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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।

संदर्भ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने नई दिल्ली में 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ को और बढ़ाने के लिए कई समझौतों को अपनाया गया।

16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बारे में

  • यह शिखर सम्मेलन जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की 1-3 जुलाई 2026 तक भारत की पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान आयोजित किया गया।
  • दोनों नेताओं ने 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन (2025) के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की और विशेष रणनीतिक तथा वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
  • शिखर सम्मेलन में भविष्य के सहयोग के लिए तीन प्राथमिकता वाले स्तंभों की पहचान की गई:
  • रक्षा और सुरक्षा सहयोग
    • आर्थिक साझेदारी (जिसमें आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा लचीलापन, प्रौद्योगिकी और नवाचार शामिल हैं)
    • जन संपर्क
  • भारत ने जापान के अद्यतन ‘मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत’ (Free and Open Indo-Pacific – FOIP) दृष्टिकोण का स्वागत किया, जो भारत की ‘हिंद-प्रशांत महासागर पहल’ (IPOI) और ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विजन के अनुरूप है।

16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम:

  • रक्षा और सुरक्षा:
    • वर्ष 2026 में टोक्यो में चौथी ‘भारत-जापान 2+2 मंत्रिस्तरीय बैठक’ आयोजित करने पर सहमति बनी।
    • अभ्यासों, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness – MDA), रखरखाव, मरम्मत और संचालन (MRO) तथा ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा सहयोग का विस्तार करने का निर्णय लिया गया।
    • यूनिकॉर्न (UNICORN – यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडिओ एंटीना) परियोजना पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बनी।
  • आर्थिक सुरक्षा और व्यापार:
    • सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों, आईसीटी (एआई सहित), स्वच्छ ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स में सहयोग को कवर करते हुए ‘आर्थिक सुरक्षा पर भारत-जापान संयुक्त घोषणा’ को अपनाया गया।
    • लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) की समीक्षा में तेजी लाने और 10 ट्रिलियन येन के निवेश लक्ष्य की दिशा में प्रगति जारी रखने पर सहमति बनी।
    • ‘भारत-जापान SME फोरम’ की शुरुआत की गई और ‘जापान-भारत स्टार्टअप सपोर्ट इनिशिएटिव’ (JISSI) के तहत स्टार्टअप और MSME सहयोग का विस्तार किया गया।
    • वित्तीय विनियमन, पर्यवेक्षण, फिनटेक (FinTech), रेगटेक (RegTech) और वित्तीय बाजार की सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान में सहयोग को मजबूत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) और जापान की वित्तीय सेवा एजेंसी (JFSA) के बीच पत्रों का आदान-प्रदान हुआ।
  • ऊर्जा सहयोग: ‘ऊर्जा लचीलापन’ पर संयुक्त वक्तव्य अपनाया गया और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, समुद्री ऊर्जा परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सहयोग करने पर सहमति बनी।
    • भारत के 1,000 बायोगैस और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने के लक्ष्य का समर्थन करने के लिए ‘भारत-जापान सहकारी बायोगैस फॉर ग्रोथ (CBG) पहल’ शुरू की गई।
    • बैटरियों पर समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए और हरित हाइड्रोजन, स्वच्छ अमोनिया, सोलर पीवी (Solar PV) और परमाणु ऊर्जा में सहयोग की पुष्टि की गई।
  • प्रौद्योगिकी और नवाचार: एआई (AI) सहयोग पर ‘भारत-जापान संयुक्त बयान’ अपनाया गया और उद्घाटन ‘भारत-जापान एआई रणनीतिक संवाद’ आयोजित किया गया।
    • IndiaAI मिशन–METI, लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs), इंटरनेट गवर्नेंस (NIXI–JPNIC), फार्मास्यूटिकल्स एवं चिकित्सा उपकरण, भूविज्ञान और महत्वपूर्ण खनिजों, तथा जीवन विज्ञान अनुसंधान (RIKEN साझेदारी) पर समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
    • क्वांटम प्रौद्योगिकियों और LUPEX मिशन में सहयोग का स्वागत किया गया।
  • बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी: मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना और भारत के 7,000 किलोमीटर के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विजन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।
    • रेलवे, ऑटोमोबाइल, विमानन, जहाज निर्माण, बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स और शहरी विकास को कवर करने वाली ‘नेक्स्ट जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप’ (NGMP) पर हस्ताक्षर किए गए।
    • जापान समर्थित मेट्रो, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बागवानी परियोजनाओं में हुई प्रगति का स्वागत किया गया।
  • जन संपर्क और क्षेत्रीय सहयोग: राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्ष 2027 को ‘भारत-जापान ईयर ऑफ शेयर्ड होराइजन्स’ (India-Japan Year of Shared Horizons) घोषित किया गया।
    • शिक्षा, पर्यटन, जापानी भाषा, विज्ञान आदान-प्रदान और राज्य-प्रान्त साझेदारी में सहयोग का विस्तार किया गया।
    • क्वाड (Quad), आसियान (ASEAN), बिम्सटेक (BIMSTEC) के माध्यम से सहयोग की पुष्टि की गई, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों का समर्थन किया गया और आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा की गई।
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