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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

संदर्भ: अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) द्वारा जारी ‘नवीकरणीय ऊर्जा सांख्यिकी 2026’ के अनुसार, भारत स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुँच गया है।

मुख्य बिंदु

  • ब्राजील को पीछे छोड़ते हुए भारत अब चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर आ गया है।
  • स्थापित क्षमता और वृद्धि: 31 मार्च, 2026 तक भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन स्थापित क्षमता 283.46 गीगावाट (GW) तक पहुँच गई है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा से 274.68 गीगावाट और परमाणु ऊर्जा से 8.78 गीगावाट सम्मिलित है।
    • वर्ष 2014 के बाद से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 3.6 गुना वृद्धि हुई है।
    • वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, देश ने गैर-जीवाश्म क्षमता में 55.3 गीगावाट की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की, जो अब तक की सर्वाधिक वार्षिक वृद्धि है।
    • ऊर्जा मिश्रण में 150.26 गीगावाट के साथ सौर ऊर्जा का अग्रणी स्थान है, इसके पश्चात पवन ऊर्जा (56.09 गीगावाट) और बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं (51.41 गीगावाट) का स्थान है।
    • जैव ऊर्जा का योगदान 11.75 गीगावाट है, जबकि लघु जलविद्युत क्षमता 5.17 गीगावाट है।
    • विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा (DRE) में वित्त वर्ष 2025-26 में 16.3 गीगावाट की वृद्धि हुई, जो मुख्य रूप से रूफटॉप सोलर और पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना के कारण हुई है।
    • बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक वाहन और सौर-आधारित घरेलू प्रणालियों का एकीकरण लगातार बढ़ रहा है।
  • जलवायु लक्ष्यों की समय से पूर्व प्राप्ति: भारत ने जून 2025 में अपनी संचयी स्थापित विद्युत क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया।
  • यह उपलब्धि उसने अपने 2030 के जलवायु लक्ष्य से पाँच वर्ष पूर्व ही प्राप्त कर ली है।
  • भावी लक्ष्य: भारत ने अपनी COP26 प्रतिबद्धता के भाग के रूप में वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट (GW) गैर-जीवाश्म क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।
  • वर्ष 2031-35 के लिए प्रस्तावित लक्ष्यों में उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी, गैर-जीवाश्म स्रोतों से 60% विद्युत क्षमता, और 3.5 से 4 बिलियन टन के कार्बन सिंक का सृजन करना सम्मिलित है।

नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व

  • जलवायु परिवर्तन शमन: नवीकरणीय ऊर्जा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करती है। जैसा कि भारत द्वारा अपने ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC) लक्ष्यों से पूर्व ही स्वच्छ स्रोतों से 50% स्थापित क्षमता प्राप्त करने में देखा गया है, जो मजबूत जलवायु प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: सौर, पवन और जलविद्युत जैसे घरेलू स्रोतों को बढ़ावा देकर, नवीकरणीय ऊर्जा आयातित ईंधन पर निर्भरता को न्यूनतम करती है और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के समय दीर्घकालिक ऊर्जा स्थिरता सुनिश्चित करती है।
  • ग्रामीण विकास और विद्युतीकरण: रूफटॉप सोलर और पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) जैसी विकेंद्रीकृत प्रणालियाँ ग्रामीण विद्युतीकरण सुनिश्चित  करती हैं, कृषि उत्पादकता में सुधार करती हैं और डीजल पर निर्भरता कम करती हैं, जिससे ग्रामीणों की आजीविका में सुधार होता है।
  • तकनीकी प्रगति और नवाचार: नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश से बैटरी स्टोरेज, पेरोव्स्काइट सौर सेल और हरित हाइड्रोजन जैसी तकनीकों में नवाचार को गति मिलती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव विभिन्न उद्योगों पर पड़ता है।
  • वैश्विक प्रतिबद्धताओं के साथ संरेखण: नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार पेरिस समझौते के अंतर्गत भारत के दायित्वों का समर्थन करता है और ‘सतत विकास लक्ष्यों’ जैसे कि स्वच्छ ऊर्जा (SDG 7) और जलवायु कार्रवाई (SDG 13) में योगदान देता है।

