संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

सामान्य अध्ययन -3: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

संदर्भ: भारत और न्यूजीलैंड ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य विस्तारित बाजार पहुंच, उन्नत सेवा सहयोग और निवेश प्रवाह में वृद्धि के माध्यम से द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को प्रगाढ़ करना है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत द्वारा किया गया 7वाँ मुक्त व्यापार समझौता है, जिसमें नवीनतम समझौता दिसंबर 2025 में ओमान के साथ कियागया है।
  • यह FTA न्यूजीलैंड को होने वाले भारतीय निर्यात के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सीमा शुल्क मुक्त या अधिमान्य पहुंच सुनिश्चित करता है, साथ ही यह व्यापक ओशिनिया और प्रशांत द्वीपीय देशों के बाजारों के लिए प्रवेश द्वार के रूप में भी कार्य करता है।
  • दोनों देशों में सभी घरेलू प्रक्रियाओं के पूर्ण होने और अनुसमर्थन के पश्चात यह FTA लागू होगा।

भारतन्यूज़ीलैंड संबंध

  • वस्तु व्यापार: वर्ष 2023-24 के 873 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसमें 49% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • न्यूजीलैंड को वस्तु निर्यात: वर्ष 2024-25 में बढ़कर 711 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो 32% की सकारात्मक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
  • सेवा व्यापार: वर्ष 2024 में न्यूजीलैंड को भारत का सेवा निर्यात 13% बढ़कर 634 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक तक पहुँच गया।
    • प्रमुख क्षेत्रों में यात्रा, आईटी और व्यावसायिक सेवाएँ सम्मिलित हैं।
  • आकार: वर्तमान में, न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
  • मानव संसाधन: न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के व्यक्तियों और अनिवासी भारतीयों (NRIs) की संख्या लगभग 3,00,000 है, जो वहाँ की कुल जनसंख्या का लगभग 5% है।
  • व्यापार संतुलन: वर्तमान में न्यूजीलैंड के साथ भारत का व्यापार संतुलन सकारात्मक है।

