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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास; बुनियादी ढाँचा: रेलवे।
संदर्भ: हाल ही में प्रधानमंत्री ने हरियाणा में उत्तरी रेलवे के जींद–सोनीपत खंड पर भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल-संचालित ट्रेन की शुरुआत की। यह देश के स्वच्छ, सतत एवं हाइड्रोजन-आधारित रेल परिवहन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
अन्य संबंधित जानकारी
• यह शुरुआत एक प्रायोगिक परियोजना के सफल समापन का प्रतीक है, जिसने हाइड्रोजन-संचालित यात्री रेल सेवाओं की व्यवहार्यता सिद्ध की तथा भारतीय रेल के कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रगति की।
• इस पहल के साथ भारत, जर्मनी, जापान, चीन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जहाँ हाइड्रोजन-संचालित ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। यह स्वच्छ परिवहन प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
• मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत स्वदेशी रूप से विकसित इस परियोजना को जींद में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण एवं ईंधन पुनर्भरण की एकीकृत व्यवस्था का समर्थन प्राप्त है, जिससे राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के उद्देश्यों को भी बल मिलता है।
• चूँकि भारतीय रेल अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क के 99% से अधिक भाग का विद्युतीकरण कर चुकी है, इसलिए हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी उन गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों के लिए एक सतत समाधान प्रदान करती है, जहाँ पारंपरिक विद्युतीकरण तकनीकी रूप से कठिन अथवा आर्थिक दृष्टि से लाभकारी नहीं है।
हाइड्रोजन-संचालित ट्रेनों को समझना
• हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन में ईंधन सेल के माध्यम से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया से ट्रेन के भीतर ही विद्युत उत्पन्न की जाती है। इस प्रक्रिया में जलवाष्प ही एकमात्र प्रत्यक्ष उत्सर्जन होता है।
• उत्पन्न विद्युत से ट्रेन के कर्षण मोटरों का संचालन होता है, जिससे डीज़ल इंजन की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
• पारंपरिक डीज़ल चालित ट्रेनों की तुलना में हाइड्रोजन-संचालित ट्रेनें संचालन के दौरान लगभग शून्य प्रत्यक्ष उत्सर्जन करती हैं, कम ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करती हैं तथा अधिक ऊर्जा दक्षता प्रदान करती हैं।
• ये विशेष रूप से गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों के लिए उपयुक्त हैं, जहाँ ओवरहेड विद्युत लाइनों की स्थापना तकनीकी रूप से कठिन या आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं होती।
• हालांकि, इनका व्यापक स्तर पर उपयोग हरित हाइड्रोजन की उपलब्धता, समर्पित ईंधन पुनर्भरण अवसंरचना तथा किफायती ईंधन सेल प्रौद्योगिकी पर निर्भर करता है।
भारत की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन की प्रमुख विशेषताएँ
• स्वदेशी रूप से विकसित: इसका डिज़ाइन, अभियांत्रिकी तथा एकीकरण भारत में ही किया गया है, जिससे आत्मनिर्भर भारत तथा उन्नत रेल प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को सुदृढ़ किया गया है।
• विश्व की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेनसेट: यह 10-कोच वाली यात्री ट्रेन है, जिसमें 2 हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार तथा 8 यात्री डिब्बे हैं। इसकी यात्री क्षमता लगभग 2,600 है।
• विश्व की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन-संचालित यात्री ट्रेन: इसमें 1,200 किलोवाट क्षमता की दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगी हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 2,400 किलोवाट है।
• परिचालन प्रोफ़ाइल: प्रारंभिक चरण में यह ट्रेन हरियाणा के 89 किलोमीटर लंबे जींद–सोनीपत मार्ग पर संचालित होगी। इसकी परिचालन गति 75 किमी/घंटा तथा डिज़ाइन गति 110 किमी/घंटा है।

