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सामान्य अध्ययन-1: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य एवं वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे|

सामान्य अध्ययन -2: भारतीय संविधान—संशोधन और महत्वपूर्ण प्रावधान| 

संदर्भ: सरकार ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन हेतु राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को राज्यसभा में प्रस्तुत किया है।

अन्य संबंधित जानकारी

• इस विधेयक का उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को वैधानिक संरक्षण प्रदान करना है तथा इसे राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी दर्जा देते हुए राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के दायरे में लाना है।

• यह विधेयक वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में सरकार द्वारा वर्षभर आयोजित स्मरण कार्यक्रमों के पश्चात लाया गया है, जिसमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इसकी ऐतिहासिक भूमिका को सम्मानित किया गया।

वंदे मातरम् के बारे में

• उत्पत्ति: वंदे मातरम् की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में की थी।  यह पहली बार 1875 में ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ तथा बाद में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में सम्मिलित किया गया।

• स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका: 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने पहली बार वंदे मातरम् का गायन किया। 1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान यह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध राष्ट्रवाद का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।

• राष्ट्रीय गीत: 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने निर्णय लिया कि अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल प्रथम दो पदों का ही उपयोग किया जाएगा, क्योंकि इसके बाद के पदों में देवी-स्तुति से संबंधित संदर्भ थे, जिन्हें कुछ समुदायों ने समावेशी नहीं माना।

• राष्ट्रीय गीत का दर्जा: 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत तथा ‘जन गण मन’ को राष्ट्रीय गान के रूप में स्वीकार किया तथा दोनों को समान सम्मान प्रदान किया।

• संवैधानिक स्थिति: राष्ट्रीय गान के विपरीत, वंदे मातरम् को राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के अंतर्गत स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। वर्तमान संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य इसी विधिक कमी को दूर करना है।

राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के बारे में

• इस अधिनियम को भारत के प्रमुख राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा एवं सम्मान की रक्षा के उद्देश्य से बनाया गया था। यह निम्नलिखित राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपमानजनक कृत्यों को प्रतिबंधित करता है—

  • राष्ट्रीय ध्वज 
  • भारत का संविधान 
  • राष्ट्रीय गान 

• वर्तमान में इस अधिनियम में निम्नलिखित प्रमुख प्रावधान हैं—

  • धारा 2: राष्ट्रीय ध्वज तथा भारत के संविधान के अपमान को दंडनीय अपराध बनाती है। 
  • धारा 3: राष्ट्रीय गान के गायन में जानबूझकर बाधा डालने अथवा उसके गायन में संलग्न सभा में व्यवधान उत्पन्न करने को दंडनीय अपराध घोषित करती है। 

• धारा 3 के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन वर्ष के कारावास, या जुर्माना, अथवा दोनों का प्रावधान है। दूसरी एवं उसके बाद की प्रत्येक दोषसिद्धि की स्थिति में कम-से-कम एक वर्ष के कारावास का प्रावधान किया गया है।

संशोधन विधेयक के प्रमुख प्रावधान

• धारा 3 का विस्तार राष्ट्रीय गीत तक: इस विधेयक के माध्यम से राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की धारा 3 का दायरा बढ़ाकर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी इसमें शामिल किया गया है। इससे वंदे मातरम् को वही वैधानिक संरक्षण प्राप्त होगा, जो वर्तमान में राष्ट्रीय गान को प्राप्त है।

• दंडनीय कृत्य: यह विधेयक निम्नलिखित कृत्यों को दंडनीय अपराध घोषित करता है—

  • वंदे मातरम् के गायन को जानबूझकर रोकना, अथवा 
  • राष्ट्रीय गीत का गायन कर रही सभा में व्यवधान उत्पन्न करना। 

• समान दंड का प्रावधान: राष्ट्रीय गीत से संबंधित अपराधों पर राष्ट्रीय गान के संबंध में धारा 3 के अंतर्गत निर्धारित समान दंड लागू होगा। इसमें पुनरावृत्ति करने वाले दोषियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान भी शामिल है।

• राष्ट्रीय गान के समान कानूनी दर्जा: यह संशोधन राष्ट्रीय गीत को उसके गायन में बाधा पहुँचाने या व्यवधान उत्पन्न करने से संबंधित अपराधों के संदर्भ में राष्ट्रीय गान के समान कानूनी दर्जा प्रदान करता है।

चिंताएँ एवं संवैधानिक मुद्दे

• मौलिक अधिकारों से संभावित टकराव: राष्ट्रीय गीत से संबंधित कृत्यों को अपराध घोषित करने से अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत प्रदत्त वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्रदत्त धर्म और अंतःकरण की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक प्रश्न उत्पन्न हो सकते हैं, विशेषकर तब जब कोई व्यक्ति वास्तविक धार्मिक आस्था के आधार पर राष्ट्रीय गीत गाने से इंकार करता हो।

• न्यायिक दृष्टांत: बिजोय इमैनुएल बनाम केरल राज्य (1986) में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया था कि यदि किसी नागरिक का राष्ट्रीय गान न गाने का निर्णय वास्तविक धार्मिक आस्था पर आधारित हो तथा वह राष्ट्रीय गान का उचित सम्मान करता हो, तो उसे राष्ट्रीय गान गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार के संवैधानिक प्रश्न राष्ट्रीय गीत के संदर्भ में भी उत्पन्न हो सकते हैं।

• परिभाषागत अस्पष्टता: “व्यवधान” अथवा “जानबूझकर रोकना” जैसे शब्दों की स्पष्ट एवं सावधानीपूर्वक व्याख्या आवश्यक है, ताकि मनमाने ढंग से कानून का प्रयोग न हो तथा विधिक निश्चितता बनी रहे।

• देशभक्ति और स्वतंत्रता के बीच संतुलन: यद्यपि अनुच्छेद 51(क) के अंतर्गत राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य है, फिर भी दंडात्मक प्रावधान ऐसे होने चाहिए जो अनुपातिक, युक्तिसंगत तथा मौलिक अधिकारों के अनुरूप हों।

आगे की राह: राष्ट्रीय सम्मान एवं संवैधानिक स्वतंत्रताओं के बीच संतुलन

• विधिक स्पष्टता सुनिश्चित करना: “जानबूझकर रोकना” तथा “व्यवधान उत्पन्न करना” जैसे शब्दों की स्पष्ट परिभाषा निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि अस्पष्टता कम हो तथा कानून का मनमाने ढंग से प्रयोग न हो।

• नागरिक जागरूकता को बढ़ावा देना: वंदे मातरम् के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व से संबंधित जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए, जिससे लोगों में स्वैच्छिक सम्मान की भावना विकसित हो और केवल दंडात्मक प्रावधानों पर निर्भरता कम हो।

• संतुलित दृष्टिकोण अपनाना: राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को विधिक संरक्षण, संवैधानिक मूल्यों एवं नागरिक शिक्षा के समन्वित माध्यम से सुदृढ़ किया जाना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय सम्मान और लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं—दोनों का समान रूप से संरक्षण सुनिश्चित हो।

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