भारतन्यूज़ीलैण्ड FTA के मुख्य पहलू

  • टैरिफ की समाप्ति: यह मुक्त व्यापार समझौता न्यूजीलैंड को होने वाले भारत के 100% निर्यात के लिए शुल्क मुक्त पहुंच प्रदान करता है, जिसमें सभी टैरिफ लाइनें सम्मिलित हैं।
  • चरणबद्ध उदारीकरण: भारत ने द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के 95% हिस्से को कवर करने वाली 70.03% टैरिफ लाइनों पर शुल्क उदारीकरण की पेशकश की है, जबकि भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा के लिए 29.97% टैरिफ लाइनों को इससे बाहर रखा गया है।
    • 30% टैरिफ लाइनों पर शुल्क तत्काल समाप्त कर दिया गया है, जबकि शेष को 10 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा।
  • घरेलू सुरक्षा उपाय: भारत में घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा हेतु डेयरी, कॉफी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल, रबर आदि जैसे कई संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है।
  • निवेश: न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश सुगम बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जो विनिर्माण, औद्योगिक बुनियादी ढांचे, सेवाओं और नवाचार जैसे क्षेत्रों को सहायता प्रदान करेगा।
  • सेवा क्षेत्र का उदारीकरण: न्यूजीलैंड ने आईटी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, वित्तीय सेवाओं, पर्यटन और व्यावसायिक सेवाओं सहित लगभग 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुंच प्रदान की है, साथ ही 139 उप-क्षेत्रों में सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र (MFN) की प्रतिबद्धता भी जताई है।
  • श्रम गतिशीलता: यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय पेशेवरों के लिए किसी भी समय अधिकतम 5,000 अस्थायी रोजगार प्रवेश (TEE) वीजा की सुविधा प्रदान करता है, जिसमें आयुष, योग, आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्र सम्मिलित हैं।
  • कार्य वीजा: न्यूजीलैंड ने भारत के लिए छात्र गतिशीलता और पढ़ाई के बाद कार्य हेतु एक समर्पित मार्ग (पाथवे) तैयार किया है।
    • यह भारतीय छात्रों पर लगी सीमा को समाप्त करता है, जिससे वे पढ़ाई के दौरान अंशकालिक कार्य कर सकेंगे। इसके साथ ही, न्यूजीलैंड में STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए तीन वर्ष तक तथा शोधार्थियों (PhD) के लिए चार वर्ष तक का पढ़ाई के बाद कार्य वीजा प्रदान किया जाएगा।
  • नियामक पहुंच: न्यूजीलैंड अन्य उन्नत देशों के समकक्ष नियामकों से प्राप्त उत्कृष्ट विनिर्माण अभ्यास (GMP) और उत्कृष्ट नैदानिक अभ्यास (GCP) निरीक्षण रिपोर्टों को स्वीकार करेगा।
    • इससे दोहरे निरीक्षणों में कमी आएगी और उत्पादों की स्वीकृति में तेजी आएगी, जिससे भारत के फार्मा और चिकित्सा उपकरण निर्यात के लिए बाजार में प्रवेश और विकास सुगम होगा।
  • MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) विकास: यह समझौता वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित MSME-चालित और श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर विशेष बल देता है।
    • संरचित MSME सहयोग के अंतर्गत व्यापार संबंधी जानकारी तक पहुँच, निर्यात तत्परता कार्यक्रम और न्यूजीलैंड के SME (लघु एवं मध्यम उद्यम) इकोसिस्टम के साथ जुड़ाव सम्मिलित है।
  • उत्पत्ति के नियम: यह मुक्त व्यापार समझौता ‘उत्पत्ति के नियम’ का एक सुदृढ़ ढांचा स्थापित करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ केवल वास्तविक निर्यातकों को ही प्राप्त हों।
  • बौद्धिक संपदा (IP) संरक्षण: न्यूजीलैंड ने 18 महीनों के भीतर भौगोलिक संकेतक (GI) कानूनों का विस्तार करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे वाइन और स्पिरिट के अतिरिक्त अन्य भारतीय वस्तुओं का पंजीकरण संभव हो सकेगा।
  • स्वास्थ्य, कल्याण और पारंपरिक चिकित्सा: अपने मुक्त व्यापार समझौतों में पहली बार, न्यूजीलैंड माओरी (Māori) स्वास्थ्य पद्धतियों के साथ-साथ भारत की आयुष (AYUSH) प्रणालियों के लिए समर्पित बाजार पहुंच प्रदान करेगा, जिससे चिकित्सा मूल्य यात्रा और कल्याणकारी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

समझौते का महत्व

  • निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता: सभी उत्पाद श्रेणियों में शून्य-शुल्क पहुँच वस्त्र, इंजीनियरिंग सामान, चमड़ा और विनिर्मित वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला जैसे क्षेत्रों के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देगी।
  • व्यापार विविधीकरण: यह समझौता घरेलू हितों के अनुरूप लक्षित, उच्च गुणवत्ता वाले द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से अपनी व्यापार संरचना को पुनर्गठित करने के भारत के निरंतर प्रयासों को प्रदर्शित करता है।
  • रणनीतिक महत्व: यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को सुदृढ़ करता है और प्रशांत एवं उन्नत बाजारों के लिए एक प्रवेश द्वार है, जिससे भारत की वैश्विक व्यापार स्थिति में वृद्धि होती है।
  • संतुलित उदारीकरण: यह संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों की सुरक्षा करते हुए भारतीय व्यवसायों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में अभूतपूर्व शुल्क मुक्त पहुँच सुनिश्चित करता है।
  • आर्थिक साझेदारी: वस्तु व्यापार से परे, यह समझौता रोजगार को बढ़ावा देता है, कौशल गतिशीलता को सुगम बनाता है और कई क्षेत्रों में व्यापार एवं निवेश-प्रेरित विकास का समर्थन करता है। इस प्रकार, यह एक अधिक समग्र आर्थिक साझेदारी की ओर संकेत करता है।
  • वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVCs) में एकीकरण: व्यापार सुगमीकरण और कम की गई बाधाएं भारतीय फर्मों, विशेष रूप से MSMEs को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत होने में सहायता करेंगी।

SOURCES
PIB
DD News
PIB

Shares: