संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; अर्थव्यवस्था पर उदारीकरण के प्रभाव।

संदर्भ: नीति आयोग ने “भारत का सेवा क्षेत्र: पेशेवर सेवाओं में नियामक व्यवस्था संबंधी अंतर्दृष्टि” शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है। इसमें पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में नियामक बाधाओं का अध्ययन किया गया है तथा घरेलू प्रतिस्पर्धात्मकता, वैश्विक स्तर पर पेशेवरों की गतिशीलता और सेवा निर्यात को मजबूत करने के लिए सुधारों का सुझाव दिया गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • सेवा-आधारित विकास: वित्त वर्ष 2023-24 में सेवाओं का भारत के सकल घरेलू उत्पाद/सकल मूल्य वर्धित में लगभग 55% योगदान रहा और कुल रोजगार में इसकी हिस्सेदारी लगभग 30% रही। 2011-12 से 2023-24 के दौरान सेवा क्षेत्र में लगभग 7% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ोतरी हुई।
  • मजबूत वैश्विक स्थिति: भारत 2024 में विश्व का 7वाँ सबसे बड़ा सेवा निर्यातक बन गया। वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 4.3% हो गई, जो 2005 में लगभग 2% थी।
  • पेशेवर सेवाओं का विस्तार: 2023 में पेशेवर सेवाओं की भारत के सेवा निर्यात में 19.7% हिस्सेदारी रही। वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इनमें 18% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई, जो भारत के सेवा व्यापार में इनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
  • तुलनात्मक लाभ में वृद्धि: पेशेवर और प्रबंधन परामर्श सेवाओं में भारत का प्रकट तुलनात्मक लाभ (RCA) 2005 में 0.95 से बढ़कर 2024 में 3.0 हो गया। यह वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है।
  • इंजीनियरिंग सेवाएँ: इंजीनियरिंग सेवाओं का निर्यात वित्त वर्ष 2014-15 में 1.77 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 13.77 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो 22.8% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है।

प्रमुख नियामक चुनौतियाँ

  • कानूनी सेवाएँ: अधिवक्ताओं के अलावा अन्य कानूनी पेशेवरों को सीमित मान्यता, विज्ञापन तथा व्यवसाय स्थापित करने के विभिन्न स्वरूपों पर प्रतिबंध और पेशेवर गतिशीलता तथा पारस्परिक मान्यता के सीमित तंत्र वैश्विक एकीकरण में बाधा डालते हैं।
  • लेखांकन एवं बहीखाता: पारस्परिक मान्यता व्यवस्था का सीमित होना, विदेशी पेशेवरों के अभ्यास पर प्रतिबंध तथा बहीखाताकारों के लिए एकरूप योग्यता और नैतिक मानकों का अभाव नियामक कमियाँ उत्पन्न करता है।
  • वास्तुकला एवं इंजीनियरिंग: वास्तुकारों के लिए व्यवसाय स्थापित करने के अनुमत स्वरूपों पर प्रतिबंध तथा विदेशी योग्यताओं को मान्यता देने के सीमित तंत्र मौजूद हैं। वहीं, भारत में इंजीनियरिंग को एक पेशे के रूप में विनियमित करने वाला व्यापक वैधानिक ढाँचा नहीं है।
  • स्वास्थ्य सेवा एवं संबद्ध स्वास्थ्य सेवा: बहु-स्तरीय नियमन, अंतर-राज्यीय लाइसेंस की सीमित पोर्टेबिलिटी तथा राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग अधिनियम, 2021 के अपूर्ण क्रियान्वयन के कारण पेशेवर गतिशीलता और एकरूप नियमन में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं। 2025 तक केवल 26 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने राज्य संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा परिषदों का गठन किया था।
  • उच्च नियामक प्रतिबंधात्मकता: OECD का सेवा व्यापार प्रतिबंधात्मकता सूचकांक वास्तुकला, कानूनी और लेखांकन सेवाओं में भारत को अधिक प्रतिबंधात्मक अर्थव्यवस्थाओं में रखता है। यह नियामक सुधार की व्यापक संभावनाओं को दर्शाता है।

भारत के सेवा क्षेत्र के लिए महत्व

  • निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा: अधिक पूर्वानुमेय नियामक वातावरण नियामकीय बाधाओं को कम कर सकता है और भारतीय पेशेवर सेवा कंपनियों की वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को मजबूत कर सकता है।
  • पेशेवर गतिशीलता को सुगम बनाना: योग्यताओं की बेहतर मान्यता और लाइसेंस की अधिक पोर्टेबिलिटी से भारतीय पेशेवरों के लिए राज्यों तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अवसरों का विस्तार हो सकता है।
  • उच्च-मूल्य वाली सेवाओं को बढ़ावा: नियामक सुधार भारत को मुख्य रूप से लागत-प्रतिस्पर्धी सेवा मॉडल से ज्ञान-प्रधान और उच्च-मूल्य वाली गतिविधियोंकी ओर बढ़ने में सहायता कर सकते हैं। इससे वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
  • व्यापार वार्ताओं में सहायता: घरेलू नियामक कमियों की पहचान से भारत की द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सेवा-व्यापार वार्ताओं को समर्थन मिल सकता है तथा पारस्परिक बाजार पहुँच से संबंधित चर्चाओं को दिशा मिल सकती है।
  • सेवा-आधारित विकास को बढ़ावा देना: सेवाओं का पहले से ही भारत के सकल घरेलू उत्पाद/सकल मूल्य वर्धित में लगभग 55% योगदान है। पेशेवर सेवाओं के लिए नियामक पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार भारत के सेवा-आधारित विकास को और बढ़ावा दे सकता है तथा विकसित भारत@2047 के व्यापक लक्ष्य को समर्थन दे सकता है।
Shares: