संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-1: जनसंख्या और संबद्ध मुद्दे।
सामान्य अध्ययन -2: सांविधिक,विनियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय; स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: हाल ही में भारत के महापंजीयक कार्यालय (ORGI) ने नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 जारी की, जो भारत में प्रजनन क्षमता, मृत्यु दर, लिंगानुपात और जनसंख्या गतिकी से संबंधित महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियों को रेखांकित करती है।
अन्य संबंधित जानकारी
- नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रजनन क्षमता तथा मृत्यु दर के संकेतकों के वार्षिक अनुमान लगाने वाली भारत की सबसे बड़ी जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण प्रणाली है।
- यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत का जनसांख्यिकीय संक्रमण निरंतर जारी है, जिसके तहत प्रजनन स्तर प्रतिस्थापन दर से नीचे बना हुआ है तथा मृत्यु दर और बाल जीवन रक्षा संकेतकों में क्रमिक सुधार हुआ है।
- ये निष्कर्ष निम्नलिखित नीतिगत क्षेत्रों के लिए विशेष महत्व रखते हैं:
- जनसंख्या स्थिरीकरण,
- वृद्ध होती जनसंख्या,
- स्वास्थ्य देखभाल नियोजन,
- महिला एवं बाल विकास, तथा
- श्रम-बल गतिकी।
SRS सांख्यिकी रिपोर्ट 2024 के मुख्य निष्कर्ष
प्रजनन स्तर में गिरावट
- भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) लगातार पांचवें वर्ष 1.9 पर बनी रही, जो कि 2.1 की प्रतिस्थापन-स्तर प्रजनन से कम है।
- शहरी क्षेत्रों की कुल प्रजनन दर 1.5 के निम्न स्तर पर बनी रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की कुल प्रजनन दर प्रतिस्थापन-स्तर 2.1 पर स्थिर रही।
- देश में बिहार ने सर्वाधिक 2.9 की कुल प्रजनन दर (TFR) दर्ज की, जिसके बाद उत्तर प्रदेश (2.6) का स्थान रहा, जबकि दिल्ली में सबसे कम 1.2 का प्रजनन स्तर दर्ज किया गया।
- देश के केवल छह राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और छत्तीसगढ़ में अभी भी प्रतिस्थापन दर से अधिक प्रजनन स्तर दर्ज किया गया हैं।
जन्म और मृत्यु दर में प्रवृत्तियां
- भारत की अशोधित जन्म दर (CBR) में दीर्घकालिक गिरावट जारी रही, जो जनसंख्या वृद्धि की मंद गति और बदलते जनसांख्यिकीय पैटर्न को दर्शाती है।
- राष्ट्रीय स्तर पर अशोधित जन्म दर (CBR) प्रति 1,000 जनसंख्या पर 18.3 रही, जिसमें शहरी क्षेत्रों 14.7 की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च जन्म दर (20.2) दर्ज की गई।
- बिहार में सर्वाधिक अशोधित जन्म दर 26.8 दर्ज की गई, जबकि केरल में यह सबसे कम (11.1) रही।
- राष्ट्रीय स्तर पर अशोधित मृत्यु दर (CDR) प्रति 1,000 जनसंख्या पर 6.4 रही, जिसमें शहरी क्षेत्रों (5.6) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च मृत्यु दर (6.8) दर्ज की गई।
- छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक अशोधित मृत्यु दर (8.4) दर्ज की गई, जबकि दिल्ली में सबसे कम (4.5) रही।
शिशु और बाल मृत्यु दर में सुधार
- भारत की शिशु मृत्यु दर (IMR) गिरकर 24 शिशु मृत्यु प्रति 1,000 जीवित जन्म हो गई है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों की शिशु मृत्यु दर (27) अभी भी शहरी क्षेत्रों की शिशु मृत्यु दर (17) की तुलना में काफी अधिक बनी हुई है।
- छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक शिशु मृत्यु दर (36) दर्ज की गई, जबकि केरल में सबसे कम शिशु मृत्यु दर (8) दर्ज की गई।
- पाँच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर (U5MR) घटकर 28 प्रति 1,000 जीवित जन्म हो गई है, जो मातृ एवं बाल स्वास्थ्य देखभाल के परिणामों में सुधार को दर्शाती है।
जन्म के समय लिंगानुपात और मृत जन्म दर
