संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप।
सामान्य अध्ययन -3: बुनियादी ढाँचा; आपदा प्रबंधन।
संदर्भ: भारत अपनी पुरानी होती जल अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा जलवायु और आपदा जोखिमों के प्रति लचीलेपन में सुधार करने के लिए संरचनात्मक पुनर्वास, तकनीकी आधुनिकीकरण और कानूनी सुधारों के माध्यम से विश्व के सबसे बड़े बाँध पुनर्वास और सुरक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में से एक का संचालन कर रहा है।
भारत में बाँधों की स्थिति
- भारत के पास संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद बड़े बाँधों का विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है, जिसमें 6,628 निर्दिष्ट बाँध शामिल हैं; इनमें 6,545 परिचालन में हैं और 83 निर्माणाधीन हैं।
- इन बाँधों की कुल सकल भंडारण क्षमता लगभग 330 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जिससे ये सिंचाई, जलविद्युत, पेयजल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण और राष्ट्रीय जल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाते हैं।
- भारत के लगभग 98.5% (6,448 बाँध) बाँध राज्य सरकारों के स्वामित्व में हैं, जबकि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के स्वामित्व में 49 बाँध (0.7%), निजी संस्थाओं के स्वामित्व में 36 बाँध (0.6%) और केंद्र सरकार के स्वामित्व में 12 बाँध (0.2%) हैं।
- महाराष्ट्र में निर्दिष्ट बाँधों की संख्या सबसे अधिक है, इसके बाद क्रमशः मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक और ओडिशा का स्थान आता है।
- तमिलनाडु में स्थित भारत का सबसे पुराना बाँध, कल्लनाई (ग्रैंड एनीकट), पिछले लगभग 2,000 वर्षों से कार्य कर रहा है, जो भारत में जल अवसंरचना की चिरस्थायी ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है।
भारत में बाँध अवसंरचना के समक्ष चुनौतियाँ

- पुराना होता बुनियादी ढाँचा:
- भारत के लगभग 26% (1,681) बाँध 50 वर्ष से अधिक पुराने हैं, जिनमें लगभग 291 बाँध ऐसे हैं जो 100 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं, जबकि लगभग 42% बाँध 25-50 वर्ष के आयु वर्ग में आते हैं।
- बाँधों की बढ़ती समयावधि ने संरचनात्मक सुरक्षा, परिचालन दक्षता और रखरखाव की आवश्यकताओं को लेकर चिंताओं को बढ़ा दिया है।
- अवसाद और भंडारण क्षमता में कमी आना:
- केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा 439 जलाशयों के विश्लेषण से पता चलता है कि अवसादन (गाद जमा होने) के कारण उनकी कुल सकल भंडारण क्षमता में औसतन 19% की कमी आई है, जबकि इन जलाशयों की औसत आयु लगभग 42 वर्ष है।
- भंडारण क्षमता में होने वाली औसत वार्षिक हानि लगभग 0.74% अनुमानित है, जो प्रति जलाशय सालाना लगभग 1.81 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) के बराबर है; यह स्थिति सिंचाई, जलविद्युत और बाढ़ नियंत्रण कार्यों को प्रभावित कर रही है।
- जलवायु और जल विज्ञान संबंधित जोखिम:
- परिवर्तित होते जलविज्ञान संबंधी पैटर्न, बढ़ती जलवायु परिवर्तनशीलता, अत्यधिक वर्षा, हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (GLOFs) और भूकंपीय संवेदनशीलताएं, बाँध अवसंरचना के लिए नए परिचालन और सुरक्षा जोखिम उत्पन्न कर रही हैं।
- जलवायु-प्रेरित ऐसे जोखिमों के लिए व्यवस्थित पुनर्वास, बेहतर जलाशय प्रबंधन और उन्नत बाढ़ पूर्वानुमान प्रणालियों की आवश्यकता है।
- आपदा सुभेद्यता: वर्ष 2023 में सिक्किम में अचानक आई बाढ़ (फ़्लैश फ्लड), जिसने चुंगथांग बाँध को अत्यधिक क्षति पहुँचायी थी और वर्ष 2001 में गुजरात में आया भुज भूकंप, जिसने बाँधों की नींव को प्रभावित किया था—जैसी घटनाएं बाँध अवसंरचना और उनके निचले प्रवाह क्षेत्रों में रहने वाली आबादी की बढ़ती आपदा संवेदनशीलता को उजागर करती हैं।
बाँध सुरक्षा के सुदृढ़ीकरण हेतु प्रमुख पहल
- बाँध पुनर्वास और सुधार परियोजना (DRIP) वर्ष 2012 में विश्व बैंक के सहयोग से शुरू की गई DRIP, संरचनात्मक मरम्मत, स्पिलवे) के आधुनिकीकरण, गेटों के सुदृढ़ीकरण और उन्नत निगरानी प्रणालियों के माध्यम से बाँध सुरक्षा और परिचालन प्रदर्शन में सुधार के लिए भारत का एक प्रमुख कार्यक्रम है।
- DRIP को तीन चरणों में कार्यान्वित किया जा रहा है:
- DRIP चरण I (2012-2021) के अंतर्गत सात राज्यों के 223 बाँधों को शामिल किया गया था।
- DRIP चरण II और III वर्ष 2021 से संचालित है और इसके अंतर्गत, 19 राज्यों और तीन केंद्रीय एजेंसियों के 736 बाँधों को कवर होते हैं।
बाँध सुरक्षा अधिनियम, 2021
- बाँध सुरक्षा अधिनियम, 2021 : यह बाँध के खराब होने से जुड़ी आपदाओं को रोकने के लिए निर्दिष्ट बाँधों की निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रखरखाव के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
- यह अधिनियम एक चार-स्तरीय संस्थागत संरचना स्थापित करता है, जिसमें शामिल हैं:
- राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा समिति (NCDS)
- राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA)
- राज्य बाँध सुरक्षा समिति (SCDS)
- राज्य बाँध सुरक्षा संगठन (SDSO)
- यह बाँधों के लिए नियमित निरीक्षण, जोखिम मूल्यांकन, आपातकालीन कार्य योजनाएं, मापन प्रणालियां, अंतर्वाह पूर्वानुमान प्रणाली और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (EWS) को अनिवार्य बनाता है।
प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण और डिजिटल निगरानी
- भारत ने ‘धर्मा’ (DHARMA – डैम हेल्थ एंड रिहैबिलिटेशन मॉनिटरिंग एप्लीकेशन) प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल निरीक्षण रिकॉर्ड, सुरक्षा आकलन और रखरखाव ट्रैकिंग के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित बाँध सुरक्षा प्रबंधन को अपनाया है।
- सभी 6,628 निर्दिष्ट बाँधों को ‘धर्मा’ प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत किया जा चुका है, जबकि डिजिटल रूप से प्रबंधित रिकॉर्ड के साथ सालाना लगभग 13,000 बाँधों का निरीक्षण किया जाता है।
- भारत ने बाँध अवसंरचना से संबंधित भूकंपीय सुरक्षा मूल्यांकन और अनुसंधान को मजबूत करने के लिए MNIT जयपुर में ‘राष्ट्रीय बाँध भूकंपीय सुरक्षा केंद्र’ की भी स्थापना की है।
