संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उनकी चुनौतियाँ।
संदर्भ: केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की वित्तीय स्वायत्तता एवं डिजिटल सुशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ (SAMARTH) पंचायत पोर्टल तथा मॉडल स्वयं के राजस्व स्रोत (Own Source Revenue-OSR) नियम जारी किए।
अन्य संबंधित जानकारी
• ये पहल सोलहवें वित्त आयोग की उन सिफारिशों के अनुरूप हैं, जिनमें पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के स्वस्रोत राजस्व (Own Source Revenue-OSR) को सुदृढ़ कर उनकी वित्तीय स्थिरता एवं आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर बल दिया गया है।
• पंचायती राज मंत्रालय को ‘विकसित भारत के लिए डेटा-संचालित सुशासन’ विषय पर पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2026 के अंतर्गत स्वर्ण पुरस्कार किया गया।
• इसके अतिरिक्त, 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में पंचायती राज मंत्रालय की चार पहलों को तीन स्वर्ण पुरस्कार तथा एक रजत पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के बारे में
• यह पंचायती राज मंत्रालय की एक पहल है, जिसे राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के अंतर्गत लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पंचायतों को अनुदान-निर्भर संस्थाओं से वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर स्थानीय सरकारों में परिवर्तित करना है।
• यह कार्यक्रम ग्राम पंचायतों एवं खंड (ब्लॉक) पंचायतों को स्थानीय परिसंपत्तियों और अवसरों की पहचान कर उन्हें बैंक योग्य एवं राजस्व-सृजन करने वाली परियोजनाओं में परिवर्तित करने में सक्षम बनाता है। इसके लिए पंचायती राज मंत्रालय द्वारा समर्पित तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।
• परियोजनाओं के वित्तपोषण की व्यवस्था सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण तथा बैंक वित्त के माध्यम से की जाती है। इस प्रक्रिया में नाबार्ड (NABARD) एवं हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO) संस्थागत भागीदार के रूप में कार्य करते हैं।
• पंचायतें ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से अपनी परियोजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत करती हैं, जिसमें ग्राम सभा की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
• परियोजना प्रस्तावों की जाँच राज्यों द्वारा की जाती है, इसके बाद राष्ट्रीय स्तर की चैलेंज प्रक्रिया के माध्यम से उनका चयन किया जाता है। चयनित परियोजनाओं को मंत्रालय द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाता है तथा उनकी निगरानी डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से की जाती है।
• इस कार्यक्रम के अंतर्गत चार वर्षों में 350 परियोजनाएँ विकसित की जाएँगी—प्रथम वर्ष में 50 परियोजनाएँ तथा अगले तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष 100 परियोजनाएँ।
पात्रता: ऐसी ग्राम पंचायत, जिनके स्वयं के राजस्व स्रोत (OSR) कम-से-कम ₹50 लाख हो, तथा खंड पंचायत, जिनका OSR कम-से-कम ₹1 करोड़ हो और जिनका शेष कार्यकाल न्यूनतम तीन वर्ष हो, इस योजना के लिए पात्र होंगे। विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए पात्रता मानदंडों में छूट प्रदान की गई है।
• अब तक 10 राज्यों में पंचायत प्रतिनिधियों के लिए इस कार्यक्रम से संबंधित जागरूकता एवं परिचयात्मक कार्यशालाओं का आयोजन किया जा चुका है।
समर्थ (SAMARTH) पंचायत पोर्टल के बारे में
• समर्थ (SAMARTH) पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित एक एकीकृत एवं विन्यासयोग्य राष्ट्रीय डिजिटल मंच है, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी-सक्षम स्वयं के राजस्व स्रोत (Own Source Revenue-OSR) प्रबंधन के माध्यम से ग्राम पंचायतों की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करना है।
