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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव।
संदर्भ: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने ‘भव्य’ (BHAVYA) योजना के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह देश भर में निवेश के लिए तैयार और वैश्विक स्तर के औद्योगिक पार्कों को विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक ऐतिहासिक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
अन्य संबंधित जानकारी
- ‘भव्य’ योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मार्च 2026 में देश भर में 100 ‘प्लग-एंड-प्ले’ (तुरंत परिचालन योग्य) औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए ₹33,660 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई थी।
- हाल ही में जारी किए गए दिशानिर्देश राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा इस योजना के सुचारू निष्पादन के लिए संस्थागत, वित्तीय, शासन और परियोजना-चयन ढांचा प्रदान करते हैं।
- इस योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से शुरू होकर छह वर्ष की अवधि में कार्यान्वित किया जाएगा। यह योजना राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) के तहत विकसित औद्योगिक स्मार्ट शहरों के अनुभवों पर आधारित है।
- ये दिशानिर्देश मुख्य रूप से ‘प्लग-एंड-प्ले’ अवसंरचना, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, संधारणीयता, प्रतिस्पर्धी संघवाद और निवेश के अनुकूल औद्योगिक इकोसिस्टम के विकास पर बल देते हैं।
भव्य/BHAVYA दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएँ
1. प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक इकोसिस्टम:
- यह योजना पूर्व-स्वीकृत भूमि, तैयार अवसंरचना, एकीकृत जनोपयोगी सुविधाएं और सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रदान करके ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक मॉडल को बढ़ावा देती है, ताकि परियोजनाओं की निर्माणावधि को कम किया जा सके और विनिर्माण गतिविधियों में तेजी लाई जा सके।
- ‘भव्य’ एक क्षेत्रक-तटस्थ योजना है जो सभी क्षेत्रों के विनिर्माण उद्योगों के लिए खुली है। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्टार्टअप, बड़ी विनिर्माण इकाइयों, रसद प्रदाताओं और वैश्विक निवेशकों को सहायता प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
- पीएम गतिशक्ति के साथ संरेखण: मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, रसद दक्षता और परिवहन नेटवर्क के साथ निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए यह योजना पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप है।
2. चरणबद्ध कार्यान्वयन और चयन ढांचा:
- यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से शुरू होकर छह वर्षों की अवधि में कार्यान्वित की जाएगी, जिसके पहले चरण में 50 औद्योगिक पार्कों को विकसित करना प्रस्तावित है।
- राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देने और सुधार-उन्मुख तथा निवेश के लिए तैयार प्रस्तावों को प्रोत्साहित करने के लिए परियोजनाओं का चयन ‘चैलेंज मोड’ प्रतिस्पर्धात्मक ढांचे के माध्यम से किया जाएगा।
- आवेदन के लिए पहली विंडो 1 जून से 31 जुलाई 2026 तक खुली रहेगी, जबकि 1 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक चलने वाले दूसरे दौर में संशोधित या पहले दौर में चयनित न हो सके प्रस्तावों को पुनः आवेदन करने की अनुमति होगी।
- परियोजना प्रस्तावों का मूल्यांकन मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPRs) की गुणवत्ता, संस्थागत तत्परता और संधारणीयता के मानकों जैसे मापदंडों के आधार पर किया जाएगा।
3. भूमि और अवसंरचना ढांचा:
- औद्योगिक पार्कों का आकार सामान्यतः 100 से 1,000 एकड़ के बीच होगा। पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों/क्षेत्रों के लिए न्यूनतम भूमि की आवश्यकता में छूट देकर 25 एकड़ किया गया है। इस योजना के तहत ग्रीनफील्ड परियोजनाएं और गैर-आवंटित पूर्व-विकसित औद्योगिक भूमि (दोनों ही पात्र हैं।
- यह योजना मुख्य अवसंरचना जैसे कि सड़कों, भूमिगत उपयोगिता गलियारों, जल निकासी प्रणालियों, उपचार संयंत्रों, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) अवसंरचना, फैक्ट्री शेड, परीक्षण सुविधाओं, भंडारण, श्रमिक आवास और सामाजिक सुविधाओं के विकास के लिए प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक की केंद्रीय सहायता प्रदान करती है।
- औद्योगिक पार्कों को राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों और रसद नेटवर्कों से जोड़ने वाली बाह्य कनेक्टिविटी अवसंरचना के लिए कुल परियोजना लागत का 25% तक प्रदान किया जा सकता है।
4. शासन और संस्थागत संरचना:
- उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) इस योजना का नोडल मंत्रालय है, जबकि राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) इसकी कार्यान्वयन एजेंसी है।
- प्रत्येक चयनित परियोजना को कंपनी अधिनियम के तहत एक समर्पित विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) स्थापित करना होगा। इस SPV के पास नियोजन, अवसंरचना प्रबंधन और सिंगल विंडो क्लीयरेंस की शक्तियां होंगी। साथ ही, पारदर्शी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से इसमें निजी डेवलपर्स की भागीदारी की भी अनुमति होगी।
योजना का महत्व
- विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा: ‘भव्य’ योजना का उद्देश्य अवसंरचनात्मक बाधाओं को कम करना और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करके वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करना है।
- रोजगार सृजन: इस योजना से रसद और सेवा क्षेत्रों में मिलने वाले पर्याप्त अप्रत्यक्ष रोजगार के अतिरिक्त, लगभग 15 लाख प्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन होने की संभावना है।
- निवेश आकर्षण: तुरंत परिचालन योग्य अवसंरचना और सरलीकृत स्वीकृतियां प्रवेश बाधाओं को कम कर सकती हैं तथा घरेलू एवं वैश्विक उद्योगों के लिए निवेशक विश्वास में सुधार कर सकती हैं।
- औद्योगिक समूहों को सुदृढ़ करना: समूह-आधारित औद्योगिक विकास उद्योगों की एक ही स्थान पर सह-अवस्थिति के माध्यम से आपूर्ति-श्रृंखला एकीकरण में सुधार कर सकता है और रसद लागत को कम कर सकता है।
- क्षेत्रीय और समावेशी औद्योगिकीकरण: यह योजना पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता सहित सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में संतुलित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देती है।
