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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन।

संदर्भ: चंडीगढ़ में सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश में सौज झील को शामिल किए जाने के साथ भारत में रामसर स्थलों की संख्या 103 हो गई है। सुखना आर्द्रभूमि चंडीगढ़ का पहला रामसर स्थल बन गई है।

सुखना आर्द्रभूमि के बारे में

  • अवस्थिति: चंडीगढ़ के बाहरी क्षेत्र में, बाह्य हिमालय की तलहटी में स्थित है।
  • प्रकृति: यह एक उपनगरीय जलाशय है, जो अपने आसपास के जलग्रहण क्षेत्र से आने वाले तलछट और जल प्रवाह को नियंत्रित करने में सहायता करता है।
  • पारिस्थितिक महत्त्व:
    • खुले जल क्षेत्र, तटवर्ती वनस्पति, झाड़ियों और वनों सहित विविध आवासों को सहारा प्रदान करती है।
    • मध्य एशियाई उड़ान मार्ग (Central Asian Flyway) के अंतर्गत स्थानीय और प्रवासी जलपक्षियों के भोजन, प्रजनन, विश्राम और शीतकाल बिताने के लिए आवास प्रदान करती है।
    • सुभेद्य कॉमन पोचार्ड (Aythya ferina), संकटग्रस्त पालास फिश ईगल (Haliaeetus leucoryphus) तथा संकटग्रस्त ब्लैक पॉन्ड टर्टल (Geoclemys hamiltonii) को सहारा प्रदान करती है।
  • अन्य महत्त्व: चंडीगढ़ के निवासियों के लिए मनोरंजन और शैक्षिक संसाधन के रूप में कार्य करती है।
  • संरक्षण संबंधी चुनौतियाँ: तलछट का प्रवाह, गाद का जमाव और आक्रामक प्रजातियाँ। प्रबंधन उपायों में मृदा एवं नमी संरक्षण तथा आक्रामक पौधों को समय-समय पर हटाना शामिल है।

सौज झील के बारे में

  • अवस्थिति: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में, गंगा नदी के बाढ़ मैदान में स्थित है।
  • प्रकृति: यह कृषि भूमि से घिरी एक उथली झील है तथा आर्द्रभूमियों के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है।
  • पारिस्थितिक महत्त्व:
    • पारिस्थितिक संपर्क को बढ़ावा देती है तथा आर्द्रभूमि से संबंधित वनस्पतियों को सहारा प्रदान करती है, जिनमें पवित्र कमल (Nelumbo nucifera) और जंगली गन्ना (Saccharum spontaneum) शामिल हैं।
    • यहाँ नियमित रूप से 30,000 से अधिक जलपक्षी पाए जाते हैं तथा बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा इसे महत्त्वपूर्ण पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र (IBA) के रूप में नामित किया गया है।
    • सुभेद्य सारस क्रेन (Grus antigone) और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल (Clanga clanga) को आवास प्रदान करती है।
  • निकटता: यह मैनपुरी जिले में स्थित एक अन्य रामसर स्थल, समान पक्षी अभयारण्य के निकट है।
  • संरक्षण उपाय: प्रस्तावित उपायों में मौसमी मछली पकड़ने पर प्रतिबंध, महीन जाली वाले मछली पकड़ने के जालों पर प्रतिबंध तथा मवेशियों की पहुँच को नियंत्रित करना शामिल है।

रामसर अभिसमय के बारे में

  • रामसर अभिसमय एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसे 1971 में रामसर (ईरान) में स्थापित किया गया था।
  • इसका उद्देश्य जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आर्द्रभूमियों का संरक्षण एवं सतत उपयोग करना है।
  • यह अभिसमय आर्द्रभूमियों के “विवेकपूर्ण उपयोग” की अवधारणा को बढ़ावा देता है, जिसमें संरक्षण और सतत विकास के बीच संतुलन स्थापित किया जाता है।
  • अभिसमय के अनुसार, आर्द्रभूमियों को दलदल, पंकभूमि, पीटभूमि या जल के क्षेत्रों के रूप में परिभाषित किया गया है, चाहे वे प्राकृतिक हों या कृत्रिम, स्थायी हों या अस्थायी, तथा उनमें स्थिर या प्रवाहित जल हो, जो मीठा, खारा-मिश्रित या लवणीय हो। इसमें समुद्री जल के ऐसे क्षेत्र भी शामिल हैं, जहाँ निम्न ज्वार के समय जल की गहराई छह मीटर से अधिक नहीं होती।
  • विश्व आर्द्रभूमि दिवस 1997 से प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है।

भारत में रामसर स्थल

  • भारत ने 1 फरवरी, 1982 को आर्द्रभूमियों पर रामसर अभिसमय को अपनाया।
  • भारत में एशिया में सर्वाधिक (103) और विश्व में तीसरी सर्वाधिक संख्या में रामसर स्थल हैं। विश्व में भारत से आगे यूनाइटेड किंगडम (176) और मेक्सिको (144) हैं।
  • तमिलनाडु में भारत के सर्वाधिक रामसर स्थल हैं। यहाँ 20 नामित आर्द्रभूमियाँ हैं, जबकि उत्तर प्रदेश 14 स्थलों के साथ दूसरे स्थान पर है।
  • पश्चिम बंगाल में स्थित सुंदरबन आर्द्रभूमि 4,230 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत का सबसे बड़ा रामसर स्थल है, जबकि हिमाचल प्रदेश की रेणुका झील 0.2 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ सबसे छोटा रामसर स्थल है।
  • इन आर्द्रभूमियों को विभिन्न राष्ट्रीय कानूनों के अंतर्गत संरक्षण प्रदान किया जाता है। इनमें वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972; तथा आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 शामिल हैं।
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