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सामान्य अध्ययन-2: वैधानिक, विनियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय; सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन एवं कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
सामान्य अध्ययन -3: संरक्षण; पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।
संदर्भ: हाल ही में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण बढ़ने से पहले ही दिल्ली-एनसीआर में प्रभावी प्रदूषण-नियंत्रण उपायों को लागू करना है।
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) को समझना
- GRAP के बारे में
- GRAP एक आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र है, जिसका उद्देश्य क्रमिक रूप से अधिक कड़े प्रदूषण-नियंत्रण उपायों के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना है।
- विकास: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2016 में अनुमोदित GRAP को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की सिफारिशों के आधार पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा जनवरी 2017 में पहली बार अधिसूचित किया गया था।
- कार्यान्वयन: प्रारंभ में पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) द्वारा लागू किया गया GRAP अब CAQM की देखरेख में है। CAQM, CAQM अधिनियम, 2021 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है।
- GRAP कैसे कार्य करता है?
- GRAP चार चरणों के माध्यम से कार्य करता है, जिन्हें दिल्ली के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आधार पर निर्धारित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान और मौसम संबंधी परिस्थितियाँ भी GRAP लागू करने के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- यह संचयी प्रकृति का है: जब उच्चतर चरण लागू किया जाता है, तब पहले के चरणों के तहत लागू उपाय जारी रहते हैं।
- संस्थागत ढाँचा
- CAQM, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, राज्य सरकारों, नगर निकायों तथा अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से GRAP के कार्यान्वयन का समन्वय करता है।
- इसका क्षेत्रीय दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के कई स्रोत हैं, जिनमें वाहन, निर्माण से उत्पन्न धूल, उद्योग, अपशिष्ट तथा बायोमास जलाना शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, सर्दियों की प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियाँ प्रदूषण को और बढ़ा देती हैं।

संशोधित GRAP शेड्यूल में प्रमुख परिवर्तन
- प्रदूषण-नियंत्रण उपायों का पहले लागू किया जाना: डीजल जनरेटर सेटों तथा पुराने अंतर्राज्यीय बसों के प्रवेश से संबंधित प्रतिबंधों को चरण-II से हटाकर चरण-I में कर दिया गया है, जिससे वायु गुणवत्ता के और खराब होने से पहले ही कार्रवाई की जा सकेगी। धूल, अपशिष्ट प्रबंधन और परिवहन से संबंधित बार-बार दोहराए जाने वाले उपायों को भी एकीकृत किया गया है।
- वाहनों पर अधिक कड़े प्रतिबंध: पुराने पेट्रोल और डीजल चार-पहिया वाहनों पर लागू प्रतिबंधों का विस्तार NCR के अतिरिक्त क्षेत्रों तक किया गया है।
- इसके अतिरिक्त, आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले पुराने मालवाहक वाहनों को पहले चरण-III और चरण-IV के तहत प्राप्त छूट को वापस ले लिया गया है, जिससे गंभीर प्रदूषण की स्थिति के दौरान वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध और कड़े हो गए हैं।
- धूल-नियंत्रण की विस्तारित निगरानी: पात्र निर्माण एवं विध्वंस स्थलों पर धूल-नियंत्रण उपायों के लिए अनिवार्य वेब-पोर्टल आधारित पंजीकरण और निगरानी को नगर निकायों की सीमाओं से आगे बढ़ाकर अतिरिक्त शहरी, विकास तथा औद्योगिक क्षेत्रों तक विस्तारित किया गया है।
- संशोधित कार्रवाई शेड्यूल: अद्यतन GRAP में चार चरणों के अंतर्गत कुल 48 कार्रवाई उपाय शामिल हैं। इसके साथ ही विस्तारित नागरिक चार्टर में निवासियों और हितधारकों के लिए अतिरिक्त क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts) निर्धारित किए गए हैं।
संशोधन का महत्व
- पहले हस्तक्षेप: कुछ प्रतिबंधों को GRAP के निम्नतर चरणों में स्थानांतरित करना इस प्रयास को दर्शाता है कि प्रदूषण के गंभीर स्तर तक पहुँचने से पहले ही उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा सके।
- स्रोत-विशिष्ट विनियमन: वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, जनरेटर सेटों और निर्माण से उत्पन्न धूल पर अधिक जोर देने से चिन्हित प्रदूषण स्रोतों के विरुद्ध अधिक लक्षित कार्रवाई संभव होगी।
- क्षेत्रीय दृष्टिकोण: पूरे NCR में प्रतिबंधों के व्यापक अनुप्रयोग से यह मान्यता मिलती है कि वायु प्रदूषण प्रशासनिक सीमाओं तक सीमित नहीं है और इसके लिए समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।
- आपातकालीन उपायों की सीमाएँ: यद्यपि GRAP गंभीर प्रदूषण की घटनाओं से निपटता है, लेकिन दीर्घकालिक सुधार के लिए स्वच्छ परिवहन, औद्योगिक विनियमन, अपशिष्ट प्रबंधन तथा अन्य संरचनात्मक उपायों के माध्यम से पूरे वर्ष उत्सर्जन में कमी लाना आवश्यक है।
दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता के प्रबंधन में बनी हुई चुनौतियाँ
- बहु-स्रोत प्रदूषण: वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियों, निर्माण से उत्पन्न धूल, बायोमास जलाने तथा सर्दियों की प्रतिकूल परिस्थितियों का परस्पर प्रभाव प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को जटिल बनाता है।
- प्रवर्तन संबंधी कमियाँ: प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विभिन्न क्षेत्रों और प्रशासनिक अधिकार-क्षेत्रों में निरंतर निगरानी, संस्थागत क्षमता तथा नियमों का अनुपालन आवश्यक है।
- अंतर्राज्यीय समन्वय: प्रदूषण के स्रोत दिल्ली की प्रशासनिक सीमाओं से बाहर तक फैले हुए हैं, जिसके कारण NCR के राज्यों के बीच समन्वित क्षेत्रीय कार्रवाई आवश्यक हो जाती है।
- मौसमी निर्भरता: आपातकालीन प्रतिबंधों पर बार-बार निर्भरता शहरीकरण, परिवहन की बढ़ती मांग और औद्योगिक गतिविधियों से उत्पन्न लगातार होने वाले उत्सर्जन की समस्या का पर्याप्त समाधान नहीं कर सकती।
आगे की राह
- पूरे वर्ष रोकथाम: स्रोत स्तर पर उत्सर्जन में कमी लाने के उपायों को मजबूत किया जाए तथा अग्रिम प्रदूषण-नियंत्रण उपायों में वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान को समाहित किया जाए।
- क्षेत्रीय शासन: वायु-क्षेत्र आधारित प्रबंधन दृष्टिकोण के माध्यम से CAQM, CPCB, राज्य सरकारों और स्थानीय प्राधिकरणों के बीच समन्वय में सुधार किया जाए।
- स्वच्छ शहरी अवसंरचना: सार्वजनिक परिवहन का विस्तार किया जाए, स्वच्छतर परिवहन को गति दी जाए तथा निर्माण एवं सड़क-धूल प्रबंधन संबंधी मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
- एकीकृत स्रोत प्रबंधन: GRAP के कार्यान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाए।