• यह पोर्टल ग्राम पंचायतों को स्वयं के राजस्व स्रोत (OSR) के संपूर्ण जीवनचक्र का डिजिटल प्रबंधन करने में सक्षम बनाता है। इसमें करदाता पंजीकरण, कर मांग का सृजन, ऑनलाइन भुगतान, राजस्व संग्रहण तथा वास्तविक समय में निगरानी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
• यह पोर्टल संपत्ति कर, व्यवसाय कर, स्वच्छता कर, बाजार कर, मनोरंजन कर, उपयोगकर्ता शुल्क, विभिन्न शुल्क तथा अन्य गैर-कर राजस्व के संग्रहण हेतु एकीकृत ऑनलाइन भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराता है।
• इसकी प्रमुख विशेषताओं में एकीकृत एवं विन्यासयोग्य मंच, डिजिटल राजस्व योजना एवं प्रबंधन, ऑनलाइन मांग नोटिस, भुगतान के अनेक विकल्प, मोबाइल-अनुकूल इंटरफेस, डैशबोर्ड एवं विश्लेषण, पारदर्शी अभिलेख प्रबंधन तथा नागरिक-केंद्रित सेवाएँ शामिल हैं।
वर्तमान प्रगति
• छत्तीसगढ़ एवं हिमाचल प्रदेश को इस पोर्टल से जोड़ा जा चुका है।
• 51 लाख से अधिक करदाताओं का पंजीकरण किया जा चुका है।
• ₹95 करोड़ के मांग नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
• ₹27 करोड़ से अधिक राजस्व का संग्रह किया जा चुका है।
• महाराष्ट्र, मिजोरम, असम, हरियाणा, पश्चिम बंगाल तथा उत्तर प्रदेश में इस पोर्टल से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
पंचायती राज संस्थाओं के लिए आदर्श स्वयं के राजस्व स्रोत (Model OSR) नियमों के बारे में
• इन्हें पंचायती राज मंत्रालय द्वारा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक मार्गदर्शी फ्रेमवर्क के रूप में तैयार किया गया है, ताकि पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की वित्तीय स्वतंत्रता को सुदृढ़ किया जा सके।
• सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर तैयार किए गए इन नियमों का उद्देश्य पंचायतों के राजस्व के आकलन, संग्रहण तथा प्रबंधन के लिए पारदर्शी, एकसमान एवं प्रभावी प्रणाली स्थापित करना है।
• इन नियमों में संपत्ति कर, उपयोगकर्ता शुल्क, विभिन्न शुल्क तथा अन्य गैर-कर राजस्व को शामिल किया गया है।
• ये नियम परामर्शात्मक प्रकृति के हैं। राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश अपने मौजूदा कानूनी ढाँचे तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार इन्हें अपना सकते हैं अथवा आवश्यकतानुसार संशोधित कर लागू कर सकते हैं।
• इनका उद्देश्य राजस्व संग्रहण में वृद्धि, स्थानीय शासन को सुदृढ़ करना तथा वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर पंचायतों के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं के बेहतर वितरण को सुनिश्चित करना है।
महत्त्व
• पंचायतों के स्वयं के राजस्व स्रोत को सुदृढ़ कर उनकी वित्तीय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के अनुदानों पर निर्भरता को कम करता है।
• स्थानीय परिसंपत्तियों एवं अवसरों को स्थायी राजस्व-सृजन करने वाली परियोजनाओं में परिवर्तित कर समुदाय-आधारित स्थानीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करता है।
• प्रौद्योगिकी-सक्षम राजस्व प्रबंधन, ऑनलाइन भुगतान तथा रियल टाइम निगरानी के माध्यम से डिजिटल सुशासन को बेहतर बनाता है।
• डिजिटल अभिलेखों, डेटा विश्लेषण तथा सरल करदाता सेवाओं के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही एवं नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देता है।
• पंचायतों की बेहतर सार्वजनिक सेवाएँ प्रदान करने की क्षमता को बढ़ाता है तथा वित्तीय रूप से सशक्त एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम स्थानीय सरकारों के माध्यम से विकसित भारत @2047 के लक्ष्य का समर्थन करता है।