प्रमुख चुनौतियाँ और चिंता के क्षेत्र

  • क्षमता-उत्पादन विसंगति: तापीय ऊर्जा क्षमता के 50% से कम होने के बावजूद, निम्न ‘क्षमता उपयोग कारक’ (CUF) तथा सौर एवं पवन ऊर्जा की बाधित प्रकृति के कारण वास्तविक विद्युत उत्पादन में कोयले का योगदान अभी भी लगभग 70–75% है। यह गहन वि-कार्बनीकरण के मार्ग में  संरचनात्मक बाधा उत्पन्न करता है।
  • बाधित आपूर्ति और ग्रिड स्थिरता संबंधी समस्याएँ: नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन मौसम पर निर्भर करता है, जिससे आपूर्ति में उतार-चढ़ाव बना रहता है। यह स्थिति अधिकतम मांग के दौरान (जैसे 2024 में 250 गीगावाट की मांग) और ‘कर्टेलमेंट’ (आपूर्ति कटौती) के कारण कीमतों में होने वाली गिरावट से स्पष्ट हुई, जो ग्रिड संतुलन तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
  • अपर्याप्त ऊर्जा भंडारण अवसंरचना: 160 गीगावाट से अधिक की अनिरंतर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की तुलना में भारत की भंडारण क्षमता 5 गीगावाट से भी कम है। ऊर्जा भंडारण में यह गंभीर अंतराल नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी एकीकरण और विश्वसनीयता को सीमित करता है।
  • आपूर्ति श्रृंखला और अवसंरचनात्मक बाधाएं: बैटरी सामग्री के लिए चीन पर निर्भरता और HVDC ट्रांसफार्मर जैसी प्रमुख तकनीकों में बाधाएँ, भारत को भू-राजनीतिक जोखिमों और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार में बुनियादी ढांचे की बाधाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा प्रगति के लिए जिम्मेदार पहल

  • पीएम सूर्य घर योजना: ‘पीएम सूर्य घर’ योजना ने 23.9 लाख परिवारों को रूफटॉप सौर प्रणाली स्थापित करने में सक्षम बनाया है, जिससे घरेलू स्तर पर ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के साथ-साथ लगभग 7 गीगावाट की विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा क्षमता जुड़ी है।
  • पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना: ‘प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान’ (PM-KUSUM) स्टैंडअलोन पंपों की स्थापना और डीजल पर निर्भरता को कम करके कृषि क्षेत्र के सौरीकरण को गति प्रदान कर रहा है, जिससे किसानों के लिए विश्वसनीय और स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित हो रही है।
  • सौर पार्क विकास कार्यक्रम: 13 राज्यों में लगभग 40 गीगावाट क्षमता वाले 55 सौर पार्कों की स्वीकृति ने बड़े पैमाने पर सौर परिनियोजन को गति दी है, जिससे ग्रिड एकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में ‘इकोनॉमी ऑफ स्केल’ (मितव्ययी अर्थव्यवस्था) को समर्थन मिला है।
  • उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना: ₹24,000 करोड़ की PLI योजना मूल्य श्रृंखला में उत्पादन को प्रोत्साहित करके घरेलू सौर विनिर्माण को क्षमता को बढ़ाती है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है और एक आत्मनिर्भर स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम का निर्माण होता है।
  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM): वर्ष 2023 में प्रारंभ किए गए इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक प्रतिवर्ष 5 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है, जो उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन आयात को कम करते हुए भारत को स्वच्छ ईंधन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
  • हरित हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (2025): यह योजना हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उत्सर्जन मानक निर्धारित करती है, जिससे विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है और वैश्विक हरित हाइड्रोजन बाजारों में भारत के एकीकरण को सुगम बनाया जाता है।
  • वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA): भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान शुरू किया गया यह गठबंधन जैव ईंधन पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने और वैश्विक ऊर्जा संक्रमण के प्रयासों को बल मिलता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): भारत द्वारा सह-स्थापित ISA, वैश्विक सौर वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को संगठित करता है, जिससे विशेष रूप से विकासशील देशों में सस्ती सौर ऊर्जा के विस्तार को सुलभ बनाया जा सके।

Sources: 
PIB
Bussiness World
PIB
Hartek

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