष कम-से-कम 200 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाना।
