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सामान्य अध्ययन-2: भारतीय संविधान-ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

संदर्भ: गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियमावली, 2009 में संशोधन करते हुए नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है, जिसका उद्देश्य भारत के प्रवासी नागरिक (OCI) ढांचे को आधुनिक और डिजिटल बनाना है।

नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 की मुख्य विशेषताएँ

  • OCI फ्रेमवर्क का डिजिटलीकरण: ये नियम पूर्णतः डिजिटल ओसीआई (OCI) प्रणाली का सूत्रपात करते हैं।
    • सभी आवेदन अब ऑनलाइन जमा करने होंगे। पावती भी डिजिटल रूप से जारी की जाएगी। अभिलेखों का रख-रखाव इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया जाएगा।
    • यह पूर्व में आवश्यक भौतिक प्रतियों के दोहरे जमा की अनिवार्यता को समाप्त करता है।
    • OCI कार्ड अब दो स्वरूपों में जारी किए जा सकते हैं। इनमें एक भौतिक कार्ड या इलेक्ट्रॉनिक OCI (e-OCI) शामिल है।
    • OCI कार्डधारकों का एक केंद्रीकृत इलेक्ट्रॉनिक रजिस्टर भी बनाए रखा जाएगा।
  • नाबालिग पासपोर्ट धारकों के लिए नियम: नियम 3 में एक नया परंतुक (proviso) जोड़ा गया है। यह निर्दिष्ट करता है कि कोई भी नाबालिग भारतीय पासपोर्ट धारक होने के साथ-साथ विदेशी पासपोर्ट नहीं रख सकता है।
    • यह दोहरी नागरिकता के विरुद्ध भारत के सिद्धांत को सुदृढ़ करता है।
  • त्याग प्रक्रिया का सरलीकरण: नागरिकता या OCI का त्याग अब OCI पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन दाखिल करना अनिवार्य है। आवेदन संबंधित भारतीय मिशन/पोस्ट या विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) के पास जमा किया जाना चाहिए।
    • यदि भौतिक OCI कार्ड उपलब्ध है, तो उसे भी विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण प्राधिकारी को अभ्यर्पित करना होगा। आवेदन जमा करने के पश्चात, एक इलेक्ट्रॉनिक पावती जारी की जाती है। इसके बाद आवेदक का नाम इलेक्ट्रॉनिक OCI रजिस्टर से हटा दिया जाता है।
  • निरसन तंत्र का सुदृढ़ीकरण: सरकार अब भौतिक OCI कार्ड और ई-OCI (e-OCI) पंजीकरण, दोनों को रद्द कर सकती है। निरसन के आदेशों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा।
    • यदि भौतिक कार्ड वापस नहीं भी किया जाता है, तब भी उसे रद्द माना जा सकता है। यह प्रावधान ‘प्रकल्पित निरसन’ (Deemed Cancellation) की अवधारणा को प्रस्तुत करता है।
  • अपील और समीक्षा तंत्र: एक व्यवस्थित अपील प्रणाली शुरू की गई है। अपील का निर्णय मूल निर्णय लेने वाले अधिकारी से उच्च स्तर के प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा।
    • आवेदकों को अपनी बात रखने का ‘सुनवाई का उचित अवसर’ प्रदान किया जाएगा। नियमों के तहत एक समीक्षा तंत्र भी जोड़ा गया है।
  • बायोमेट्रिक डेटा एकीकरण: आवेदकों को बायोमेट्रिक डेटा संग्रह के लिए सहमति देना अनिवार्य है। इस डेटा का उपयोग ‘फास्ट-ट्रैक’ आव्रजन कार्यक्रमों के लिए किया जा सकता है।
    • यह भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों में स्वचालित नामांकन को भी सक्षम बना सकता है।
  • प्रक्रियात्मक सरलीकरण: नियम दोहरे आवेदन जैसी अनावश्यक आवश्यकताओं को समाप्त करते हैं। डिजिटल प्रोसेसिंग की सुविधा के लिए फॉर्म को अद्यतन किया गया है।
    • समग्र रूप से, ये परिवर्तन स्पष्टता, पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता में सुधार करते हैं।

भारत के प्रवासी नागरिकों (OCI) के बारे में

  • भारत के प्रवासी नागरिक (OCI) योजना को वर्ष 2005 में ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’ में संशोधन के माध्यम से पेश किया गया था। इसका उद्देश्य भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को दीर्घकालिक आव्रजन दर्जा प्रदान करना था, जबकि साथ ही दोहरी नागरिकता के विरुद्ध भारत के रुख को बनाए रखना था।
  • पात्रता: पात्रता उन विदेशी नागरिकों तक विस्तारित है जो 26 जनवरी, 1950 के बाद किसी भी समय भारतीय नागरिक थे, या उस तिथि पर नागरिक बनने के लिए पात्र थे। इसके साथ ही, निर्दिष्ट शर्तों के अधीन उनके वंशज, जिनमें बच्चे, पोते-पोती/नाती-नातिन और परपोते-परपोती शामिल हैं, भी इसके पात्र हैं।
  • योजना का विकास: वर्ष 2015 में ‘भारतीय मूल के व्यक्ति’ (PIO) योजना का OCI के साथ विलय करके इस योजना को सशक्त बनाया गया, जिससे प्रवासी भारतीयों के जुड़ाव के लिए एक एकीकृत ढांचा तैयार हुआ।
  • लाभ: OCI कार्डधारकों को भारत आने के लिए आजीवन बहु-प्रवेश वीजा प्रदान किया जाता है। उन्हें किसी भी अवधि के प्रवास के लिए ‘विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी’ (FRRO) के पास पंजीकरण से छूट दी गई है, और आर्थिक, वित्तीय एवं शैक्षिक मामलों में उन्हें अनिवासी भारतीयों (NRI) के समान अधिकार प्राप्त हैं।

भारत में नागरिकता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 5: यह उन व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान करता है जो भारत के क्षेत्र में अधिवासित हैं और जो भारत में जन्मे थे, जिनके माता-पिता में से किसी का जन्म भारत में हुआ था, या जो संविधान के प्रारंभ से कम से कम पाँच वर्ष पहले से भारत में सामान्य रूप से निवासी रहे हैं।
  • अनुच्छेद 6: यह वंशक्रम, निवास और पंजीकरण की शर्तों के आधार पर पाकिस्तान से आए कुछ प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 7: यह उन व्यक्तियों को नागरिकता से वंचित करता है जिन्होंने 1 मार्च, 1947 के बाद पाकिस्तान के लिए प्रवास किया था, सिवाय उन लोगों के जो एक वैध पुनर्वास परमिट के तहत भारत वापस लौट आए थे।
  • अनुच्छेद 8: यह विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों को भारतीय राजनयिक या कौंसुली प्रतिनिधियों के माध्यम से नागरिक के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति देता है।
  • अनुच्छेद 9: यह उल्लेख करता है कि स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता स्वतः ही समाप्त हो जाएगी।
  • अनुच्छेद 10: यह संसद द्वारा निर्मित विधियों के अधीन नागरिकता की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
  • अनुच्छेद 11: यह संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति के संबंध में विधि बनाने की शक्ति प्रदान करता है, जिसमें नागरिकता अधिनियम, 1955 भी शामिल है।

Sources:
Indian Express
Newsonair
Impriindia
Scconline

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