संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा।
संदर्भ: भारतीय रेलवे ने गुजरात के साबरमती से भारत की पहली एलएनजी-डीजल दोहरे ईंधन वाली DEMU ट्रेन शुरू की, जिससे वैकल्पिक ईंधन संबंधी पहलों में एलएनजी-आधारित प्रणोदन को शामिल किया गया।
अन्य संबंधित जानकारी
- ट्रेन में दोहरे ईंधन की प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे एक ही इंजन एलएनजी और डीजल दोनों पर चल सकता है। एलएनजी को डीजल की खपत के लगभग 40% हिस्से का स्थान लेने के लिए तैयार किया गया है।
- 1,400 हॉर्सपावर क्षमता वाली दो ड्राइविंग पावर कारों (DPCs) को साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में परिवर्तित किया गया। परिवर्तित DPCs ने 2,000 किलोमीटर से अधिक का क्षेत्रीय परीक्षण पूरा कर लिया है।
- इस पहल का उद्देश्य डीजल की खपत, ईंधन लागत और उत्सर्जन को कम करना तथा मौजूदा रेलवे प्रणोदन प्रणाली में एक वैकल्पिक ईंधन के उपयोग का परीक्षण करना है।
भारत की पहली एलएनजी–डीजल DEMU ट्रेन के बारे में
- DEMU का पूर्ण रूप डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट है।
- पहली ट्रेन में 8 गैर-वातानुकूलित चेयर-कार कोच हैं और यह साबरमती तथा मेहसाणा जंक्शन के बीच संचालित हुई।
- प्रत्येक DPC में लगभग 2,200 लीटर क्षमता वाला एलएनजी टैंक है, जिसमें लगभग 950–1,000 किलोग्राम उपयोग योग्य एलएनजी भरी जा सकती है।
- परियोजना के अनुमानों के अनुसार, एक DPC में पूरी तरह भरा एलएनजी टैंक लगभग 444 किमी की यात्रा के लिए पर्याप्त हो सकता है।
- दोहरे ईंधन की व्यवस्था ट्रेन को एलएनजी और डीजल के बीच स्विच करने की सुविधा देती है, जिससे एलएनजी की उपलब्धता में उतार-चढ़ाव होने पर परिचालन में लचीलापन बना रहता है।
- परीक्षण के आँकड़ों के आधार पर, भारतीय रेलवे ने अनुमान लगाया है कि प्रति DPC लगभग ₹11.9 लाख तथा 8-कोच वाली पूरी ट्रेन के लिए लगभग ₹23.9 लाख की वार्षिक ईंधन बचत हो सकती है।
- एलएनजी के उपयोग से CO₂, NOx और पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, एलएनजी एक हाइड्रोकार्बन ईंधन होने के कारण इसके दहन से CO₂ का उत्सर्जन पूरी तरह समाप्त नहीं होता।
भारत वैकल्पिक ईंधनों की ओर क्यों बढ़ रहा है?
- शुद्ध-शून्य लक्ष्य: भारतीय रेलवे ने 2030 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जक बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- डीजल पर निर्भरता कम करना: विद्युतीकरण से डीजल आधारित कर्षण के उपयोग में पहले ही कमी आई है। दिसंबर 2025 तक ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.2% विद्युतीकरण हो चुका था।
- नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक उपयोग: भारतीय रेलवे अपनी शुद्ध-शून्य रणनीति के तहत सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से अपनी कर्षण विद्युत आवश्यकताओं को क्रमशः पूरा कर रहा है।
- स्वच्छ प्रणोदन प्रौद्योगिकियाँ: पारंपरिक डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए हाइड्रोजन और एलएनजी आधारित ट्रेनों की संभावनाओं का परीक्षण किया जा रहा है, विशेषकर वहाँ जहाँ वैकल्पिक प्रणोदन प्रौद्योगिकियाँ विद्युतीकृत नेटवर्क की पूरक हो सकती हैं।
- कम उत्सर्जन: डीजल की खपत के एक हिस्से को एलएनजी से प्रतिस्थापित करने पर CO₂, NOx और कणीय पदार्थों के उत्सर्जन में कमी आ सकती है, जबकि हाइड्रोजन ईंधन-सेल आधारित प्रणोदन में प्रत्यक्ष उप-उत्पाद के रूप में जलवाष्प उत्पन्न होती है।
- प्रौद्योगिकी में विविधता: एलएनजी-डीजल ट्रेन संक्रमणकालीन दोहरे ईंधन मॉडल प्रस्तुत करती है, जबकि हाइड्रोजन ट्रेन ईंधन-सेल आधारित प्रणोदन मॉडल को प्रदर्शित करती है। इससे भारतीय रेलवे को स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में विभिन्न विकल्पों का परीक्षण करने में सहायता मिलती है।
हाइड्रोजन ट्रेन और एलएनजी–डीजल ट्रेन में अंतर

