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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने समुदाय-नेतृत्व वाली योजना और अभिनव वित्तपोषण के माध्यम से जमीनी स्तर पर जैव विविधता शासन को सुदृढ़ करने के लिए एक पांच वर्षीय (2025-2030) परियोजना शुरू की है।
परियोजना के बारे में:
• “जैव विविधता संरक्षण प्रतिबद्धताओं को सुरक्षित करने के लिए संस्थागत क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण” शीर्षक वाली यह परियोजना भारत सरकार, वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की एक संयुक्त पहल है, जिसके लिए 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान दिया गया है।
• इसका उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) में एकीकृत करना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि संरक्षण केवल एक अलग पर्यावरण गतिविधि के बजाय ग्राम-स्तरीय शासन का एक मुख्य घटक बने।
• शासन की संरचना ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण का अनुसरण करती है, जिसमें पंचायती राज संस्थाएं (PRIs) एक केंद्रीय प्रबंधकीय भूमिका निभाती हैं, जिन्हें जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।
• यह परियोजना “होल-ऑफ-गवर्नमेंट” (संपूर्ण सरकार) और “होल-ऑफ-सोसायटी” (संपूर्ण समाज) दृष्टिकोण भी अपनाती है, जो विभिन्न विभागों, संस्थानों और समुदायों के बीच अभिसरण सुनिश्चित करती है।
• यह परियोजना दो पारिस्थितिक रूप से समृद्ध परिदृश्यों पर आधारित है:
- तमिलनाडु (सत्यमंगलम परिदृश्य): यह क्षेत्र पश्चिमी और पूर्वी घाटों के संगम पर स्थित है, जिसमें मुदुमलई टाइगर रिजर्व और सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व शामिल हैं। इस क्षेत्र में वन-सीमावर्ती (forest-fringe) समुदाय रहते हैं जो पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारों, विशेष रूप से हाथियों और बाघों के लिए रक्षक के रूप में कार्य करते आए हैं।
- मेघालय (गारो हिल्स क्षेत्र): इसमें नोकरेक बायोस्फीयर रिजर्व, बालपक्रम राष्ट्रीय उद्यान और सिजू वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। यह सरकारी वनों और आरक्षित वनों का एक मिश्रित रूप (mosaic) बनाता है जहाँ संरक्षण को ग्राम रोजगार परिषदों (VECs) में एकीकृत किया गया है, जो ग्राम पंचायतों के समकक्ष हैं।
• ये परिदृश्य समुदाय-नेतृत्व वाले, परिदृश्य-स्तरीय जैव विविधता शासन मॉडल के लिए पायलट क्षेत्रों के रूप में कार्य करते हैं।
• मुख्य उद्देश्य और रणनीतिक घटक:

- ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) का हरितीकरण (ग्रीनिंग): स्थानीय विकास योजनाओं में जैव विविधता को मुख्यधारा में शामिल करना ताकि समुदाय के स्वामित्व वाले और वित्तपोषित संरक्षण ढांचे तैयार किए जा सकें।
- संस्थागत सुदृढ़ीकरण: पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) की क्षमताओं को बढ़ाना और वन विभागों, राजस्व अधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं नागरिक समाज को शामिल करते हुए बहु-हितधारक मंच स्थापित करना।
- अभिनव वित्तपोषण तंत्र: संरक्षण को स्थायी आजीविका से जोड़ने के लिए ‘पहुंच और लाभ साझाकरण’, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) सह-वित्तपोषण, और हरित सूक्ष्म-उद्यमों को बढ़ावा देना।
- ज्ञान प्रबंधन और प्रतिकृति: राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के मंचों के माध्यम से नवाचारों और सर्वोत्तम अभ्यासों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करना।
- समावेशी शासन: जैव विविधता शासन में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों की आर्थिक और नेतृत्वकारी भूमिकाओं को बढ़ावा देना।
नीति संरेखण और वैश्विक जुड़ाव
• भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP 2024-2030)
• कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के तहत 30×30 लक्ष्य
• पेरिस समझौते के तहत भारत का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)
• राज्य-स्तरीय विज़न जैसे कि तमिलनाडु विज़न 2030 और मेघालय विज़न 2030
महत्व
• वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों को क्रियान्वित करना: समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण और OECMs (अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपाय) के माध्यम से 30×30 लक्ष्य प्राप्त करने हेतु एक व्यावहारिक मॉडल प्रदान करता है।
• पर्यावरण शासन का विकेंद्रीकरण: जैव विविधता को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) में शामिल करना, जिससे 2.6 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को सक्रिय संरक्षण इकाइयों में परिवर्तित किया जा सके।
• जलवायु कार्यवाही पर बल देना: स्थानीय जैव विविधता संरक्षण को राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) और अनुकूलन रणनीतियों के तहत भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं से जोड़ना।
• सतत आजीविका को बढ़ावा देना: ‘पहुंच और लाभ साझाकरण’ (ABS), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) वित्तपोषण और हरित सूक्ष्म-उद्यमों के माध्यम से आर्थिक प्रोत्साहन सुनिश्चित करना।
• मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी: सत्यमंगलम और गारो हिल्स जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील गलियारों में सामुदायिक रक्षक की भूमिका को बढ़ावा देना।
• हाशियाई समुदायों का सशक्तिकरण: जैव विविधता शासन में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समूहों की भागीदारी और नेतृत्व को सुदृढ़ करना।
• स्केलेबल (विस्तार योग्य) शासन मॉडल को सक्षम बनाना: सम्पूर्ण भारत के जिलों में सफल जैव विविधता वित्तपोषण और शासन नवाचारों को संकलित करना और उनकी पुनरावृत्ति करना।
• समावेशी विकास विजन का समर्थन: सतत और सहभागी विकास के माध्यम से संरक्षण को “विकसित भारत” के व्यापक लक्ष्य के साथ संरेखित करना।
