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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट: द पॉइंट ऑफ रिटर्न जारी की है। इसमें चेतावनी दी गई है कि वैश्विक तापमान वृद्धि को बिना किसी महत्त्वपूर्ण अतिक्रमण के 1.5°C तक सीमित रखना अब संभव नहीं है। साथ ही, वर्ष 2100 तक तापमान को इस स्तर पर वापस लाने के लिए उत्सर्जन में तत्काल कटौती करने का आह्वान किया गया है।
अन्य संबंधित जानकारी

- यह रिपोर्ट वर्ष 2010 से प्रकाशित हो रहे UNEP के वार्षिक आकलन का 17वाँ संस्करण है।
- यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब दुनिया भर के देश तापमान के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पार कर रहे हैं।
- वर्ष 2024 में, दुनिया में पहली बार तापमान में 1.5°C से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
- COP31 से पहले, यह रिपोर्ट तापमान में वृद्धि के निर्धारित स्तर से अधिक होने को न्यूनतम करने और वर्ष 2100 तक तापमान वृद्धि को 1.5°C पर वापस लाने के लिए उत्सर्जन में तत्काल कटौती करने का आह्वान करती है। साथ ही, जलवायु कार्रवाई के प्रमुख मानकों को वर्ष 2035 और 2040 तक विस्तारित करने की बात करती है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- वैश्विक ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन : वर्ष 2025 में 58.4 GtCO₂e तक पहुँच गया, जो वर्ष 2024 की तुलना में मामूली रूप से कम है।
- जीवाश्म ईंधन से उत्सर्जन: कुल ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में मामूली गिरावट के बावजूद, जीवाश्म ईंधनों से CO₂ उत्सर्जन में वृद्धि जारी रही।
- प्रमुख योगदानकर्ता: अफ्रीकी संघ को छोड़कर, G20 के सदस्य देशों का वैश्विक उत्सर्जन में 76% योगदान रहा। भूमि उपयोग, भूमि-उपयोग परिवर्तन और वानिकी (LULUCF) को छोड़कर, वर्ष 2025 में उनका उत्सर्जन 0.7% बढ़ा।
- राष्ट्रीय स्तर पर असमान रुझान: पिछले दशक में 63 देशों ने अपने उत्सर्जन में कमी की, जबकि 124 देशों में उत्सर्जन में वृद्धि दर्ज की गई।
- 1.5°C से अधिक तापमान वृद्धि का मार्ग: इस सदी के मध्य के आसपास अधिकतम तापमान वृद्धि को 1.7–1.8°C तक सीमित किया जा सकता है, जिसके बाद वर्ष 2100 तक तापमान वृद्धि को 1.5°C या उससे नीचे लाया जा सकता है। इसकी संभावना लगभग 50% है।
- आवश्यक उत्सर्जन कटौती: इस मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए, वर्ष 2025 के स्तर की तुलना में वैश्विक GHG उत्सर्जन में वर्ष 2030 तक 18%, वर्ष 2035 तक 45% और वर्ष 2040 तक 69% की कमी करना आवश्यक है।
- राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) में अंतराल: वर्तमान राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों (NDCs) के पूर्ण कार्यान्वयन से वर्ष 2030 तक उत्सर्जन में केवल 5–8% और वर्ष 2035 तक 11–15% की कमी होगी।
- भविष्य में तापमान वृद्धि: वर्तमान नीतियों के तहत वैश्विक तापमान में 2.8°C तक वृद्धि हो सकती है। NDCs के पूर्ण कार्यान्वयन से यह वृद्धि 2.6°C और NDCs के साथ अतिरिक्त शुद्ध-शून्य उत्सर्जन संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने पर लगभग 2.1°C रह सकती है।
- कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन: तापमान वृद्धि को वापस 1.5°C तक लाने के लिए इस सदी के दौरान लगभग 320 Gt CO₂ को वायुमंडल से हटाकर स्थायी रूप से संग्रहित करना आवश्यक होगा।
प्रमुख सिफारिशें
- उत्सर्जन में कटौती में तेजी लाना: मौजूदा जलवायु प्रतिबद्धताओं पर निर्भर रहने के बजाय GHG उत्सर्जन में तत्काल, व्यापक और निरंतर कटौती लागू करना।
- स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करना: वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने और ऊर्जा दक्षता में सुधार की वार्षिक दर को दोगुना करने के GST लक्ष्यों को आगे बढ़ाना।
- जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना: जीवाश्म ईंधनों से दूर संक्रमण में तेजी लाना तथा ऊर्जा प्रणालियों और सड़क परिवहन से होने वाले उत्सर्जन में कटौती करना।
- मीथेन उत्सर्जन में कटौती करना: वर्ष 2025 के स्तर की तुलना में वर्ष 2035 तक कम-से-कम 25% और वर्ष 2040 तक 40% मीथेन उत्सर्जन कम करना।
- वनों का संरक्षण करना: वर्ष 2030 तक वनों की कटाई और वन क्षरण को रोकने तथा उन्हें उलटने के प्रयासों में तेजी लाना।
- कार्बन निष्कासन का विस्तार करना: उत्सर्जन में व्यापक कटौती के साथ-साथ सतत कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन और इसके स्थायी भंडारण की क्षमता विकसित करना।