• एकीकृत हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र: इस परियोजना के लिए जींद में हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण एवं ईंधन पुनर्भरण की समर्पित सुविधा स्थापित की गई है, जहाँ विद्युत अपघटन के माध्यम से हरित हाइड्रोजन का उत्पादन कर ट्रेनों के संचालन हेतु उपलब्ध कराया जाता है।
• मजबूत सुरक्षा व्यवस्था: ट्रेन तथा ईंधन पुनर्भरण अवसंरचना में हाइड्रोजन रिसाव का पता लगाने, अग्नि एवं ताप निगरानी जैसी उन्नत सुरक्षा प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं। साथ ही, ईंधन पुनर्भरण सुविधा को पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से स्वीकृति प्राप्त है।
भारत की हाइड्रोजन ट्रेन पहल का महत्त्व
• हरित रेल परिवहन को गति: यह गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों के लिए स्वच्छ विकल्प प्रदान करती है तथा भारतीय रेल की दीर्घकालिक कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की रणनीति को बल देती है।
• राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा: यह जन परिवहन में हरित हाइड्रोजन के व्यावसायिक उपयोग को प्रदर्शित करती है तथा देश में हाइड्रोजन आधारित अर्थव्यवस्था के विकास को प्रोत्साहित करती है।
• तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ बनाना: यह हाइड्रोजन प्रणोदन, ईंधन सेल एकीकरण, हाइड्रोजन भंडारण तथा रेल अभियांत्रिकी में भारत की स्वदेशी क्षमताओं को प्रदर्शित करती है और मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करती है।
• स्वच्छ परिवहन में वैश्विक नेतृत्व की ओर: यह भारत को हाइड्रोजन-संचालित यात्री ट्रेनों का संचालन करने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में स्थापित करती है तथा अगली पीढ़ी की सतत परिवहन प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में उसकी वैश्विक स्थिति को सुदृढ़ करती है।
व्यापक स्तर पर अपनाने की चुनौतियाँ
• हरित हाइड्रोजन की उच्च लागत: विद्युत अपघटन के माध्यम से हरित हाइड्रोजन का उत्पादन अभी भी पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में काफी महँगा है।
• अवसंरचना की आवश्यकता: हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, संपीड़न तथा ईंधन पुनर्भरण की सुविधाएँ विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर पूँजी निवेश की आवश्यकता होती है।
• भंडारण एवं परिवहन की चुनौतियाँ: हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील होती है तथा इसे उच्च दाब पर संग्रहित एवं परिवहन करना पड़ता है, जिसके लिए विशेष अवसंरचना तथा कठोर सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होती है।
• प्रौद्योगिकी की परिपक्वता: हाइड्रोजन रेल प्रौद्योगिकी अभी वैश्विक स्तर पर प्रारंभिक अवस्था में है तथा इसके बड़े पैमाने पर परिचालन अनुभव और आपूर्ति श्रृंखला अभी सीमित हैं।
आगे की राह
• हरित हाइड्रोजन उत्पादन का विस्तार: नवीकरणीय ऊर्जा आधारित हाइड्रोजन उत्पादन बढ़ाकर ईंधन की लागत कम की जाए तथा इसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता में सुधार किया जाए।
• उपयुक्त रेल मार्गों पर विस्तार: गैर-विद्युतीकृत तथा पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील रेल मार्गों पर, जहाँ पारंपरिक विद्युतीकरण कठिन या आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है, वहाँ हाइड्रोजन-संचालित ट्रेनों का चरणबद्ध विस्तार किया जाए।
• स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहन: ईंधन सेल, हाइड्रोजन भंडारण प्रणालियों तथा अन्य महत्त्वपूर्ण उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम की जाए।
• मजबूत हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र का विकास: सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण एवं ईंधन पुनर्भरण अवसंरचना का विस्तार किया जाए तथा निरंतर अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित कर हाइड्रोजन-संचालित रेल परिवहन को अधिक सुरक्षित, दक्ष एवं किफायती बनाया जाए।
