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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय। 

संदर्भ: हाल ही में, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) वार्षिक रिपोर्ट 2025’ (जनवरी-दिसंबर 2025) जारी की गई।

PLFS की पृष्ठभूमि और उद्देश्य 

• PLFS को वर्ष 2017 में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा लॉन्च किया गया था।

• यह भारत में श्रम बल, रोजगार और बेरोजगारी से संबंधित आँकड़ों का प्राथमिक स्रोत है।

• इसे निम्नलिखित लक्ष्यों के लिए तैयार किया गया था:

  • वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) का उपयोग करते हुए शहरी क्षेत्रों के लिए प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों के तिमाही अनुमान लगाना।
  • ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए सामान्य स्थिति (ps+ss) और वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) दोनों में इन संकेतकों के वार्षिक अनुमान प्रदान करना।

• इससे पूर्व, श्रम बल सर्वेक्षण तिमाही और वार्षिक आधार पर जारी किया जाता था।

• पिछली विज्ञप्तियाँ

  • तिमाही बुलेटिन: दिसंबर 2018 से दिसंबर 2024 की अवधि को कवर करते हुए अब तक 25 बुलेटिन जारी किए जा चुके हैं।
  • वार्षिक रिपोर्ट: जुलाई 2017 से जून 2024 तक की अवधि के लिए अब तक 7 वार्षिक रिपोर्ट जारी की गई हैं, जिनमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के आँकड़े शामिल हैं।

जनवरी 2025 से संशोधित PLFS 

• श्रम बाजार के उच्च-आवृत्ति आँकड़ों की मांग को पूरा करने के लिए, श्रम बल के अनुमानों की आवृत्ति, कार्यक्षेत्र और प्रासंगिकता बढ़ाने हेतु जनवरी 2025 में PLFS के नमूनाकरण डिजाइन को संशोधित किया गया है।

• संशोधित डिजाइन के मुख्य उद्देश्य:

  • अखिल भारतीय स्तर पर वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) का उपयोग करते हुए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए प्रमुख श्रम बाजार संकेतकों — श्रम बल भागीदारी दर (LFPR), श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (WPR) और बेरोजगारी दर (UR) का मासिक अनुमान तैयार करना।
  • PLFS के तिमाही परिणामों में ग्रामीण क्षेत्रों को भी शामिल करना, जिससे CWS ढांचे के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के संयुक्त अनुमान प्राप्त हो सकें।
  • ग्रामीण और शहरी जनसंख्या के लिए सामान्य स्थिति (ps+ss) और CWS दोनों का उपयोग करते हुए रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों के वार्षिक अनुमान प्रदान करना।

• नया नमूनाकरण डिजाइन

  • ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए एक नया घूर्णी पैनल डिजाइन पेश किया गया है।
  • इस पैनल की अवधि 2 वर्ष है, जिसके पश्चात नमूनाकरण ढांचे को अद्यतन किया जाता है।
  • प्रत्येक चयनित परिवार का लगातार चार महीनों में चार बार दौरा किया जाता है।
  • प्रथम दौरा मूल अनुसूची के अनुसार होता है।
  • अगले तीन दौरे पूर्व-निर्धारित ‘पुनर्निर्धारण अनुसूची’ (revisit schedule) के आधार पर होते हैं।
  • 75% प्रथम-चरण नमूनाकरण इकाइयाँ (FSUs) लगातार दो महीनों के लिए जारी रखी जाती हैं।
  • यह व्यवस्था महीने-दर-महीने अनुमानों में निरंतरता और तुलनात्मकता सुनिश्चित करती है।
  • यह संरचना श्रम बाजार की अल्पकालिक गतिशीलता पर नज़र रखने में सक्षम बनाती है।
  • यह आर्थिक झटकों या मौसमी बदलावों के प्रति सर्वेक्षण की संवेदनशीलता और प्रतिक्रियात्मकता को बढ़ाती है।

वार्षिक रिपोर्ट 2025 के मुख्य बिंदु

• श्रम बल संकेतक: वर्ष 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए LFPR का अनुमान 59.3% लगाया गया था।

