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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय|  

संदर्भ: कौशल भारत मिशन (Skill India Mission–SIM) की 11वीं वर्षगाँठ वर्ष 2026 में मनाई जा रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में मिशन के शुभारंभ के ग्यारह वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है। इस मिशन का उद्देश्य युवाओं को रोज़गार, उद्यमिता तथा सतत आजीविका के लिए उद्योग-संगत कौशल से तैयार करना है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • कौशल भारत मिशन की 11वीं वर्षगाँठ विश्व युवा कौशल दिवस 2026 के साथ मनाई गई, जिसका आयोजन कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा किया गया।
  • विश्व युवा कौशल दिवस 2026 की थीम “साझा भविष्य के लिए कौशल (Skilling for a Shared Future)” थी, जो घरेलू तथा वैश्विक श्रम बाज़ारों के लिए कार्यबल को तैयार करने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

कौशल भारत मिशन के बारे में

  • लॉन्च: 15 जुलाई 2015
  • लॉन्च किया गया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा
  • नोडल मंत्रालय: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE)
  • विजन: उद्यमिता तथा आजीवन शिक्षण को बढ़ावा देते हुए कुशल, रोजगारोन्मुख एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल का निर्माण करना।
  • उद्देश्य:
    • युवाओं को उद्योग-संगत कौशल से तैयार करना।
    • रोज़गारयोग्यता एवं उत्पादकता में वृद्धि करना।
    • उद्यमिता एवं आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना।
    • उद्योगों की मांग एवं कार्यबल के कौशल के बीच के अंतर को कम करना।
    • विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप कार्य करना।
  • प्रमुख घटक:
    • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
    • जन शिक्षण संस्थान (JSS)
    • राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS)
    • औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) के माध्यम से कारीगर प्रशिक्षण योजना (CTS)
    • स्किल इंडिया डिजिटल हब
    • PM-SETU
    • इंडियास्किल्स एवं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिताएँ
    • उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence)
    • उद्यमिता एवं अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता संबंधी पहल
  • संस्थागत ढाँचा:
    • कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE)
    • राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC)
    • राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET)
    • सेक्टर स्किल काउंसिल्स (SSCs)

कौशल भारत मिशन की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 6 करोड़ से अधिक युवाओं को सशक्त बनाया गया है तथा कौशल भारत मिशन (SIM) के अंतर्गत प्रतिवर्ष 1 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS) के अंतर्गत वर्ष 2016 से अब तक 54.41 लाख से अधिक शिक्षुओं को विभिन्न क्षेत्रों में जोड़ा गया है। इसके माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) द्वारा “सीखते हुए कमाओ (Earn While You Learn)” मॉडल को बढ़ावा दिया गया है।
  • इंडियास्किल्स एवं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिताओं के माध्यम से भारत ने व्यावसायिक कौशल के क्षेत्र में अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ किया है। भारत ने ग्लोबल स्किल्स चैलेंज ऑस्ट्रेलिया 2026 तथा ताइपे कैपिटल कप 2026 में 3 स्वर्ण, 3 रजत, 1 कांस्य पदक तथा 3 मेरिट पुरस्कार प्राप्त किए।

कौशल भारत मिशन का महत्त्व

  • जनसांख्यिकीय लाभांश का दोहन: कौशल विकास के माध्यम से भारत को अपनी विशाल कार्यशील आयु की जनसंख्या का प्रभावी उपयोग करने में सक्षम बनाता है।
  • कौशल अंतराल को पाटना: प्रशिक्षण को उद्योगों की मांग के अनुरूप बनाकर उपलब्ध रोजगारों एवं कार्यबल की क्षमताओं के बीच के अंतर को कम करता है।
  • वैश्विक कार्यबल गतिशीलता को बढ़ावा देना: कुशल पेशेवरों को अंतरराष्ट्रीय श्रम बाज़ारों के लिए तैयार करता है तथा भारत को वैश्विक प्रतिभा हब के रूप में स्थापित करने में सहायता करता है।
  • भविष्य-उन्मुख कौशल को बढ़ावा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ, स्वचालन (ऑटोमेशन), ग्रीन जॉब्स तथा उद्योग 4.0 जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण का विस्तार करता है।
  • महिला-नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहन: कौशल विकास, उद्यमिता तथा गैर-पारंपरिक व्यवसायों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देता है।
  • समावेशी विकास में सहायता: ग्रामीण समुदायों, कारीगरों, जनजातीय आबादी, विद्यालय छोड़ चुके विद्यार्थियों तथा अन्य वंचित एवं संवेदनशील समूहों तक कौशल विकास के अवसरों का विस्तार करता है।
  • विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान: वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक कुशल, नवोन्मेषी एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल के निर्माण में योगदान देता है।
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