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संदर्भ: दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) को 25 सितंबर 2014 को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत शुरू किया गया था। वर्ष 2026 में इस योजना के 12 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह योजना ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से रोजगार और स्थायी आजीविका तक पहुँचने के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के बारे में

  • 25 सितंबर 2014 को पंडित दीन दयाल उपाध्याय की 98वीं जयंती के अवसर पर इस दिन को ‘अंत्योदय दिवस’ के रूप में घोषित किया गया था।
  • इसी दिन ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अपने मौजूदा आजीविका स्किल्स प्रोग्राम (Aajeevika Skills Programme) का पुनर्गठन करते हुए इसे दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के रूप में शुरू किया।
  • DDU-GKY एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके अंतर्गत 15–35 वर्ष की आयु के गरीब ग्रामीण युवाओं को रोजगार-स्थापन से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। प्रशिक्षण की अवधि 3 से 12 महीने तक होती है।
  • सरकार ने मई 2025 में उन्नत DDU-GKY 2.0 दिशानिर्देश अधिसूचित किए। इन दिशानिर्देशों के तहत प्रशिक्षण, रोजगार-स्थापन, रोजगार की स्थिरता और रोजगार-स्थापन के बाद सहायता से संबंधित व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है।
  • DDU-GKY 2.0 एक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें प्रशिक्षण, रोजगार-स्थापन, रोजगार में बने रहना और कैरियर में प्रगति शामिल हैं। न्यूनतम रोजगार-स्थापन अवधि को 3 महीने से बढ़ाकर 6 महीने कर दिया गया है। इसमें वेतनभोगी रोजगार, स्वरोजगार और गिग रोजगार शामिल हैं।
  • यह योजना सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देती है। इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) समुदायों के लिए 50%, महिलाओं के लिए 33% और दिव्यांगजनों के लिए 5% अनिवार्य कवरेज निर्धारित किया गया है।
  • विशेष पहलों में वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित जिलों और आकांक्षी जिलों के लिए ‘रोशनी’ तथा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए ‘हिमायत’ शामिल हैं। कुल DDU-GKY आवंटन का 10% पूर्वोत्तर राज्यों के लिए निर्धारित किया गया है।

योजना की उपलब्धियाँ

  • व्यापक कौशल प्रशिक्षण और रोजगार-स्थापन: वर्ष 2014-15 में योजना की शुरुआत से अब तक 36 क्षेत्रों और 800 से अधिक रोजगार भूमिकाओं में 18.47 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से 12.43 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का रोजगार-स्थापन हुआ है।
  • व्यापक कार्यान्वयन नेटवर्क: DDU-GKY वर्तमान में 31 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लागू है। इसके अंतर्गत 749 स्वीकृत परियोजनाएँ, 760 सक्रिय प्रशिक्षण केंद्र और 455 से अधिक परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियाँ हैं।
  • महिलाओं की भागीदारी: योजना के अंतर्गत 9.71 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि 6.34 लाख से अधिक महिलाओं का रोजगार-स्थापन हुआ है।
  • रोजगार में बने रहने की व्यवस्था को मजबूत करना: DDU-GKY 2.0 के अंतर्गत रोजगार-स्थापन के बाद 12 महीने तक निगरानी की व्यवस्था की गई है।
    • रोजगार प्राप्त अभ्यर्थियों को ₹7,620 की वित्तीय सहायता दी जाती है, जबकि 365 दिनों तक रोजगार में बने रहने वाले अभ्यर्थियों को ₹5,000 की रोजगार-स्थायित्व सहायता प्रदान की जाती है। इसमें अधिकतम 60 दिनों के रोजगार अंतराल की अनुमति है।
  • प्रौद्योगिकी-सक्षम कार्यान्वयन: संशोधित रूपरेखा के अंतर्गत कार्यक्रम की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए उन्नत डैशबोर्ड, सार्वजनिक अभ्यर्थी पोर्टल, स्वचालित प्रक्रियाएँ, चेहरे की पहचान के माध्यम से डिजिटल उपस्थिति एवं मूल्यांकन तथा स्किल इंडिया डिजिटल हब के एकीकरण की व्यवस्था की गई है।

