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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: लोकसभा द्वारा पारित कराधान और अन्य विधियाँ (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 तथा वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करना है, ताकि निवेश, विनिर्माण और कर निश्चितता को बढ़ावा दिया जा सके।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

  • सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेशकों के लिए छूट: विधेयक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (BIS) को भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों से प्राप्त ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर से छूट प्रदान करता है। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से सृजित आय पर लागू होगा।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए कर प्रोत्साहन: निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के भारतीय अनुबंध विनिर्माताओं को पूंजीगत वस्तुओं, उपकरणों या टूलिंग की आपूर्ति करने वाली विदेशी कंपनियों को दी जाने वाली कर छूट की अवधि 2030–31 से बढ़ाकर 2040–41 कर दी गई है।
    • इसके अतिरिक्त, पात्र विदेशी कंपनियों द्वारा सीमा शुल्क-बॉन्डेड गोदामों में इलेक्ट्रॉनिक घटकों के भंडारण को भी कर छूट प्रदान की गई है, बशर्ते इन घटकों की आपूर्ति भारतीय अनुबंध विनिर्माताओं को की जाए।
    • इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और सर्वर जैसे उत्पाद शामिल हैं।
  • हीरा उद्योग के लिए कर प्रोत्साहन: विधेयक पात्र विदेशी हीरा खनन कंपनियों, साइटहोल्डर्स, ब्रोकरों, एग्रीगेटर्स तथा निविदा या नीलामी संस्थाओं द्वारा अधिसूचित विशेष क्षेत्रों के माध्यम से कच्चे हीरों की बिक्री से होने वाली आय पर 31 मार्च 2041 तक कर छूट प्रदान करता है।
  • REITs और InvITs के लिए कर का युक्तिकरण: विधेयक REIT और InvIT के यूनिटधारकों द्वारा प्राप्त पात्र लाभांश आय पर कर छूट को बहाल करता है। यह छूट इस बात से स्वतंत्र होगी कि संबंधित विशेष प्रयोजन इकाई (SPV) ने रियायती कॉर्पोरेट कर व्यवस्था को अपनाया है या नहीं।
    • साथ ही, ऐसी SPV पर अधिभार 10% से बढ़ाकर 25% किया गया है।
  • ऑफशोर निवेश निधियों के नियमों का सरलीकरण: भारत से प्रबंधित, लेकिन भारत के बाहर पंजीकृत पात्र निवेश फंडों के लिए कई शर्तों को समाप्त किया गया है। इनमें निम्नलिखित आवश्यकताएँ शामिल हैं:
    • 25 सदस्यों की अनिवार्यता
    • 10% निवेशक भागीदारी की शर्त
    • ₹100 करोड़ के न्यूनतम मासिक औसत कोष की आवश्यकता
    • किसी एक इकाई में 25% निवेश की सीमा
  • शून्य-MDR व्यवस्था में लचीलापन: विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करके केंद्र सरकार को ऐसे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेन-देन को अधिसूचित करने का अधिकार देता है, जिन पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसमें निर्दिष्ट यूपीआई और रूपे (RuPay) लेन-देन भी शामिल हो सकते हैं।
    • विधेयक स्वयं यूपीआई शुल्क लागू नहीं करता।
    • भविष्य में कोई MDR लागू किया जाता है तो वह सरकारी अधिसूचना के अधीन होगा और लेन-देन की सीमा के आधार पर भी निर्धारित किया जा सकता है।
  • डेटा सेंटर के लिए कर निश्चितता: विधेयक भारतीय डेटा सेंटरों से प्राप्त सेवाओं से संबंधित कर छूट के लिए कुछ अधिसूचना संबंधी आवश्यकताओं को समाप्त करता है।
    • इसके साथ ही, कर छूट का विस्तार भारतीय कंपनियों द्वारा लीज पर लिए गए और संचालित डेटा सेंटरों तक किया गया है।
    • इससे भारतीय डेटा-सेंटर अवसंरचना का उपयोग करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों को अधिक लचीलापन मिलेगा।

आवश्यकता और महत्व

  • विदेशी निवेश आकर्षित करना: सरकारी प्रतिभूतियों पर विदेशी संस्थागत निवेशक और BIS को कर छूट देने से भारतीय सरकारी प्रतिभूतियाँ विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन सकती हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना: दीर्घकालिक कर प्रोत्साहन वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित कर सकते हैं, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मजबूत कर सकते हैं तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत के एकीकरण को बढ़ा सकते हैं।
  • कर निश्चितता प्रदान करना: REIT और InvIT से संबंधित संशोधन लाभांश कर की विसंगति को दूर करता है और संबंधित SPV की कर व्यवस्था से स्वतंत्र होकर पात्र निवेशकों के लिए एकसमान कर उपचार सुनिश्चित करता है।
  • निधि प्रबंधन को बढ़ावा देना: ऑफशोर निवेश फंडों के लिए नियमों को सरल बनाने से वैश्विक फंड-प्रबंधन गतिविधियों को भारत से संचालित करने को प्रोत्साहन मिल सकता है।
  • डिजिटल भुगतान को समर्थन: शून्य-MDR व्यवस्था में अधिक लचीलापन भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की दीर्घकालिक स्थिरता, वहनीयता और विस्तार सुनिश्चित करने में सहायक हो सकता है।
  • उभरते क्षेत्रों को समर्थन: हीरा व्यापार के लिए कर प्रोत्साहन तथा डेटा सेंटरों के लिए सरल नियम उभरते क्षेत्रों को मजबूत, निवेश आकर्षित और व्यवसाय करने में सुगमता को बेहतर कर सकते हैं।
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