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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

संदर्भ: ‘द लैंसेट ऑब्सटेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी एंड विमेंस हेल्थ’ जर्नल में प्रकाशित एक नए वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, 1990 के बाद से 2023 में भारत के मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई है।

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • यह निष्कर्ष ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) स्टडी 2023’ पर आधारित हैं, जो 1990 से 2023 तक 204 देशों और क्षेत्रों में मातृ मृत्यु के रुझानों का व्यापक मूल्यांकन प्रदान करता है।
  • अध्ययन में 10-54 वर्ष की महिलाओं के लिए मातृ मृत्यु और मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) का अनुमान लगाने हेतु उन्नत मॉडलिंग तकनीकों (CODEm) और नागरिक पंजीकरण प्रणाली, घरेलू सर्वेक्षण, जनगणना तथा मातृ मृत्यु ऑडिट जैसे बहु-आयामी डेटा स्रोतों का उपयोग किया गया है।
  • यह सतत विकास लक्ष्य (SDG) 3.1 की दिशा में प्रगति का भी मूल्यांकन करता है, जिसका उद्देश्य 2030 तक वैश्विक MMR को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाना है।

प्रमुख निष्कर्ष

वैश्विक परिदृश्य:

  • वर्ष 2023 में वैश्विक स्तर पर लगभग 2.4 लाख मातृ मृत्यु दर्ज की गईं, जिसमें वैश्विक MMR ~190 (प्रति 1 लाख जीवित जन्म) रहा, जो 1990 में 321 था।
  • 10-54 वर्ष की आयु की महिलाओं में होने वाली कुल मृत्यु में मातृ मृत्यु की हिस्सेदारी 5.5% है।
  • 204 में से 104 देशों ने अभी तक 70 से नीचे MMR का SDG लक्ष्य प्राप्त नहीं किया है।
  • 2000-2015 के दौरान हुए तीव्र सुधारों की तुलना में, 2015 के बाद कई क्षेत्रों में प्रगति धीमी हो गई है या उलट गई है।
  • कोविड-19 महामारी (2020-21) के कारण स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान आने से मातृ मृत्यु में अस्थायी वृद्धि हुई।

भारत का प्रदर्शन:

  • भारत में 2023 में 24,700 मातृ मृत्यु दर्ज की गईं, जिसमें MMR प्रति 1 लाख जीवित जन्मों पर 116 रहा।
  • नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) 2021-23 के अनुसार, भारत का MMR प्रति 1 लाख जीवित जन्मों पर 88 अनुमानित है, जो निरंतर सुधार का संकेत देता है।
  • मातृ मृत्यु दर में वर्ष 1990 के 508 से वर्ष 2023 में 116 तक तीव्र गिरावट (लगभग 80-86% की कमी) आई है, जो वैश्विक औसत गिरावट से अधिक है।
  • प्रगति के बावजूद, भारत अभी भी नाइजीरिया, पाकिस्तान और इथियोपिया के साथ उच्च-भार (high-burden) वाले देशों में शामिल है।

रुझान और क्षेत्रीय असमानताएँ:

  • संस्थागत प्रसव के विस्तार, बेहतर प्रसवपूर्व देखभाल और सरकारी स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कारण 2000 और 2015 के बीच सबसे तीव्र गिरावट देखी गई।
  • हालाँकि, वर्ष 2015 के बाद प्रगति धीमी हो गई है, जो संरचनात्मक और प्रणालीगत चुनौतियों का संकेत देती है।
  • बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों (केरल, तमिलनाडु) और उच्च-भार वाले राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश) के बीच महत्वपूर्ण अंतर बना हुआ है।

मातृ मृत्यु के कारण:

  • अधिकांश मातृ मृत्यु निवारण योग्य कारणों से होती हैं, जिनमें रक्तस्राव (haemorrhage), गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप विकार, संक्रमण (सेप्सिस) और पहले से मौजूद स्थितियों से उत्पन्न जटिलताएँ शामिल हैं।
  • सहायक कारकों में शामिल हैं:
    • देखभाल प्राप्त करने में देरी।
    • स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की निम्न गुणवत्ता।
    • विशेष रूप से निम्न-आय वाली आबादी के बीच असमान पहुँच।

आगे की राह

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों और देखभाल की गुणवत्ता को मजबूत करना।
  • प्रसवपूर्व, आपातकालीन प्रसूति और प्रसवोत्तर सेवाओं तक पहुँच का विस्तार करना।
  • क्षेत्रीय असमानताओं और उच्च जोखिम वाली गर्भधारण स्थितियों का समाधान करना।
  • डेटा की गुणवत्ता और निगरानी प्रणालियों में सुधार।
  • SDG 2030 लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निरंतर निवेश और नीतिगत ध्यान।

मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) कम करने के लिए सरकारी पहल

  • भारत ने MMR को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 100 से नीचे लाने का अपना राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017) का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है और 2030 तक 70 के SDG लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): मातृ और नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए राज्य-विशिष्ट योजनाओं के माध्यम से RMNCAH+N रणनीति को लागू करता है।
  • जननी सुरक्षा योजना (JSY): गरीब और कमजोर महिलाओं के बीच संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देती है।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): गर्भवती महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार का समर्थन करने के लिए नकद प्रोत्साहन प्रदान करती है।
  • जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK): सार्वजनिक सुविधाओं में गर्भवती महिलाओं और बीमार शिशुओं के लिए मुफ्त प्रसव, परिवहन, दवाएं और निदान सुनिश्चित करता है।
  • सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (SUMAN): सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य देखभाल की गारंटी देता है।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA): उच्च जोखिम वाली गर्भधारण पर विशेष ध्यान देते हुए प्रत्येक माह की एक निश्चित तिथि को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल प्रदान करता है।

Sources:
Times Of India
Deccanherald
The Lancet
Economic Time

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