योजना की आवश्यकता और महत्व

  • ग्रामीण जनसांख्यिकीय क्षमता का उपयोग: वर्ष 2036 तक युवाओं की आबादी लगभग 34.5 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। इसलिए समावेशी आर्थिक विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल, रोजगार और आजीविका के अवसरों तक पहुँच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • रोजगार क्षमता में सुधार: उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण में रोजगार-विशिष्ट तकनीकी कौशल के साथ अंग्रेजी संचार, रोजगारपरक एवं जीवन कौशल, कंप्यूटर एवं डिजिटल साक्षरता तथा उद्यमिता को शामिल किया जाता है।
  • सतत आजीविका को बढ़ावा: न्यूनतम 6 महीने की रोजगार-स्थापन अवधि, रोजगार-स्थापन के बाद निगरानी, रोजगार में बने रहने के लिए सहायता तथा 12 महीने के बाद कौशल उन्नयन और पुनःकौशल के अवसर रोजगार की निरंतरता और कैरियर में प्रगति को मजबूत करते हैं।
  • कमजोर क्षेत्रों को सहायता: रोशनी, हिमायत, पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आवंटन और विशेष क्षेत्र भत्ता वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित, आकांक्षी, पूर्वोत्तर और दुर्गम क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
  • आजीविका के अवसरों का विस्तार: DDU-GKY के माध्यम से रोजगार-स्थापन से जुड़े वेतनभोगी रोजगार के साथ-साथ, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETIs) ग्रामीण स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण तथा मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करते हैं।
    • वर्तमान स्थिति के अनुसार, 634 जिलों में 647 RSETIs द्वारा 63.47 लाख अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से 45.60 लाख अभ्यर्थियों का स्वरोजगार/आजीविका में स्थायित्व हुआ है।

कमियाँ और चुनौतियाँ

  • प्रशिक्षण शुरू होने की धीमी गति: यद्यपि सभी 31 सहभागी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को वर्ष 2026–28 के लिए 9 लाख से अधिक प्रशिक्षण लक्ष्य आवंटित किए जा चुके हैं, फिर भी मंत्रालय ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIAs) को लक्ष्य आवंटित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने और 31 अक्टूबर 2026 तक प्रशिक्षण शुरू करने को कहा है।
  • DDU-GKY 2.0 का असमान क्रियान्वयन: 24 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा PIAs को 5.6 लाख लाभार्थियों के लक्ष्य आवंटित किए गए हैं, जो 1,200 से अधिक परियोजनाओं को कवर करते हैं। वहीं, अन्य राज्य/केंद्रशासित प्रदेश अभी भी लक्ष्य आवंटन की उन्नत अवस्था में हैं।
  • रोजगार में बने रहने की चुनौती: DDU-GKY 2.0 के अंतर्गत रोजगार-स्थापन के बाद सहायता को मजबूत किया गया है, फिर भी रोजगार की निरंतरता और सतत आजीविका सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण बना हुआ है। विशेष रूप से इसलिए कि योजना अब 6 महीने की रोजगार-स्थापन अवधि और दीर्घकालिक निगरानी की ओर बढ़ गई है।
  • प्रवासन से संबंधित चुनौतियाँ: प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आजीविका के अवसरों की तलाश में प्रवासन करता है। इसलिए मूल और गंतव्य दोनों राज्यों में प्रभावी प्रवासन सहायता केंद्रों की आवश्यकता है, जो आवास संबंधी सहायता, परामर्श, रोजगार-स्थापन सहायता और पुनर्वास/स्थायित्व जैसी सुविधाएँ प्रदान कर सकें।
  • दुर्गम क्षेत्रों में क्रियान्वयन: पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक-सांस्कृतिक विविधताएँ, विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियाँ तथा दुर्गम क्षेत्रों की स्थितियाँ योजना के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ उत्पन्न करती हैं। इसलिए विशेष क्षेत्र भत्ते और लक्षित हस्तक्षेपों को निरंतर बनाए रखना आवश्यक है।

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