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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: भारतीय रिजर्व बैंक ने ‘पेमेंट्स विजन 2028’ जारी किया है, जो दिसंबर 2028 तक भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम के सुदृढ़ीकरण हेतु एक रणनीतिक रोडमैप को रेखांकित करता है।

अन्य संबंधित जानकारी:

• “भारत के भुगतान सीमांत को आकार देना” विषय पर आधारित यह विज़न दस्तावेज़, भुगतान प्रणालियों में पहुंच के विस्तार से हटकर विश्वास को गहरा करने, लचीलापन लाने और वैश्विक एकीकरण की ओर संक्रमण को दर्शाता है।

• भारत वर्तमान में वैश्विक रियल टाइम डिजिटल लेनदेन का लगभग आधा हिस्सा साझा करता है, जो इसे डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे में एक वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करता है।

• तदनुसार, अब ध्यान निम्नलिखित क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हो गया है:

  • उपयोगकर्ता के विश्वास और सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
  • परिचालन लचीलापन और साइबर सुरक्षा को बढ़ाना।
  • सीमा पार भुगतान की दक्षता में सुधार करना।
  • व्यापार करने में सुगमता और नवाचार को बढ़ावा देना।

• यह विज़न वित्तीय समावेशन, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीकी अनुकूलनशीलता पर भी बल देता है, जिसमें एआई (AI) आधारित प्रणालियों और डेटा-आधारित निगरानी का उपयोग शामिल है।

RBI के पेमेंट्स विजन 2028 के बारे में

• यह भारत की भुगतान और निपटान प्रणालियों के संरचित विकास के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा है, जो उपयोगकर्ता सशक्तिकरण, सुरक्षा, नवाचार और दक्षता पर आधारित है।

• यह 2001 से समय-समय पर जारी किए गए पिछले रोडमैप दस्तावेजों पर आधारित है, जिसमें पिछला विज़न 2025 तक की अवधि को कवर करता था।

• इस ढांचे को हितधारकों के परामर्श से तैयार किया गया है और इसमें अगले तीन वर्षों (2025-2028) के दौरान कार्यान्वित की जाने वाली 15 लक्षित पहलों की रूपरेखा दी गई है।

प्रमुख पहल

• उपयोगकर्ता सशक्तिकरण और धोखाधड़ी की रोकथाम: सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों में एक सार्वभौमिक ‘स्विच ऑन/ऑफ’ सुविधा की शुरुआत।

• अनधिकृत लेनदेन के मामले में एक ‘साझा जिम्मेदारी फ्रेमवर्क’ का प्रस्ताव, जहाँ जारीकर्ता और लाभार्थी दोनों बैंक देयता साझा करेंगे।

• MSME और वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र सहायता: ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) की पूर्ण अंतर-संचालनीयता।

  • निर्यात क्षेत्र के MSME और फैक्टरिंग तंत्र तक इसका विस्तार।

• भुगतान बुनियादी ढांचा नवाचार: बैंक बदलने या विलय के दौरान भुगतान निर्देशों के निर्बाध प्रवासन के लिए ‘पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस’ (PaSS) की शुरुआत।

  • एक मुक्त और अंतर-संचालनीय कार्ड इकोसिस्टम का विकास।

• चेक प्रणाली का आधुनिकीकरण: चेक के डिजाइन और सुरक्षा मानकों की समीक्षा।

  • ‘ई-चेक’ की संभावनाओं की तलाश, जो डिजिटल दक्षता के साथ विश्वसनीयता को जोड़ते हैं।

• सीमा-पार भुगतान सुधार: गति, लागत और पारदर्शिता में सुधार के लिए वैश्विक भुगतान ढांचों की व्यापक समीक्षा।

  • ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007’ (PSSA) और ‘विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999’ (FEMA) के तहत प्राधिकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना।
  • ‘सिंगल-विंडो’ अनुमोदन तंत्र का प्रस्ताव।

• विनियमन और नवाचार: एक ‘स्थायी नियामक सैंडबॉक्स’ के तहत ‘लघु भुगतान प्रणाली प्रदाताओं’ (SPSPs) को मान्यता प्रदान करना।

  • महत्वपूर्ण इकोसिस्टम के खिलाड़ियों (जैसे फिनटेक, मध्यस्थ) को शामिल करने के लिए नियामक दायरे का विस्तार।
  • बेहतर जोखिम ट्रैकिंग के लिए ‘घरेलू कानूनी इकाई पहचानकर्ता’ (DLEI) की शुरुआत।

• प्रौद्योगिकी, डेटा और साइबर सुरक्षा: एआई (AI) सक्षम भुगतान डेटा ढांचे की स्थापना।

  • जोखिम का शीघ्र पता लगाने के लिए ‘साइबर की रिस्क इंडिकेटर्स’ (KRI) का कार्यान्वयन।
  • अनुसंधान, प्रशिक्षण और वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करना।

महत्व

• विश्वास और सुरक्षा को बढ़ावा देना: यह धोखाधड़ी नियंत्रण तंत्र, साझा देयता और लेनदेन-स्तरीय उपयोगकर्ता नियंत्रण के माध्यम से उपभोक्ता विश्वास को बढ़ाता है।

• MSME और ऋण पहुंच को बढ़ावा: TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) की अंतर-संचालनीयता विशेष रूप से छोटे व्यवसायों और निर्यातकों के लिए तरलता और वित्तपोषण पहुंच में सुधार करती है।

• वैश्विक एकीकरण में वृद्धि: सुव्यवस्थित सीमा-पार प्रणालियाँ भारत को अंतरराष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती हैं।

• नवाचार और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन: नियामक सैंडबॉक्स और मुक्त इकोसिस्टम फिनटेक भागीदारी और तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहित करते हैं।

• प्रणालीगत लचीलेपन में सुधार: साइबर सुरक्षा ढांचे और नियामक विस्तार तीव्र डिजिटलीकरण के बीच स्थिरता सुनिश्चित करते हैं।

• डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को गति देना: भुगतान को अधिक सुरक्षित, कुशल और समावेशी बनाकर, यह डिजिटल भुगतान में एक वैश्विक अग्रणी बने रहने की भारत की आकांक्षा का समर्थन करता है।

Sources:
News on Airs
The Hindu
Indian Express
BFSI

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