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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा; संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।

संदर्भ: हाल ही में, स्वच्छ परिवहन पर अंतर्राष्ट्रीय परिषद (ICCT) द्वारा प्रकाशित एक वैश्विक आकलन इस तथ्य पर प्रकाश डालता है कि भारत के राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) लक्ष्यों के पूर्ण कार्यान्वयन से 2050 तक सड़क परिवहन के CO2 समतुल्य उत्सर्जन में तक़रीबन 50% की कमी आ सकती है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • ये निष्कर्ष ‘विज़न 2050’ के चौथे संस्करण का भाग हैं, जो शून्य-उत्सर्जन वाहनों की ओर वैश्विक संक्रमण का ICCT द्वारा किया जाने वाला वार्षिक मूल्यांकन है।
  •  यह अध्ययन 2050 तक वाहनों की बिक्री, ऊर्जा उपयोग और उत्सर्जन पर वर्तमान तथा प्रस्तावित नीतियों के प्रभाव का प्रतिरूपण करता है।
  • यह आगे इस बात पर प्रकाश डालता है कि इस तरह की कटौती भारत के 2070 के शुद्ध-शून्य लक्ष्य में सहायक होगी और जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता को कम करेगी।
  • ICCT के शोधकर्ता इस बात पर जोर देते हैं कि भारत का ईवी (EV) संक्रमण जलवायु और आर्थिक दोनों दृष्टि से एक महत्वपूर्ण अवसर है: सुदृढ़ घरेलू विनिर्माण और सशक्त नीतियां मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ कर सकती हैं, रोजगारों का सृजन कर सकती हैं और वायु की गुणवत्ता में सुधार कर सकती हैं।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

  • उत्सर्जन और ऊर्जा उपयोग: भारत के वर्तमान राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय ईवी (EV) लक्ष्यों को प्राप्त करने से 2050 तक सड़क-परिवहन के CO2-समतुल्य उत्सर्जन में आधी कमी आ सकती है, और इसी प्रकार तरल ईंधन की मांग भी आधी हो सकती है।
  • यह गतिशीलता की मांग में निरंतर वृद्धि करते हुए परिवहन उत्सर्जन वक्र को महत्वपूर्ण रूप से झुका देगा, जिससे परिवहन विकास पेरिस समझौते के तुलनीय मार्गों के अनुरूप हो जाएगा।
  • घरेलू विनिर्माण क्षमता: भारत में बेचे जाने वाले लगभग 80% इलेक्ट्रिक वाहनों का विनिर्माण घरेलू पर होता है, जिस कारण भारत, यूरोपीय संघ (EU) और जापान जैसे देशों के समूह में शामिल है, जहाँ ईवी की मांग काफी हद तक आयात के बजाय स्थानीय उत्पादन द्वारा पूरी की जाती है।
  • यह स्थानीयकरण भारत को एक रणनीतिक लाभ प्रदान करता है: ईवी को बढ़ावा देने से आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, औद्योगिक नीति के लक्ष्यों में सहायता मिल सकती है और देश के भीतर अधिक मूल्यवर्धन सुनिश्चित किया जा सकता है।
  • भावी प्राथमिकता के रूप में भारी मालवाहक वाहन:
  • जहाँ वर्तमान में मुख्य रूप से उपयोग किए जाने वाले दोपहिया, तिपहिया और यात्री वाहन ही ईवी हैं, वहीं ICCT ने भारी मालवाहक वाहनों की अगले चरण के प्रमुख जलवायु अवसर के रूप में पहचान की है।
  • भारत उन कुछ उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है जो ट्रकों और भारी वाहनों (HDVs) के लिए दीर्घकालिक शून्य-उत्सर्जन मार्गों की तलाश कर रहा है, इसलिए माल ढुलाई का विद्युतीकरण हल्के वाहनों से होने वाले लाभ के अतिरिक्त बड़े उत्सर्जन में कटौती कर सकता है।
  • प्राथमिक चालक के रूप में नीति: रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2030 के बाद भारत में तेजी से ईवी अपनाया जाएगा, क्योंकि प्रस्तावित ईंधन-दक्षता मानक, शून्य-उत्सर्जन वाहन (ZEV) लक्ष्य और राज्य की ईवी नीतियां प्रभावी रूप से लागू होंगी, विशेष रूप से दोपहिया, तिपहिया, यात्री कारों और अंततः भारी माल ढुलाई वाहनों में।
  • वैश्विक डीकार्बोनाइजेशन हॉटस्पॉट के रूप में भारत: अपने वाहन बाजार के आकार और बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए, भारत विश्व भर में परिवहन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए सबसे बड़े एकल-देश अवसरों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है।

उत्सर्जन प्रवृत्तियों को प्रभावित करने वाले प्रमुख नीतिगत विकास

  • राष्ट्र-स्तरीय पहल:
  • माल ढुलाई और वाणिज्यिक परिवहन से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ने जुलाई 2025 में हल्के वाणिज्यिक वाहनों (LCVs) तथा मध्यम और भारी वाहनों (MHDVs) के लिए प्रस्तावित ईंधन दक्षता मानक जारी किए।
  •  भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय द्वारा जारी इस परामर्श के तहत 2050 तक भारी वाहनों (HDVs) के लिए 100% शून्य-उत्सर्जन वाहन (ZEV) बिक्री लक्ष्य का प्रस्ताव किया  गया है, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र को डीकार्बोनाइज (कार्बन-मुक्त) करना है।
  • उप-राष्ट्रीय पहल:
  • दिल्ली सरकार – दिल्ली ईवी नीति 2.0 (प्रस्तावित मार्च 2025): इसका लक्ष्य 2027 तक नए वाहन पंजीकरणों में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (BEVs), मजबूत हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों (PHEVs) की 95% हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।
  • आंध्र प्रदेश सरकार: अपने राज्य ईवी रोडमैप के हिस्से के रूप में, इसका लक्ष्य 2029 तक 2,30,000 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण करना है।
  • मध्य प्रदेश सरकार: राज्य ने दोपहिया और तिपहिया वाहनों, यात्री कारों और बसों के लिए विशिष्ट बिक्री हिस्सेदारी लक्ष्य निर्धारित किए हैं जिन्हें 2030 तक प्राप्त किया जाना है।

Source:
Indian Express
DowntoEarth
Theicct

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