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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: नीति आयोग ने “भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रमुख क्षेत्र – खंड 1” शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है, जिसमें 12 प्राथमिकता वाले विनिर्माण क्षेत्रों की पहचान की गई है। इन क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता, स्थानीय मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में गहन एकीकरण की अपार संभावनाएँ हैं।
रिपोर्ट के बारे में
- यह रिपोर्ट नीति आयोग ने क्रिसिल इंटेलिजेंस के सहयोग से तैयार की है। इसमें वैश्विक रुझानों, क्षेत्रवार विकास के अवसरों और वैश्विक मानकों के संदर्भ में भारत के विनिर्माण परिदृश्य का आकलन किया गया है।
- 12 प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं—ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इस्पात, पूंजीगत वस्तुएँ, रक्षा एवं ड्रोन, रसायन, सौर फोटोवोल्टिक, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स एवं चिकित्सा उपकरण, दूरसंचार उपकरण, चमड़ा एवं फुटवियर तथा खाद्य प्रसंस्करण।
- रिपोर्ट तीन खंडों में जारी की जाएगी, जिसमें खंड I में चार क्षेत्रों—रसायन, वस्त्र, सौर PV विनिर्माण तथा दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उत्पादों को शामिल किया गया है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- विनिर्माण की स्थिति: भारत के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 17.5% है, जो लगभग दो दशकों से 16–18% के बीच मोटे तौर पर स्थिर है।
- वैश्विक विनिर्माण मूल्य में भारत की हिस्सेदारी 1995 में लगभग 1.5% से बढ़कर 2023 में 3.2% हो गई, जबकि चीन की हिस्सेदारी लगभग 5% से बढ़कर करीब 32% हो गई।
- चार-चरणीय आकलन: अध्ययन में सापेक्ष आकर्षण के आधार पर क्षेत्रों को शॉर्टलिस्ट करना, बाजार क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता का व्यापक आकलन, अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर बेंचमार्किंग तथा क्षेत्र-विशिष्ट कार्रवाई योग्य सिफारिशें विकसित करना शामिल था।
- वैश्विक अवसर: वैश्विक कंपनियाँ अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता ला रही हैं, जिससे भारत के पास विनिर्माण को आकर्षित करने, उत्पादन क्षमता विकसित करने और वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का अवसर है।
- रसायन: घरेलू रासायनिक पदार्थों की खपत वित्त वर्ष 2030 तक 290–310 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। भारत को उत्पादन वृद्धि में तेजी लाने, डाउनस्ट्रीम उत्पादन को मजबूत करने, फीडस्टॉक के बेहतर उपयोग और आयात पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता है।
- वस्त्र: भारत छठा सबसे बड़ा वस्त्र एवं परिधान निर्यातक है और वैश्विक निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 4.1% है। यह क्षेत्र 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है तथा जीडीपी में लगभग 2%, विनिर्माण GVA में 11% और वस्तु निर्यात में 9% का योगदान देता है।
- दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उपकरण: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है, जिसमें 1.2 अरब से अधिक ग्राहक हैं।
- 80% से अधिक महत्वपूर्ण घटक चीन से प्राप्त किए जाते हैं।
- राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 2025 का लक्ष्य 2030 तक क्षेत्र के जीडीपी योगदान और निर्यात को दोगुना करना, 10 लाख रोजगार सृजित करना तथा निवेश और अनुसंधान एवं विकास व्यय में वृद्धि करना है।
- सौर फोटोवोल्टिक: मार्च 2025 तक भारत में 106 GW की स्थापित सौर क्षमता थी और 2030 के 280 GW के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगभग 174 GW अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता है।
- अगस्त 2025 तक मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 100 GW और सेल विनिर्माण क्षमता 25 GW तक पहुँच गई।
- सामान्य बाधाएँ: प्रमुख चुनौतियों में आयात पर निर्भरता, खंडित आपूर्ति श्रृंखलाएँ, बुनियादी ढाँचे एवं लॉजिस्टिक्स की कमियाँ, सीमित घरेलू मूल्य संवर्धन, तकनीकी बाधाएँ और कौशल की कमी शामिल हैं।
रिपोर्ट की सिफारिशें
- घरेलू मूल्य संवर्धन को मजबूत करना: असेंबली-आधारित विनिर्माण से आगे बढ़ते हुए रसायन, सौर PV और दूरसंचार घटकों में घरेलू मूल्य संवर्धन का विस्तार करना।
- प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास तथा पैमाने को बढ़ावा देना: उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी साझेदारी, अनुसंधान एवं विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देना।
- विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना: बेहतर बुनियादी ढाँचे, लॉजिस्टिक्स, परीक्षण सुविधाओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं और उद्योग-आधारित कौशल के साथ एकीकृत औद्योगिक एवं स्वच्छ-प्रौद्योगिकी क्लस्टर विकसित करना।
- वैश्विक बाजार तक पहुँच का विस्तार: निर्यात और वैश्विक बाजार तक पहुँच को मजबूत करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों, व्यापार साझेदारियों और आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण का लाभ उठाना।
- विभेदित नीतिगत उपाय अपनाना: लक्षित नीतिगत समर्थन और मजबूत सरकार–उद्योग सहयोग के माध्यम से क्षेत्र-विशिष्ट बाधाओं का समाधान करना।
