संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास; सूचना प्रौद्योगिकी,अंतरिक्ष और कम्यूटर के क्षेत्र में जागरूकता।
संदर्भ: हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से एक ही लॉन्चर से बहुत कम समय अंतराल में दो मिसाइलें प्रक्षेपित ‘प्रलय’ मिसाइल का सफल ‘साल्वो लॉन्च’ किया।
अन्य संबंधित जानकारी
- उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के दौरान किए गए साल्वो लॉन्च के उड़ान परीक्षणों से पता चला कि दोनों मिसाइलों ने सटीक रूप से अपने निर्धारित प्रक्षेपवक्र का अनुसरण किया और मिशन के सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
- साल्वो (Salvo) का अर्थ है एक ही लक्ष्य या क्षेत्र पर मिसाइल, रॉकेट या आर्टिलरी जैसे कई हथियारों को एक साथ या बहुत कम समय अंतराल में प्रक्षेपित करना।
- मिसाइल के प्रदर्शन का सत्यापन एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर के ट्रैकिंग सेंसरों द्वारा किया गया, जबकि प्रहार बिंदु के पास तैनात जहाजों पर मौजूद ऑनबोर्ड टेलीमेट्री के माध्यम से मिसाइल के अंतिम चरण (Terminal Events) की पुष्टि की गई।
प्रलय मिसाइल के बारे में
- इसे विशेष रूप से पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम (40-80 किमी रेंज) और लंबी दूरी की परमाणु-क्षम अग्नि श्रृंखला के बीच के सामरिक अंतराल (Tactical Gap) को भरने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- प्रलय परियोजना को भारत सरकार द्वारा मार्च 2015 में लगभग ₹332.88 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी गई थी।
- मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण 22 दिसंबर, 2021 को किया गया था, जिसके बाद अगले ही दिन भारी पेलोड और विभिन्न रेंज को प्रमाणित करने के लिए दूसरा परीक्षण किया गया।
- प्रलय मिसाइल को भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के ‘पृथ्वी रक्षा वाहन’ (PDV) नामक एक्सो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्टर मिसाइल स्वदेशी ‘प्रहार’ मिसाइल की उन्नत तकनीकों को मिलाकर विकसित किया गया है।

मुख्य विशेषताएँ
- प्रलय एक ठोस-प्रणोदक, कम दूरी की, अर्ध-बैलिस्टिक, सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, जो उच्च सटीकता सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणालियों से लैस है।
- बैलिस्टिक मिसाइलें, मिसाइलों की वह श्रेणी हैं जो वारहेड (हथियार) ले जाने के लिए प्रक्षेप्य गति का उपयोग करती हैं। अपने धनुषाकार प्रक्षेपवक्र के दौरान, बैलिस्टिक मिसाइलों को उनकी प्रारंभिक यात्रा में शक्ति (ईंधन) दी जाती है, लेकिन बाद में वे गुरुत्वाकर्षण द्वारा संचालित पथ पर चलती हैं।
- अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइलें, मिसाइलों की ऐसी श्रेणी हैं जिनका निम्न प्रक्षेपवक्र होता है और वे बैलिस्टिक पथ पर चलती हैं, लेकिन यदि आवश्यक हो, तो वे उड़ान के दौरान अपना मार्ग बदल सकती हैं और पैंतरेबाज़ी कर सकती हैं।
- यह मिसाइल कई प्रकार के वारहेड ले जाने और विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है, जिससे सशस्त्र बलों का परिचालन लचीलापन बढ़ता है।
- इस मिसाइल को रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद द्वारा अन्य DRDO प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित किया गया है।
Source :
DD News
PIB
Indian Express
CSIS
