FSSAI ने चाय में कीटनाशक अवशेषों की सीमाएँ प्रस्तावित की
संदर्भ: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय में एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड के अधिकतम अवशेष स्तर (MRLs) निर्धारित करने के प्रस्ताव के साथ संशोधनों का मसौदा प्रकाशित किया।
संशोधन की प्रमुख विशेषताएँ

- प्रस्तावित अधिकतम अवशेष स्तर (MRLs): खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संदूषक, विषाक्त पदार्थ एवं अवशेष) संशोधन विनियम, 2026 के मसौदे में चाय के लिए एसिटामिप्रिड की सीमा 20 मिलीग्राम/किलोग्राम (20 पीपीएम) और इमिडाक्लोप्रिड की सीमा 50 मिलीग्राम/किलोग्राम (50 पीपीएम) निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
- अंतर्राष्ट्रीय मानक: एसिटामिप्रिड की प्रस्तावित सीमा जापान में निर्धारित 30 पीपीएम और संयुक्त राज्य अमेरिका में निर्धारित 50 पीपीएम की संबंधित सीमाओं से कम है।
- नियामकीय समीक्षा: यह प्रस्ताव वैज्ञानिक साक्ष्यों और अंतर्राष्ट्रीय नियामकीय प्रथाओं के आधार पर कीटनाशक अवशेष मानकों की समय-समय पर समीक्षा करने की FSSAI की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है।
- खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संदूषक, विषाक्त पदार्थ एवं अवशेष) संशोधन विनियम, 2024 में भी कीटनाशक अवशेष मानकों में संशोधन किया गया था।
- कृषि संबंधी विचार: कीटनाशकों का उचित उपयोग और निर्धारित पद्धतियों के अनुसार उनका प्रयोग कीटों को नियंत्रित करने, फसल की हानि कम करने तथा कृषि उत्पादकता बनाए रखने में सहायक होता है।
- भारत में कीटनाशकों का औसत उपयोग 0.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से कम है, जबकि वैश्विक औसत उपयोग 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अनुमानित है।
भारत अंतर्राष्ट्रीय विधिक मापविज्ञान समिति की 61वीं बैठक की मेजबानी करेगा।
संदर्भ: भारत पहली बार 26–28 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में विधिक मापविज्ञान की अंतर्राष्ट्रीय समिति (CIML) की 61वीं बैठक की मेजबानी करेगा।
अन्य संबंधित जानकारी

- 26 अक्टूबर को “विधिक मापविज्ञान में विकास” (Evolutions in Legal Metrology) विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसके बाद 27 अक्टूबर 2026 को OIML रणनीति कार्यशाला आयोजित होगी।
- चर्चा में अंतर्राष्ट्रीय मापन मानक, अंतर्राष्ट्रीय अनुशंसाओं का संशोधन, OIML प्रमाणन प्रणाली (OIML-CS), डिजिटल परिवर्तन, क्षमता निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे विषय शामिल होंगे।
- यह बैठक भारत को अपने नियामक सुधारों को प्रदर्शित करने तथा निष्पक्ष व्यापार, उपभोक्ता संरक्षण और कारोबार करने में सुगमता को बढ़ावा देने का अवसर भी प्रदान करेगी।
अंतर्राष्ट्रीय विधिक मापविज्ञान संगठन (OIML) के बारे में

- स्थापना: 1955।
- प्रकृति: यह एक अंतर-सरकारी संगठन है, जो विधिक मापविज्ञान की प्रक्रियाओं में अंतर्राष्ट्रीय सामंजस्य को बढ़ावा देता है।
- प्रमुख कार्य:
- मापन उपकरणों के लिए अंतर्राष्ट्रीय अनुशंसाएँ, मानक और संबंधित दस्तावेज विकसित करना।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुगम बनाने और तकनीकी बाधाओं को कम करने के लिए मापन संबंधी आवश्यकताओं में सामंजस्य को बढ़ावा देना।
- व्यापार, उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में विश्वसनीय मापन सुनिश्चित करने में सहायता करना।
- OIML प्रमाणन प्रणाली (OIML-CS) जैसी प्रणालियों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तथा मापन उपकरणों की मान्यता को बढ़ावा देना।
भारत–ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्राहिंद 2026
संदर्भ: भारत–ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्राहिंद 2026 का पाँचवाँ संस्करण केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में शुरू हुआ।
अन्य संबंधित जानकारी

- यह सैन्य अभ्यास 19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारतीय सेना और ऑस्ट्रेलियाई सेना के लगभग 120-120 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं।
- पहली बार, न्यूज़ीलैंड का एक पर्यवेक्षक प्रतिनिधिमंडल इस अभ्यास में भाग ले रहा है।
- इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता, संयुक्त कार्यक्षमता और परिचालन समन्वय को बढ़ाना है। इसके साथ ही, यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करता है।
ऑस्ट्राहिंद 2026 के बारे में
- भाग लेने वाले सैन्य दल: भारतीय सेना के दल में गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों के साथ अन्य सैन्य शाखाओं और सेवाओं के कार्मिक शामिल हैं, जबकि ऑस्ट्रेलियाई सेना के दल में उसकी 13वीं ब्रिगेड के सैनिक शामिल हैं।
- विषय: “संयुक्त राष्ट्र अधिदेश के अध्याय VII के अंतर्गत द्वीपीय और तटीय क्षेत्रों में उप-पारंपरिक संयुक्त सैन्य अभियान।”
- प्रमुख प्रशिक्षण गतिविधियाँ:
- यथार्थपरक परिचालन परिस्थितियों में संयुक्त योजना निर्माण, सामरिक अभ्यास और युद्ध-केंद्रित प्रशिक्षण, जिसमें हवाई एवं समुद्री आयाम भी शामिल हैं।
- द्वीपीय और तटीय क्षेत्रों में समन्वित अभियान, निगरानी एवं टोह लेना तथा महत्त्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना।
- मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) संबंधी आकस्मिक परिस्थितियों से निपटना।
- व्यावसायिक अनुभवों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान।
- परिचालन संबंधी फोकस: द्वीपीय और तटीय भूभागों में अभियानों के लिए रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं की साझा समझ विकसित करना।
- पिछला संस्करण: इस अभ्यास का चौथा संस्करण 13 से 26 अक्टूबर 2025 तक ऑस्ट्रेलिया के पर्थ स्थित इरविन बैरक में आयोजित किया गया था।