- भारत में जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) में सुधार हुआ है और यह 918 महिलाएँ प्रति 1,000 पुरुष हो गया है, हालांकि कई राज्यों में अभी भी प्रतिकूल बाल लिंगानुपात की स्थिति बनी हुई है।
- राष्ट्रीय स्तर पर मृत जन्म दर (SBR) 5 प्रति 1,000 कुल जन्म रही, जो मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में क्रमिक सुधार को प्रदर्शित करती है।
निष्कर्षों का महत्व
- जनसांख्यिकीय संक्रमण: यह रिपोर्ट उच्च प्रजनन क्षमता और उच्च मृत्यु दर से निम्न प्रजनन क्षमता, निम्न मृत्यु दर और उच्च जीवन प्रत्याशा की ओर भारत के जारी जनसांख्यिकीय संक्रमण को दर्शाती है।
- जनसंख्या स्थिरीकरण: प्रतिस्थापन-स्तर से निरंतर कम बनी हुई प्रजनन यह संकेत देती है कि भारत धीरे-धीरे दीर्घकालिक जनसंख्या स्थिरीकरण की ओर बढ़ रहा है।
- स्वास्थ्य परिणामों में सुधार: शिशु मृत्यु दर (IMR) और पाँच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर (U5MR) में गिरावट, मातृ स्वास्थ्य देखभाल, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों में हुए सुधारों को प्रदर्शित करती है।
- वृद्ध होती जनसंख्या की चुनौती: प्रजनन क्षमता में निरंतर गिरावट के परिणामस्वरूप अंततः वृद्ध जनसंख्या के अनुपात में वृद्धि हो सकती है, जिससे भविष्य में पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर दबाव बढ़ेगा।
- क्षेत्रीय असंतुलन: प्रजनन क्षमता, मृत्यु दर और लिंगानुपात के संकेतकों में महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय भिन्नताएँ भारत भर में असमान सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य देखभाल विकास को रेखांकित करती हैं।
नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) के बारे में
- यह भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कार्यालय (ORGI) द्वारा प्रत्येक वर्ष सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में आयोजित किया जाने वाला एक बड़े पैमाने का जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण है।
- SRS की पृष्ठभूमि:
- भारत में नागरिक पंजीकरण प्रणाली को एकीकृत करने के लिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 अधिनियमित किया गया था।
- जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने के बावजूद, कुछ राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में अभी भी कम-पंजीकरण (अंडर-रिपोर्टिंग) की समस्या बनी हुई है।
- आंकड़ों के इसी अंतराल को दूर करने के लिए, प्रतिदर्श पंजीकरण प्रणाली (SRS) को वर्ष 1964-65 में पायलट आधार पर और वर्ष 1969-70 से पूर्ण पैमाने पर शुरू किया गया था।
- SRS एक दोहरी-अभिलेख प्रणाली (Dual-record system) का अनुसरण करता है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- स्थानीय अंशकालिक प्रगणकों द्वारा निरंतर प्रगणना
- और पर्यवेक्षकों द्वारा स्वतंत्र रूप से प्रत्येक छह महीने में किए जाने वाले पूर्वव्यापी सर्वेक्षण।
महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (ORGI) के बारे में
- भारत का महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (ORGI) गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और इसका नेतृत्व ‘भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त’ द्वारा किया जाता है।
- इसकी स्थापना मुख्य रूप से प्रत्येक दस वर्ष में होने वाली दशकीय जनसंख्या जनगणना के संचालन तथा जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 को प्रशासित करने के लिए वर्ष 1949 में की गई थी।
- ORGI भारत में प्रमुख जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों के संचालन के लिए उत्तरदायी है, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं: जनसंख्या जनगणना, प्रतिदर्श पंजीकरण प्रणाली (SRS), नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS), प्रजनन क्षमता और मृत्यु दर से संबंधित विभिन्न अध्ययन।

