यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में तीन भारतीय स्थल शामिल

संदर्भ: तीन नए स्थलों को हाल ही में शामिल किए जाने के बाद भारत की यूनेस्को विश्व धरोहर अस्थायी सूची में संपत्तियों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है।

नए स्थलों के बारे में

  • बाराटांग का कार्स्ट–पंक ज्वालामुखी परिसर (अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह):
    • प्रस्तावित स्थल ग्रेट अंडमान की मुख्य द्वीप श्रृंखला पर स्थित है। इसमें चूना-पत्थर की गुफाएँ और सक्रिय पंक ज्वालामुखी शामिल हैं।
    • इसकी भूवैज्ञानिक विशेषताएँ क्षेत्र की विवर्तनिक गतिविधियों से संबंधित हैं। यहाँ की गुफाएँ जैविक विविधता से समृद्ध उष्णकटिबंधीय वन एवं तटीय भू-दृश्य का भी हिस्सा हैं।
  • अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी (अंडमान सागर):
    • इसमें बैरन द्वीप और नारकोंडम द्वीप शामिल हैं। ये बर्मा–अंडमान–जावा ज्वालामुखीय परिसर के आंतरिक ज्वालामुखीय चाप में स्थित चतुर्थ कल्प के दो सबडक्शन ज्वालामुखी हैं।
    • ये दोनों द्वीप मिलकर ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं, पारिस्थितिक अनुक्रमण और स्थानिकता को प्रदर्शित करते हैं। बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।
  • सिरपुर सांस्कृतिक एवं पुरातात्त्विक भू-दृश्य (छत्तीसगढ़):
    • यह महासमुंद जिले में महानदी के पूर्वी तट पर स्थित है और रायपुर से लगभग 78 किमी दूर है।
    • यह प्राचीन नगर श्रीपुर के नाम से भी जाना जाता है। इसका विकास दक्षिण कोसल राज्य की राजधानी के रूप में हुआ और शरभपुरीय तथा पांडुवंशी राजवंशों के शासनकाल में यह समृद्ध हुआ।
    • यहाँ के अवशेष बहुधार्मिक संरक्षण, ऐतिहासिक व्यापार और स्थापत्य विकास को दर्शाते हैं। यहाँ की संरचनाएँ मोटे तौर पर 5वीं से 12वीं शताब्दी ईस्वी के बीच की हैं।

यूनेस्को की अस्थायी सूची के बारे में

  • यह उन स्थलों की सूची है, जिन्हें कोई देश यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में नामांकन के लिए विचारार्थ प्रस्तुत करने का इरादा रखता है।
  • इस सूची में शामिल होना नामांकन के लिए एक पूर्वापेक्षा है, लेकिन इससे किसी स्थल को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त नहीं होता। निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद विश्व धरोहर समिति किसी स्थल को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का निर्णय लेती है।
  • यूनेस्को के परामर्शदाता निकायों में सांस्कृतिक विरासत के लिए ICOMOS तथा प्राकृतिक विरासत के लिए IUCN शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र की 81वीं वर्षगाँठ

संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र ने 24 अक्टूबर 2026 को अपनी 81वीं वर्षगाँठ मनाई। यह वर्षगाँठ 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के लागू होने की स्मृति में मनाई जाती है।

संयुक्त राष्ट्र के बारे में

  • स्थापना: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 24 अक्टूबर 1945 को 51 संस्थापक सदस्य देशों के साथ इसकी स्थापना हुई।
  • सदस्यता: वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देश हैं। दक्षिण सूडान, जिसे 14 जुलाई 2011 को सदस्यता प्रदान की गई, इसका सबसे हाल में शामिल होने वाला सदस्य देश है।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर: इस पर 26 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में हस्ताक्षर किए गए तथा यह 24 अक्टूबर 1945 को लागू हुआ। यह संयुक्त राष्ट्र की संस्थापक संधि है, जो इसके उद्देश्यों, सिद्धांतों, संस्थागत ढाँचे और शक्तियों को परिभाषित करती है।
  • उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना, राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना तथा मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं के प्रति सम्मान को प्रोत्साहित करना।
  • मुख्यालय: न्यूयॉर्क शहर, संयुक्त राज्य अमेरिका। संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंग हैं, जिनमें से अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ), जिसका मुख्यालय हेग, नीदरलैंड में है, एकमात्र ऐसा अंग है जो न्यूयॉर्क के बाहर स्थित है।

    संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंग

    • महासभा (UNGA): यह संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख विचार-विमर्शकारी, नीतिगत निर्णय लेने वाला और प्रतिनिधिक अंग है। इसमें सभी 193 सदस्य देश शामिल हैं और प्रत्येक देश का एक मत होता है।
    • सुरक्षा परिषद (UNSC): इस पर अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसमें 15 सदस्य होते हैं—पाँच स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) तथा महासभा द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल के लिए निर्वाचित दस अस्थायी सदस्य। स्थायी सदस्यों के पास सारभूत निर्णयों पर वीटो शक्ति होती है।
    • आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC): यह अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों के बीच समन्वय स्थापित करती है, उनकी समीक्षा करती है तथा सतत विकास के लिए सहयोग को बढ़ावा देती है।
    • न्यास परिषद: इसकी स्थापना न्यास क्षेत्रों की निगरानी करने और उन्हें स्वशासन या स्वतंत्रता की दिशा में मार्गदर्शन देने के लिए की गई थी। सभी न्यास क्षेत्रों को स्वशासन या स्वतंत्रता प्राप्त हो जाने के बाद इसने 1994 में अपना कार्य स्थगित कर दिया।
    • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ): यह संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है और हेग में स्थित है। यह देशों के बीच कानूनी विवादों का निपटारा करता है तथा अधिकृत संयुक्त राष्ट्र अंगों और एजेंसियों द्वारा संदर्भित कानूनी प्रश्नों पर परामर्शात्मक राय देता है।
    • सचिवालय: यह महासचिव के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र के दैनिक कार्यों का संचालन करता है तथा संगठन के प्रमुख अंगों द्वारा सौंपे गए दायित्वों को पूरा करता है।

    भारत की पहली समुद्री क्षेत्र की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी SMFCL का विस्तार

    संदर्भ: सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (SMFCL), जो भारत की पहली समुद्री क्षेत्र-केंद्रित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है, ने ₹5,107 करोड़ का ऋण वितरित किया है। इसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2030–31 के अंत तक कुल ₹60,205 करोड़ का ऋण संवितरण करना है।

    सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (SMFCL) के बारे में

    • उत्पत्ति: इसकी स्थापना 31 अगस्त 2016 को सागरमाला डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (SDCL) के रूप में हुई थी। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से गैर-जमा स्वीकार करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में पंजीकरण प्राप्त करने के बाद, जून 2025 में इसका पुनर्गठन कर SMFCL बनाया गया।
    • प्रशासनिक स्थिति: यह पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाला उद्यम है। इसे मिनी रत्न श्रेणी-I केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (CPSE) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
    • अधिदेश: यह समुद्री क्षेत्र की संपूर्ण मूल्य शृंखला में विशेषीकृत दीर्घकालिक वित्तपोषण प्रदान करता है। इसमें बंदरगाह, तटीय अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, अंतर्देशीय जलमार्ग, जहाज निर्माण और जहाजों की मरम्मत शामिल हैं।

    प्रमुख पहल एवं भावी कार्ययोजना

    • समुद्री विकास निधि (MDF): इसके दो घटक हैं:
    • समुद्री निवेश निधि (MIF): एसबीआई वेंचर्स लिमिटेड को इसका निधि प्रबंधक नियुक्त किया गया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ वैकल्पिक निवेश निधि के रूप में पंजीकरण नवंबर 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके तहत जनवरी 2027 तक ₹5,000 करोड़ की प्रारंभिक निधि जुटाने का लक्ष्य है। ₹20,000 करोड़ के लक्षित कुल कोष में MIF के लिए भारत सरकार का योगदान ₹9,800 करोड़ तक हो सकता है।
    • ब्याज प्रोत्साहन निधि (IIF): इसका उद्देश्य पात्र पोत निर्माण इकाइयों की उधार लागत कम करना है। इसके अंतर्गत ₹4,500 करोड़ के ऋणों को सहायता प्रदान की गई है, जबकि ब्याज अनुदान के रूप में लगभग ₹25 करोड़ जारी किए गए हैं।
    • अन्य सहायता: SMFCL पोत निर्माण विकास योजना के अंतर्गत ऋण जोखिम सहायता का प्रबंधन करता है। साथ ही, यह सागरमाला कार्यक्रम और राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर से संबंधित निधियों के वितरण एवं उपयोग की निगरानी करता है।

