संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और करार।

संदर्भ: क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पार होने वाले अपराधों से निपटने के लिए दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाने के साथ नई दिल्ली में बिम्सटेक के गृह मंत्रियों की पहली बैठक संपन्न हुई।

अन्य संबंधित जानकारी

  • गृह मंत्रियों की बैठक की व्यवस्था स्थापित करने का निर्णय 2018 में काठमांडू में आयोजित चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में लिया गया था।
  • अप्रैल 2025 में बैंकॉक में आयोजित छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए इस व्यवस्था का स्वागत किया गया।
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन बैठक में दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाया गया और पाँच क्षेत्रीय सुरक्षा पहलों को मंजूरी दी गई। इनमें मानव तस्करी, मादक पदार्थों पर नियंत्रण, धन शोधन एवं आतंकवाद के वित्तपोषण, अवैध वित्तीय प्रवाह तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित पहलें शामिल हैं।

दिल्ली घोषणा-पत्र के बारे में

  • यह घोषणा-पत्र क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के प्रति बिम्सटेक सदस्य देशों की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करता है। इसमें बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को एक साझा सुरक्षा क्षेत्र के रूप में मान्यता दी गई है, जो अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पार उत्पन्न होने वाले साझा खतरों का सामना कर रहा है।
  • प्रमुख प्रावधान
    • आतंकवाद का मुकाबला: आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद और सीमा पार आतंकवाद की निंदा करता है तथा कट्टरपंथ, आतंकवादी भर्ती और आतंकवाद के वित्तपोषण के विरुद्ध सहयोग का आह्वान करता है।
    • अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पार होने वाले अपराध: मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध, साइबर अपराध और मानव तस्करी के विरुद्ध सहयोग को मजबूत करता है। इसमें ऑनलाइन धोखाधड़ी संबंधी गतिविधियों में शोषित पीड़ितों की सुरक्षा भी शामिल है।
    • कानूनी सहयोग: पारस्परिक कानूनी सहायता, प्रत्यर्पण और संबंधित कानूनी ढाँचों में सहयोग के साथ-साथ मौजूदा बिम्सटेक सुरक्षा सम्मेलनों और कार्ययोजनाओं के कार्यान्वयन पर जोर देता है।
    • सूचना साझा करना और क्षमता निर्माण: अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पार होने वाले अपराधों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने, विशेष प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देता है।
    • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC), इंटरपोल और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) सहित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग को प्रोत्साहित करता है। साथ ही, सदस्य देशों द्वारा गृह मंत्रियों की बैठक नियमित रूप से आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त करता है।

बिम्सटेक (BIMSTEC) के बारे में

  • पूरा नाम: बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल।
  • स्थापना: 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा-पत्र के माध्यम से।
  • प्रारंभिक नाम: BIST-EC (बांग्लादेश–भारत–श्रीलंका–थाईलैंड आर्थिक सहयोग)।
  • विस्तार: म्यांमार 22 दिसंबर 1997 को इसमें शामिल हुआ।
    • नेपाल और भूटान 2004 में इसमें शामिल हुए।
    • इस समूह ने 31 जुलाई 2004 को बैंकॉक में आयोजित पहले बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में अपना वर्तमान नाम अपनाया।
  • सदस्य देश: बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड।
  • सचिवालय: तीसरे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णय के बाद 2014 में ढाका, बांग्लादेश में स्थापित किया गया।
  • उद्देश्य: दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच क्षेत्रीय एकीकरण एवं बहुआयामी सहयोग को बढ़ावा देना, विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी से लगे देशों के बीच।
  • क्षेत्रीय विकास: 1997 में प्रारंभ में इसमें छह क्षेत्र शामिल थे—व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और मत्स्य पालन। 2008 में सहयोग का विस्तार किया गया और 2021 में इसे पुनर्गठित करके सात क्षेत्रों में बाँटा गया।
  • पहला शिखर सम्मेलन: पहला बिम्सटेक शिखर सम्मेलन 31 जुलाई 2004 को बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित किया गया था।
  • आयोजित शिखर सम्मेलन: अब तक बिम्सटेक के छह शिखर सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। छठा शिखर सम्मेलन 4 अप्रैल 2025 को बैंकॉक में आयोजित किया गया था।
  • बढ़ता रणनीतिक महत्त्व: भारत की विदेश नीति में बिम्सटेक का महत्त्व बढ़ा है। यह पड़ोसी प्रथम और पूर्व की ओर देखो नीतियों को मजबूत करने तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ संबंधों को गहरा करने का एक मंच है।
    • भारत, विशेष रूप से भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण सार्क के भीतर मौजूद सीमाओं के बीच, क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए बिम्सटेक का तेजी से उपयोग कर रहा है। हालाँकि, बिम्सटेक SAARC का पूरक है, उसका विकल्प नहीं।
  • संस्थागत संरचना: बिम्सटेक की पाँच स्तरीय संस्थागत संरचना है:
  1. राष्ट्राध्यक्षों या शासनाध्यक्षों का शिखर सम्मेलन।
  2. विदेश मंत्रियों की मंत्रिस्तरीय बैठक।
  3. क्षेत्रीय मंत्रिस्तरीय बैठकें।
  4. वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक।
  5. बिम्सटेक स्थायी कार्य समिति (BPWC)।

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