संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव।

संदर्भ: विश्व बैंक समूह ने विकासशील देशों में किफायती डिजिटल पहुँच का विस्तार करने, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार लाने और रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से सियोल में अपनी पहली व्यापक डिजिटल रणनीति शुरू की।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस रणनीति का अनावरण विश्व बैंक समूह के पहले वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं डिजिटल शिखर सम्मेलन में किया गया।
    • सियोल में आयोजित इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी विश्व बैंक समूह ने दक्षिण कोरिया के अर्थव्यवस्था एवं वित्त मंत्रालय (MOFE) और विज्ञान एवं ICT मंत्रालय (MSIT) के साथ मिलकर की। इसमें चर्चा की गई कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ किस प्रकार रोजगार सृजित कर सकती हैं, उत्पादकता बढ़ा सकती हैं तथा सेवाओं तक पहुँच का विस्तार कर सकती हैं।
  • अगले 10–15 वर्षों में विकासशील देशों के 120 करोड़ युवाओं के कार्यशील आयु वर्ग में प्रवेश करने की संभावना है, जबकि इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं में केवल 42 करोड़ रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
  • इस रणनीति के साथ ही विश्व बैंक समूह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना एवं तत्परता पहल (AI Infrastructure and Readiness Initiative) की घोषणा की, जिसके प्रारंभिक चरण में अफ्रीका और लैटिन अमेरिका पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

विश्व बैंक समूह की पहली व्यापक डिजिटल रणनीति के बारे में

  • यह रणनीति विकासशील देशों को डिजिटल अवसंरचना सुदृढ़ करने, प्रौद्योगिकी तक पहुँच में सुधार करने तथा विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करने में सहायता प्रदान करने हेतु विश्व बैंक समूह की सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की क्षमताओं को एकीकृत करती है।
  • यह चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर केंद्रित है:
    • विश्वसनीय कनेक्टिविटी का विस्तार: अंतरराष्ट्रीय केबल, राष्ट्रीय नेटवर्क और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सहित डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करना। इसके साथ ही, अपर्याप्त डिजिटल सेवाओं वाले क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना।
    • उपकरणों और डेटा को किफायती बनाना: निर्माताओं, मोबाइल ऑपरेटरों और वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से शुरुआती स्तर के स्मार्टफोन तथा ब्रॉडबैंड सेवाओं की लागत कम करना।
    • डिजिटल सेवाओं एवं कौशल को बढ़ावा देना: डिजिटल पहचान, भुगतान और सुरक्षित सूचना-साझाकरण प्रणालियों को बढ़ावा देना। इसके साथ ही, डिजिटल साक्षरता तथा रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करना।
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए तत्परता विकसित करना: कंप्यूटिंग संसाधनों, उपयोगी स्थानीय डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी कौशलों तक पहुँच में सुधार करना। इसमें “लघु कृत्रिम बुद्धिमत्ता” (Small AI) पर विशेष जोर दिया गया है। इससे आशय ऐसे किफायती, विशिष्ट कार्यों के लिए विकसित उपकरणों से है, जिन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाता है। उदाहरण के लिए, फसलों में रोगों की पहचान करना, स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता करना तथा व्यावसायिक भंडार का प्रबंधन करना।

प्रमुख तथ्य एवं पहलें

  • डिजिटल विभाजन: वर्ष 2025 में विश्वभर में 2 अरब से अधिक लोग इंटरनेट से वंचित थे।
  • इंटरनेट उपयोग में अंतर: निम्न-आय वाले देशों में केवल 23% लोग इंटरनेट का उपयोग करते थे, जबकि उच्च-आय वाले देशों में यह आँकड़ा 94% था।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना एवं तत्परता पहल: इस पहल के अंतर्गत ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) तक साझा आधार पर, उपयोग के अनुसार भुगतान की सुविधा को बढ़ावा दिया जाता है। GPU कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोगों को संचालित करने में सहायक होते हैं। यह महँगे, स्वतंत्र राष्ट्रीय डेटा केंद्रों के एक विकल्प के रूप में कार्य करता है।
  • महँगी अवसंरचना का विकल्प: GPU तक साझा पहुँच से महँगे, स्वतंत्र राष्ट्रीय डेटा केंद्रों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
  • ज्ञान भागीदार: कसावा टेक्नोलॉजीज और एनवीडिया इस पहल के प्रमुख ज्ञान भागीदारों में शामिल हैं।

पहली व्यापक डिजिटल रणनीति का महत्त्व

  • रोजगार सृजन: डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ व्यवसायों को ग्राहकों तक पहुँचने, वित्तीय सहायता प्राप्त करने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं, जिससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है।
  • डिजिटल विभाजन को कम करना: किफायती इंटरनेट, उपकरणों और डेटा की उपलब्धता से अपर्याप्त डिजिटल सुविधाओं वाले समुदायों की डिजिटल पहुँच में सुधार किया जा सकता है।
  • सार्वजनिक सेवाओं में सुधार: डिजिटल पहचान, भुगतान और सुरक्षित सूचना-साझाकरण प्रणालियाँ सेवाओं की आपूर्ति की लागत कम कर सकती हैं तथा सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच में सुधार कर सकती हैं।
  • विभिन्न क्षेत्रों की उत्पादकता में वृद्धि: डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना, ऊर्जा, कृषि-व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन तथा मूल्यवर्धित विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को सहायता प्रदान कर सकती हैं।
  • निजी निवेश को प्रोत्साहन: सार्वजनिक वित्तपोषण, नीतिगत परामर्श और गारंटी के माध्यम से अपर्याप्त डिजिटल सुविधाओं वाले बाजारों में निजी निवेश आकर्षित किया जा सकता है।
Shares: