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सामान्य अध्ययन-2: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियाँ और मंच – उनकी संरचना, अधिदेश; भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार। 

संदर्भ: हाल ही में 29 देशों ने चीन के शंघाई में एक समझौते पर हस्ताक्षर कर विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन की स्थापना की। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं वैश्विक शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु स्थापित एक नया अंतर-सरकारी संगठन है।

अन्य संबंधित जानकारी

• विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन की औपचारिक स्थापना वर्ष 2026 में शंघाई में आयोजित विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन के दौरान की गई। इसकी स्थापना का प्रस्ताव वर्ष 2025 के सम्मेलन में चीन द्वारा प्रस्तुत किया गया था। 

• शंघाई मुख्यालय वाला यह संगठन कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन, तकनीकी सहयोग तथा क्षमता निर्माण के लिए एक बहुपक्षीय मंच उपलब्ध कराएगा, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए। 

• इस संगठन की स्थापना ऐसे समय हुई है, जब विश्व के विभिन्न देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकियों के तीव्र विकास को विनियमित करने हेतु वैश्विक शासन तंत्र विकसित करने के प्रयास कर रहे हैं। 

विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन के बारे में

• प्रकृति: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नागरिक उपयोग के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने हेतु स्थापित एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी संगठन। 

• अपनी तरह का पहला संगठन: यह विश्व का पहला अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जो विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग एवं शासन के लिए समर्पित है। 

• मुख्यालय: शंघाई, चीन। 

• संस्थापक सदस्य: एशिया, अफ्रीका, यूरोप तथा लैटिन अमेरिका के 29 देशों द्वारा इसकी स्थापना की गई।  प्रमुख संस्थापक सदस्यों में चीन, पाकिस्तान, मलेशिया, म्यांमार, लाओस, इंडोनेशिया, कज़ाख़स्तान, रूस, ब्राज़ील तथा दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। भारत इसका सदस्य नहीं है। 

• मुख्य उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन को बढ़ावा देना तथा यह सुनिश्चित करना कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवता के लिए लाभकारी, सुरक्षित एवं निष्पक्ष बनी रहे। 

• प्रमुख विशेषताएँ

  • वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन, नियामक ढाँचों, तकनीकी मानकों तथा नीतिगत संवाद पर अंतर्राष्ट्रीय समन्वय को बढ़ावा देता है। 
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता अंतराल को कम करना: प्रौद्योगिकी साझा करने, क्षमता निर्माण तथा तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहित कर विकासशील देशों को वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता अंतर कम करने में सहायता प्रदान करता है। 
  • सभी देशों के लिए खुली सदस्यता: यह संगठन सभी देशों के लिए खुला है तथा उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग को प्रोत्साहित करता है। 
  • मार्गदर्शक सिद्धांत: यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करता है तथा व्यापक परामर्श, संयुक्त योगदान, साझा लाभ एवं जन-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकास पर बल देता है। 

महत्त्व

• वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन को संस्थागत स्वरूप देना: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीव्र विस्तार के बीच यह संवाद, सहयोग एवं समन्वय के लिए एक स्थायी बहुपक्षीय मंच प्रदान करता है। 

• वैश्विक दक्षिण की सशक्त भागीदारी: यह विकासशील देशों की वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानकों, नियमों एवं क्षमता निर्माण पहलों के निर्माण में भागीदारी बढ़ाने तथा तकनीकी असमानताओं को कम करने का प्रयास करता है। 

• उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकास को बढ़ावा: यह अनुसंधान, नवाचार एवं शासन के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करता है, जिससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास सुरक्षित, नैतिक एवं समावेशी रूप से हो सके। 

• वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता अंतराल को कम करना: यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकियों तक समान पहुँच, ज्ञान-साझाकरण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा देता है, जिससे विकासशील देशों की वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। 

चिंताएँ एवं चुनौतियाँ

• वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन का विखंडन: विभिन्न भू-राजनीतिक समूहों द्वारा विकसित अलग-अलग शासन ढाँचों के कारण भिन्न मानकों एवं खंडित वैश्विक विनियमन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। 

• नवाचार एवं विनियमन के बीच संतुलन: प्रौद्योगिकी नवाचार को बाधित किए बिना साझा वैश्विक शासन मानकों का विकास करना एक बड़ी चुनौती है। 

• देशों की भिन्न प्राथमिकताएँ: विभिन्न देशों के रणनीतिक हितों, नियामक दृष्टिकोणों तथा तकनीकी क्षमताओं में अंतर होने के कारण सर्वसम्मति बनाना कठिन हो सकता है। 

• क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियाँ: संगठन की दीर्घकालिक प्रभावशीलता व्यापक अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी, संस्थागत क्षमता तथा स्वीकृत शासन सिद्धांतों के प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। 

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