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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; विज्ञान और प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव।
संदर्भ: साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि मरीन क्लाउड ब्राइटनिंग (Marine Cloud Brightening–MCB) जोकि एक ऐसी तकनीक है जिसमें समुद्री बादलों में समुद्री जल के सूक्ष्म कणों का छिड़काव किया जाता है, सुपर अल नीनो के विकास को कमजोर कर सकती है अथवा उसे रोक सकती है, जिससे इसके वैश्विक जलवायु संबंधी प्रभावों को कम किया जा सकता है।
अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
- अध्ययन में पाया गया कि दक्षिण-पूर्वी प्रशांत महासागर के ऊपर मरीन क्लाउड ब्राइटनिंग (MCB) महासागर के जल को ठंडा करके तथा उसके विकास को संचालित करने वाली महासागर-वायुमंडल फीडबैक प्रक्रियाओं को बाधित करके सुपर अल नीनो को कमजोर कर सकती है अथवा उसके विकास को रोक सकती है।
- 1997–98 तथा 2015–16 के अल नीनो घटनाक्रमों के सिमुलेशन से पता चला कि प्रारंभिक एवं निरंतर हस्तक्षेप सर्वाधिक प्रभावी रहे। इनमें ENSO को पुनः तटस्थ अवस्था में लाने अथवा ला नीना जैसी शीतलन परिस्थितियाँ उत्पन्न करने की क्षमता पाई गई।
- शोधकर्ताओं ने 2019–20 के ऑस्ट्रेलियाई बुशफायर से प्राप्त अनुभवों का विश्लेषण किया, जहाँ प्रशांत महासागर के ऊपर एरोसोल-प्रेरित बादल ब्राइटनिंग के बाद कई वर्षों तक असामान्य ला नीना चरण देखा गया। इससे जलवायु प्रतिरूपों पर बादलों की परावर्तकता के प्रभाव का संकेत मिलता है।
- सिमुलेशन से यह भी संकेत मिला कि MCB, अत्यधिक अल नीनो घटनाओं से जुड़े अनेक तापमान एवं वर्षा संबंधी असामान्य परिवर्तनों को उलट सकती है, जिससे सूखा, बाढ़, हीटवेव तथा उनसे होने वाली आर्थिक क्षति को कम करने में सहायता मिल सकती है।
- अध्ययन के निष्कर्ष ENSO जैसी मौसमी जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रबंधन हेतु लक्षित भू-अभियांत्रिकी की संभावनाओं को रेखांकित करते हैं। हालाँकि, यह तकनीक अभी प्रयोगात्मक है तथा बड़े पैमाने पर इसका परीक्षण नहीं किया गया है।
विज्ञान को समझना: अल नीनो एवं मरीन क्लाउड ब्राइटनिंग (MCB)
- अल नीनो (El Niño)
- अल नीनो, एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) का उष्ण चरण है, जिसकी विशेषता मध्य एवं पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से उच्च तापमान से होती है।
- यह महासागर के तापमान, व्यापारिक पवनों तथा वायुमंडलीय परिसंचरण प्रतिरूपों के बीच होने वाली परस्पर क्रियाओं का परिणाम है।
- प्रबल अल नीनो घटनाएँ वैश्विक मौसम प्रणालियों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे सूखा, बाढ़, हीटवेव, कमजोर मानसून, समुद्री पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव तथा महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक हानि हो सकती है।
- अत्यधिक तीव्र अल नीनो घटनाओं को सुपर अल नीनो कहा जाता है।
- मरीन क्लाउड ब्राइटनिंग (MCB)
- मरीन क्लाउड ब्राइटनिंग (MCB), सौर विकिरण प्रबंधन (SRM) की एक तकनीक है, जिसका उद्देश्य वायुमंडल में समुद्री जल की सूक्ष्म बूंदों का छिड़काव करके निम्न-स्तरीय समुद्री कपासी-स्तरी मेघ (Marine Stratocumulus) बादलों की परावर्तकता बढ़ाना है।
- समुद्री-लवण के कण बादल संघनन नाभिक (Cloud Condensation Nuclei–CCN) के रूप में कार्य करते हैं, जिससे बादल अधिक चमकीले एवं दीर्घकाल तक बने रहने वाले बन जाते हैं। ये अधिक मात्रा में आने वाले सूर्य के प्रकाश को अंतरिक्ष में परावर्तित कर देते हैं, जिससे महासागर की सतह के तापमान में वृद्धि कम होती है।
- इस अवधारणा का अध्ययन ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों में प्रवाल विरंजन के जोखिम को कम करने के उपाय के रूप में भी किया गया है, जो जलवायु मॉडलिंग से परे इसके संभावित अनुप्रयोगों को दर्शाता है।

अध्ययन का संभावित महत्त्व
- चरम मौसम संबंधी जोखिमों में कमी: यदि यह तकनीक प्रभावी सिद्ध होती है, तो मरीन क्लाउड ब्राइटनिंग (MCB) सुपर अल नीनो से जुड़े सूखा, बाढ़, हीटवेव तथा अन्य चरम मौसमी घटनाओं की तीव्रता को कम करने में सहायता कर सकती है, जिससे मानवीय एवं आर्थिक क्षति में कमी आ सकती है।
- समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों का संरक्षण: समुद्र की सतह के तापमान को कम करके MCB, समुद्री हीटवेव तथा प्रवाल विरंजन की घटनाओं को कम करने में सहायक हो सकती है, जो जैव-विविधता से समृद्ध समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों के लिए गंभीर खतरा हैं।
- आर्थिक एवं खाद्य सुरक्षा लाभ: चूँकि सुपर अल नीनो की घटनाएँ कृषि उत्पादन में भारी नुकसान, मत्स्य क्षेत्र में व्यवधान तथा जल संकट उत्पन्न कर सकती हैं, इसलिए उनकी तीव्रता को कम करने से खाद्य सुरक्षा में सुधार होगा तथा जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में आर्थिक हानि कम हो सकती है।
- भारतीय मानसून पर प्रभाव: चूँकि प्रबल अल नीनो घटनाएँ प्रायः भारत में कमज़ोर मानसूनी वर्षा से जुड़ी होती हैं, इसलिए उनकी तीव्रता को सीमित करने से वर्षा की अनिश्चितता कम हो सकती है तथा कृषि स्थिरता को समर्थन मिल सकता है।
चिंताएँ एवं सीमाएँ
- मॉडल सिमुलेशन पर निर्भरता: अध्ययन के निष्कर्ष मुख्यतः जलवायु मॉडल पर आधारित हैं तथा बड़े पैमाने के क्षेत्रीय प्रयोगों द्वारा अभी तक सत्यापित नहीं किए गए हैं। इसलिए वास्तविक जलवायु प्रतिक्रियाएँ सिमुलेशन से भिन्न हो सकती हैं।
- अनपेक्षित जलवायु प्रभावों का जोखिम: बादलों के गुणों में जानबूझकर परिवर्तन करने से वर्षा प्रतिरूपों, वायुमंडलीय परिसंचरण अथवा महासागरीय परिस्थितियों पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ सकते हैं, जिससे जलवायु संबंधी जोखिम एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित हो सकते हैं।
- परिचालन एवं प्रौद्योगिकीय चुनौतियाँ: इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए विशाल समुद्री क्षेत्रों में समुद्री जल के एरोसोल का छिड़काव करने में सक्षम विशेष प्रणालियों की आवश्यकता होगी। यह क्षमता अभी भी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है तथा बड़े पैमाने पर परीक्षण नहीं की गई है।
- शासन एवं नैतिक चुनौतियाँ: भू-अभियांत्रिकी संबंधी हस्तक्षेपों के सीमापार प्रभाव हो सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय विनियमन, दायित्व, निर्णय लेने के अधिकार तथा जोखिम एवं लाभों के न्यायसंगत वितरण से जुड़े जटिल प्रश्न उत्पन्न होते हैं।
- जलवायु शमन का विकल्प नहीं: मरीन क्लाउड ब्राइटनिंग (MCB) जलवायु परिवर्तन के कुछ प्रभावों के प्रबंधन में सहायक हो सकती है, लेकिन यह जलवायु परिवर्तन के मूल कारणों, विशेषकर ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन, का समाधान नहीं करती।
