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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र है, लेकिन अधिकांश स्टार्ट-अप शहरी क्षेत्रों में केंद्रित हैं। इस स्थिति को देखते हुए ग्रामीण उद्यमिता तथा सतत गैर-कृषि आजीविका को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (SVEP) शुरू किया गया।
स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (SVEP) के बारे में
- शुरुआत: वर्ष 2016 (मई 2015 में DAY-NRLM की उप-योजना के रूप में स्वीकृत; कार्यान्वयन 2016–17 में प्रारंभ हुआ।)
- नोडल मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय।
- मूल योजना: दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)।
- उद्देश्य: ग्रामीण गरीबों को छोटे गैर-कृषि उद्यम स्थापित करने एवं उन्हें सतत रूप से संचालित करने में सहायता प्रदान करना, जिससे गरीबी कम हो, रोजगार के अवसर सृजित हों तथा स्वरोजगार को बढ़ावा मिले।
- लक्षित लाभार्थी: स्वयं सहायता समूह (SHGs) एवं उनके परिवार के सदस्य, जिनमें महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अल्पसंख्यकों, दिव्यांग व्यक्तियों, ग्रामीण कारीगरों तथा अन्य कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी जाती है।
- विजन: ग्रामीण उद्यमों के लिए ज्ञान, परामर्श एवं वित्त की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर ग्राम स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देना।
प्रमुख विशेषताएँ
- वित्तीय सहायता, व्यवसाय प्रबंधन प्रशिक्षण, सॉफ्ट स्किल्स विकास तथा व्यवसाय विकास सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।
- बैंक ऋण, सामुदायिक उद्यम निधि (CEF) तथा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी योजनाओं के साथ समन्वय के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
- सामुदायिक भागीदारी पर आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाता है, जिसमें सामुदायिक संस्थाएँ उद्यमियों की पहचान करती हैं, उद्यम की व्यवहार्यता का आकलन करती हैं तथा व्यवसाय के प्रदर्शन की निगरानी करती हैं।
- विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार क्षेत्र में नए उद्यमों की स्थापना के साथ-साथ पहले से संचालित उद्यमों को भी सहायता प्रदान की जाती है।
- व्यवसाय योजना, ऋण मूल्यांकन, उद्यम की प्रगति पर निगरानी तथा कार्यक्रम की निगरानी के लिए केंद्रीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) के माध्यम से डिजिटल उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
कार्यान्वयन तंत्र
- इसका कार्यान्वयन राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (SRLMs) के माध्यम से किया जाता है।
- ब्लॉक संसाधन केंद्र–उद्यम संवर्धन (BRC-EPs) ब्लॉक स्तर पर नोडल संस्थान के रूप में कार्य करते हैं।
- सामुदायिक संसाधन व्यक्ति–उद्यम संवर्धन (CRP-EPs) उद्यमियों को मार्गदर्शन, व्यवसाय योजना, ऋण सुविधा तथा बाजार से जुड़ाव में सहायता प्रदान करते हैं।
- स्वयं सहायता समूह (SHGs), ग्राम संगठन (VOs), क्लस्टर स्तरीय महासंघ (CLFs) तथा अन्य सामुदायिक संस्थाएँ उद्यमियों की पहचान करती हैं, सामुदायिक उद्यम निधि (CEF) से ऋण का प्रबंधन करती हैं तथा उद्यमों की प्रगति की निगरानी करती हैं।
- प्रत्येक ब्लॉक को ₹6.50 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जबकि प्रति उद्यम औसत निवेश ₹27,083 है।
- कम-से-कम 90% CRP-EPs का चयन स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़े परिवारों से किया जाता है, जबकि इस समूह में महिलाओं की न्यूनतम भागीदारी 60% निर्धारित की गई है।
- प्रत्येक प्रशिक्षित CRP-EP अधिकतम 50 उद्यमों का मार्गदर्शन करता है।
- कार्यक्रम के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि कम-से-कम 60% लाभार्थी महिलाएँ हों, साथ ही अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अल्पसंख्यक समुदायों तथा दिव्यांग व्यक्तियों का भी समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
SVEP की प्रमुख उपलब्धियाँ

- ग्रामीण उद्यमों का विस्तार: SVEP ने 30 जून 2026 तक32 लाख से अधिक ग्रामीण उद्यमों को सहायता प्रदान की है। यह DAY-NRLM के अंतर्गत 10.29 करोड़ ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जोड़ने के प्रयासों को आगे बढ़ाता है।
- समावेशी विकास: लगभग 86% उद्यमी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) एवं अल्पसंख्यक समुदायों से हैं, जबकि लगभग 75% उद्यमों का स्वामित्व या प्रबंधन महिलाओं के पास है।
- ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना: SVEP प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को बढ़ावा देता है, विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार क्षेत्र के उद्यमों को समर्थन प्रदान करता है तथा गैर-कृषि आजीविका को प्रोत्साहित कर ग्रामीण आय के स्रोतों में विविधता लाता है।
- सामुदायिक संस्थाओं पर आधारित मॉडल: यह कार्यक्रम स्वयं सहायता समूह (SHGs), सामुदायिक संसाधन व्यक्ति–उद्यम संवर्धन (CRP-EPs) तथा ब्लॉक संसाधन केंद्र–उद्यम संवर्धन (BRC-EPs) के माध्यम से ग्रामीण उद्यमिता के सामुदायिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करता है। ये संस्थाएँ उद्यमियों की पहचान, वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन तथा निरंतर सहयोग प्रदान करती हैं।
- सकारात्मक परिणाम (QCI मध्यावधि मूल्यांकन): भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के मध्यावधि मूल्यांकन के अनुसार—
- 99% SVEP उद्यम लाभदायक पाए गए।
- इन उद्यमों का घरेलू आय में औसतन 57% योगदान रहा।
- प्रत्येक उद्यम की औसत मासिक आय ₹39,000 रही, जबकि विनिर्माण क्षेत्र के उद्यमों की औसत मासिक आय ₹47,800 दर्ज की गई।
- 96% उद्यमियों ने अपनी बचत में वृद्धि होने की सूचना दी।
स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (SVEP) से संबंधित चुनौतियाँ
- शहरी-केंद्रित स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र: यद्यपि भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र है, फिर भी अधिकांश स्टार्ट-अप शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित हैं, जिससे ग्रामीण भारत में उद्यमिता के अवसर सीमित रह जाते हैं।
- रोज़गार अंतराल: प्रत्येक वर्ष लगभग2 करोड़ लोग कार्यबल में शामिल होते हैं, जबकि 10 लाख से भी कम लोगों को सार्थक औपचारिक रोजगार मिल पाता है। यह ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता को दर्शाता है।
- सीमित उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र: ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी नवाचार का सीमित वातावरण, उद्यमिता सहायता का अभाव, अपर्याप्त इनक्यूबेशन एवं परामर्श सेवाएँ तथा सेवा वितरण की कमजोर व्यवस्था जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
- पूंजी एवं संस्थागत सहायता का अभाव: ग्रामीण उद्यमों के लिए पूंजी तथा संस्थागत सहयोग की निरंतर कमी बनी हुई है, जिसके कारण वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन तथा उद्यम समर्थन की आवश्यकता बनी रहती है।
- अधिक सुदृढ़ उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता: ग्रामीण उद्यमों की दीर्घकालिक स्थिरता एवं विकास के लिए ज्ञान, परामर्श एवं वित्तीय तंत्र को मजबूत करना, साथ ही ऋण सुविधा एवं बाजार तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