  • पुरुषों के लिए LFPR 79.1% और महिलाओं के लिए यह 40.0% रही।
  • 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (WPR) का अनुमान 57.4% था।
  • पुरुषों के लिए WPR 76.6% और महिलाओं के लिए यह 38.8% रही।
  • ग्रामीण श्रम बल की भागीदारी सुदृढ़ बनी रही, जहाँ ग्रामीण पुरुष LFPR 80.5% और ग्रामीण महिला LFPR 45.9% दर्ज की गई। इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में भागीदारी का स्तर मोटे तौर पर स्थिर रहा।

• बेरोजगारी की प्रवृत्तियाँ: वर्ष 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर 3.1% रही।

  • पुरुष बेरोजगारी दर में मामूली गिरावट देखी गई, जो वर्ष 2024 के 3.3% से घटकर वर्ष 2025 में 3.1% हो गई जबकि महिला बेरोजगारी दर अपरिवर्तित बनी रही।
  • ग्रामीण बेरोजगारी दर 2.4% दर्ज की गई। इसके विपरीत, शहरी बेरोजगारी दर अपेक्षाकृत अधिक रही, जो 4.8% थी।
  • 15-29 वर्ष के आयु वर्ग के लिए युवा बेरोजगारी दर में गिरावट आई है, जो वर्ष 2024 के 10.3% से घटकर वर्ष 2025 में 9.9% रह गई।
  • ग्रामीण युवा बेरोजगारी दर घटकर 8.3% हो गई जबकि शहरी युवा बेरोजगारी दर घटकर 13.6% रह गई।

• रोजगार की संरचना: स्व-नियोजित श्रमिकों की हिस्सेदारी वर्ष 2024 के 57.5% से घटकर 2025 में 56.2% हो गई है।

  • नियमित वेतनभोगी/अवैतनिक रोजगार श्रेणी में श्रमिकों की हिस्सेदारी वर्ष 2025 में बढ़कर 23.6% हो गई है।
  • आकस्मिक श्रम में लगे श्रमिकों की हिस्सेदारी लगभग स्थिर रही जोकि 20% थी।

• क्षेत्रवार संरचना: कृषि क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी वर्ष 2024 के 44.8% से घटकर 2025 में 43.0% रह गई है।

  • विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी 11.6% से बढ़कर 12.1% हो गई है।
  • सेवा क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी 12.2% से बढ़कर 13.1% हो गई है।

• लैंगिक आयाम: महिलाओं में, 44.4% ने श्रम बल में शामिल न होने का मुख्य कारण ‘बाल देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियों’ को बताया।

  • पुरुषों में, 69.8% ने श्रम बल में न होने का मुख्य कारण ‘शिक्षा’ को बताया।
  • पुरुष श्रमिकों ने स्व-रोजगार, वेतनभोगी रोजगार और आकस्मिक श्रम, तीनों श्रेणियों में महिला श्रमिकों की तुलना में प्रति सप्ताह अधिक घंटे कार्य किया।
  • हालांकि महिलाओं की मजदूरी में उच्च वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन उनकी निरपेक्ष आय अभी भी पुरुष श्रमिकों की तुलना में कम बनी हुई है।

• शिक्षा और कौशल: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए औपचारिक शिक्षा के औसत वर्ष 10.0 वर्ष अनुमानित किए गए। 

  • 25 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए यह 9.8 वर्ष था।
  • लगभग 67.8% जनसंख्या ने कम से कम माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की थी। यह अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों (61.9%) की तुलना में शहरी क्षेत्रों (79.7%) में अधिक था।
  • 15-59 वर्ष की आयु के केवल 4.2% व्यक्तियों ने औपचारिक व्यावसायिक या तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
  • औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों में, पुरुषों की कार्यबल भागीदारी (83.3%) महिलाओं (51.4%) की तुलना में काफी अधिक थी।

NEET और कार्यबल का आकार: 15-29 वर्ष की आयु के लगभग 25.0% व्यक्ति न तो रोजगार में थे, न ही शिक्षा या प्रशिक्षण में।

  • 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के नियोजित व्यक्तियों की कुल संख्या 61.6 करोड़ अनुमानित थी। इस कुल संख्या में 41.6 करोड़ पुरुष और 20.0 करोड़ महिलाएँ शामिल थीं।

Sources:
PIB

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