    एशियाई पैरा गेम्स 2026

    संदर्भ: 5वें एशियाई पैरा खेलों का समापन 24 अक्टूबर 2026 को जापान के आइची-नागोया में हुआ। इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में भारत ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ पदक प्रदर्शन किया।

    एशियाई पैरा गेम्स के बारे में

    • आयोजक: एशियाई पैरालंपिक समिति (APC), जो एशिया में पैरालंपिक आंदोलन का संचालन करने वाली क्षेत्रीय संस्था है।
    • इतिहास: इन खेलों का विकास दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए सुदूर पूर्व एवं दक्षिण प्रशांत खेलों (FESPIC) से हुआ, जिनका आयोजन पहली बार 1975 में किया गया था। पहले एशियाई पैरा गेम्स 2010 में चीन के ग्वांगझू में आयोजित हुए थे।
    • 2026 का संस्करण: इसका आयोजन 18–24 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में किया गया, जिसमें 18 खेल शामिल थे।
    • अगला संस्करण: छठे एशियाई पैरा खेलों का आयोजन 2030 में कतर के दोहा में किया जाएगा।

    भारत का प्रदर्शन

    • रिकॉर्ड पदक उपलब्धि: भारत ने 114 पदक—30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य जीते तथा पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया।
    • पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का रिकॉर्ड तोडा: भारत ने 2022 के एशियाई पैरा खेलों में जीते गए अपने पिछले सर्वश्रेष्ठ 108 पदकों के आँकड़े को पार किया। ये खेल 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित हुए थे।
    • खेलवार योगदान: पैरा एथलेटिक्स ने सर्वाधिक 65 पदक दिलाए, इसके बाद पैरा बैडमिंटन ने 16 और पैरा तैराकी ने 11 पदक दिलाए।
    • उल्लेखनीय उपलब्धियाँ: निषाद कुमार ने पुरुषों की ऊँची कूद और लंबी कूद (T47) दोनों में स्वर्ण पदक जीते, जबकि मोना अग्रवाल ने निशानेबाजी में दो स्वर्ण पदक जीते। इनमें 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशंस (SH1) स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड के साथ हासिल किया गया स्वर्ण पदक भी शामिल है।

      भारतीय भौतिक विज्ञानी को ऑस्कर क्लेन पदक

      संदर्भ: भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी अशोक सेन को वर्ष 2026 का ऑस्कर क्लेन पदक प्रदान किया गया है। यह सम्मान प्राप्त करने वाले वे पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बन गए हैं।

      अशोक सेन एवं उनके योगदान के बारे में

      • संबद्धता: वे बेंगलुरु स्थित सैद्धांतिक विज्ञान के अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (ICTS) में ICTS-इन्फोसिस माधव चेयर प्रोफेसर हैं। यह संस्थान टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (TIFR) का हिस्सा है।
      • प्रमुख योगदान: स्ट्रिंग सिद्धांत के क्षेत्र में अग्रणी कार्य, विशेष रूप से S-द्वैत, ब्लैक होल की एंट्रॉपी की सटीक गणना तथा स्ट्रिंग क्षेत्र सिद्धांत।
      • अन्य सम्मान: उन्हें मौलिक भौतिकी में ब्रेकथ्रू पुरस्कार (2012) और डिराक पदक (2014) प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें पद्म श्री (2001) और पद्म भूषण (2013) से भी सम्मानित किया गया है।

      ऑस्कर क्लेन पदक के बारे में

        • पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्थाएँ: स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज़ की नोबेल भौतिकी समिति।
        • इस पदक की स्थापना 1988 में हुई थी। यह भौतिकी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान को मान्यता देता है तथा इसका नाम स्वीडिश सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी ऑस्कर क्लेन के नाम पर रखा गया है।
        • वर्ष 2026 के पुरस्कार के अंतर्गत, सेन ने 22 अक्टूबर 2026 को स्टॉकहोम विश्वविद्यालय के अल्बानोवा केंद्र में “स्ट्रिंग से गुरुत्वाकर्षण और गुरुत्वाकर्षण से स्ट्रिंग” शीर्षक से ऑस्कर क्लेन स्मृति व्याख्यान दिया।
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