संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय; गरीबी और भूख से संबंधित विषय।
संदर्भ: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध कराने के लिए ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत चावल की गुणवत्ता संबंधी संशोधित विनिर्देशों को मंजूरी दी है।
अन्य संबंधित जानकारी

- मंत्रिमंडल ने लगभग तीन दशकों में पहली बार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत चावल की गुणवत्ता के मानकों में संशोधन किया है।
- कच्चे चावल के लिए टूटे हुए अनाज की स्वीकार्य मात्रा 25% से घटाकर 10% और उबले चावल के लिए 16% से घटाकर 5% कर दी गई है, जबकि लाभार्थियों के खाद्यान्न पात्रता में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
- उन्नत गुणवत्ता वाले चावल की खरीद तत्काल शुरू होगी और खरीफ विपणन सत्र (KMS) 2027–28 तक सभी खरीद करने वाले राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत वितरण भी चरणबद्ध तरीके से होगा।
- इस सुधार में एंड-टू-एंड ट्रैसेबिलिटी (संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला में पता लगाने की क्षमता) के लिए चावल की बोरियों पर QR कोड टैगिंग और अलग किए गए टूटे हुए चावल का उत्पादक उपयोग शामिल है, और इससे लॉजिस्टिक्स,
- भंडारण तथा पैकेजिंग लागत में कमी के माध्यम से लगभग ₹2,161 करोड़ की वार्षिक बचत होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के बारे में

महत्व
- खाद्य गुणवत्ता में सुधार: यह सुनिश्चित करता है कि लाभार्थियों को उनकी पात्रता में कटौती किए बिना बेहतर दाने, दिखावट और उपभोक्ता स्वीकार्यता वाला चावल प्राप्त हो।
- खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) ढांचे के तहत केवल भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने से आगे बढ़कर अब उच्च गुणवत्ता वाले खाद्यान्न वितरण की ओर बढ़ना।
- दक्षता में वृद्धि: अलग किए गए टूटे हुए चावल का उत्पादक उपयोग और मिल मालिकों के परिसर से सीधे नीलामी, बर्बादी को कम करती है और संसाधन उपयोग में सुधार करती है।
- राजकोषीय बोझ में कमी: परिवहन, भंडारण और पैकेजिंग लागत में कमी के साथ-साथ टूटे हुए चावल की बिक्री से अतिरिक्त राजस्व के माध्यम से लगभग ₹2,161 करोड़ की वार्षिक बचत का अनुमान है।
- पारदर्शिता को बढ़ावा: QR-कोड टैगिंग चावल की बोरियों की एंड-टू-एंड ट्रैसेबिलिटी (आपूर्ति श्रृंखला में पूर्ण निगरानी) को सक्षम बनाती है, जिससे इन्वेंट्री प्रबंधन में सुधार होता है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में रिसाव (लीकेज) कम होता है।
