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सामान्य अध्ययन-1 प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं।

सामान्य अध्ययन -3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।

संदर्भ: हाल ही में, 22 मई 2026 को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (IDB) मनाया गया।

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के बारे में:

  • जैव विविधता के संरक्षण और इसके संधारणीय उपयोग के प्रति जागरूकता तथा कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 22 मई को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है।
  • यह दिवस 22 मई 1992 को नैरोबी सम्मेलन के दौरान जैव विविधता अभिसमय (CBD) के पाठ को अपनाए जाने की स्मृति में मनाया जाता है।
  • इस दिवस को वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा घोषित किया गया था और इसका समन्वय ‘जैव विविधता अभिसमय के सचिवालय’ द्वारा किया जाता है।
  • वर्ष 2026 की विषय: वर्ष 2026 के संस्करण का मुख्य विषय “वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना” था। यह विषय वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों को प्राप्त करने में स्थानीय और समुदाय-नेतृत्व वाली कार्रवाइयों के महत्व पर बल देता है।

जैव विविधता अभिसमय (CBD) के बारे में

  • जैव विविधता अभिसमय (CBD) एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जिसे जैव विविधता के संरक्षण, जैविक संसाधनों के संधारणीय (सतत) उपयोग, तथा आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त होने वाले लाभों के निष्पक्ष और न्यायसंगत साझाकरण के उद्देश्य से वर्ष 1992 के ‘रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन’ में अपनाया गया था।
  • यह अभिसमय वर्ष 1993 में लागू हुआ था और वर्तमान में इसके 196 पक्षकार हैं, जिस कारण यह विश्व के  सबसे व्यापक रूप से समर्थित अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय समझौतों में से एक है।
  • पक्षकारों का सम्मेलन (COP) इस अभिसमय का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है। इसका मुख्यालय मॉन्ट्रियल, कनाडा में स्थित है।
  • वर्ष 2022 में आयोजित CBD COP-15 के दौरान ‘कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क’ अपनाया गया था, जो वर्ष 2030 तक जैव विविधता संरक्षण के लिए एक वैश्विक रोडमैप और वर्ष 2050 तक “प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना” का विजन प्रदान करता है।
  • KMGBF निर्धारित करता है:
    • वर्ष 2050 के लिए 4 दीर्घकालिक वैश्विक लक्ष्य, तथा
    • वर्ष 2030 के लिए 23 वैश्विक लक्ष्य जिनमें वैश्विक भूमि और समुद्री क्षेत्रों के 30% हिस्से का संरक्षण करने के लिए “30×30 का लक्ष्य”, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, प्रदूषण में कमी लाना और प्रजातियों के विलोपन को रोकना शामिल हैं।

जैव विविधता संरक्षण के लिए भारत के प्रयास

  • हाल ही में भारत ने जैव विविधता अभिसमय (CBD) को अपनी 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें ‘कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क’ (KMGBF) के तहत वर्ष 2030 के जैव विविधता लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति का आकलन किया गया है।
  • भारत ने अपनी राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) को अपडेट किया है तथा 142 निगरानी संकेतकों द्वारा समर्थित 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य तैयार किए हैं।
  • भारत का वनावरण और वृक्षावरण वर्तमान में 8,27,357 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17% है। वर्ष 2021 और 2023 के बीच इसमें 1,445 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • बॉन चैलेंज के अंतर्गत, भारत ने वर्ष 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर क्षरित भूमि को पुनर्बहाल करने का संकल्प लिया है, जिसमें से लगभग 24.1 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पहले ही बहाल किया जा चुका है या वह बहाली की प्रक्रिया में है।
  • भारत पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, LiFE (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) के माध्यम से संधारणीय जीवन शैली, मैंग्रोव संरक्षण, कृषि-वानिकी और समुदाय-नेतृत्व वाले जैव विविधता अभिशासन को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।

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