संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।

सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: सहकारिता मंत्रालय ने अपनी स्थापना के 6 जुलाई 2026 को पाँच वर्ष पूर्ण कर लिए हैं, जो “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण के तहत भारत के सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए किए गए व्यापक सुधारों को रेखांकित करता है।

अन्य संबंधित बिंदु

  • सहकारिता मंत्रालय का पाँचवाँ स्थापना दिवस नई दिल्ली के भारत मंडपम में मनाया गया। इस अवसर पर डिजिटल शासन को गति प्रदान करने के लिए 50,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को ई-पीएसीएस (e-PACS) में रूपांतरित किया गया।
  • इस कार्यक्रम के दौरान 47 सहकारी अनाज भंडारण गोदामों की आधारशिला रखी गई। शहरी सहकारी बैंकों के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के दुग्ध आपूर्ति समीक्षा डैशबोर्ड का अनावरण किया गया। साथ ही, दो डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म—सहकार सीबीएस (Sahakar CBS) और सहकार सहयोगी—लॉन्च किए गए।

प्रमुख सुधार एवं उपलब्धियाँ (2021–2026)

  • प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का डिजिटल रूपांतरण: 50,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को ई-प्राथमिक कृषि ऋण समितियों में रूपांतरित किया गया है।
    • PACS के कंप्यूटरीकरण हेतु योजना का विस्तार किया गया, जिसमें वित्तीय आवंटन को 2022 के ₹2,516 करोड़ से बढ़ाकर 2025 में ₹2,925.39 करोड़ कर दिया गया।
    • कुल 79,630 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को कंप्यूटरीकरण के लिए स्वीकृति प्रदान की गई, जिनमें से 63,428 समितियाँ ‘एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग’ (ERP) सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही हैं।
    • 65,000 से अधिक समितियों को हार्डवेयर उपलब्ध कराया गया है, जबकि 42,700 से अधिक समितियों का ऑनलाइन ऑडिट पूर्ण हो चुका है।
    • ‘एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग’ (ERP) सॉफ्टवेयर को 14 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है।
  • प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का बहु-सेवा केंद्रों के रूप में सुदृढ़ीकरण: देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मॉडल उप-नियमों को अपनाया गया है, जिससे प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियाँ करने की अनुमति मिल गई है।
    • इन समितियों की सेवाएं अब ग्रामीण ऋण से आगे बढ़कर पीएम किसान समृद्धि केंद्रों, सामान्य सेवा केंद्रों (CSC), जन औषधि केंद्रों, खुदरा ईंधन आउटलेट्स, भंडारण सुविधाओं, स्वास्थ्य देखभाल और डिजिटल सेवाओं तक विस्तृत हो गई हैं।
    • वर्तमान में 39,177 समितियाँ ‘पीएम किसान समृद्धि केंद्रों’ के रूप में और 54,117 समितियाँ ‘सामान्य सेवा केंद्रों’ के रूप में कार्य कर रही हैं।
    • कुल 4,248 समितियों को ‘जन औषधि केंद्रों’ के लिए स्वीकृति मिली है, जिनमें से 843 संचालन के लिए तैयार हैं। 394 समितियों ने ‘खुदरा ईंधन आउटलेट्स’ के लिए आवेदन किया है, जिनमें से तीन आउटलेट कार्यशील हो चुके हैं।
  •  सहकारी नेटवर्क का विस्तार: कुल 37,454 नई बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों, डेयरी और मत्स्य पालन सहकारी समितियों का पंजीकरण किया गया है।
    • सहकारी संस्थाओं की व्यापक पहुँच सुनिश्चित करते हुए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के माध्यम से 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों तक विस्तार हुआ है। डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से 87,159 ग्राम पंचायतों को कवर किया गया है। मत्स्य पालन सहकारी समितियों के माध्यम से 29,964 ग्राम पंचायतों तक पहुँच सुनिश्चित की गई है।
  • ग्रामीण अवसंरचना विकास: 47 अनाज भंडारण गोदामों की आधारशिला रखी गई है।
    • विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत, 145 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों ने 68,702 मीट्रिक टन से अधिक क्षमता वाले सहकारी गोदामों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया है।
    • इस पहल का मुख्य उद्देश्य फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना है।
  • किसान उत्पादक संगठन (FPOs): सहकारी क्षेत्र में कुल 1,863 किसान उत्पादक संगठन स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 1,117 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के माध्यम से और 1,070 मत्स्य पालन किसान उत्पादक संगठन शामिल हैं। इन संगठनों को 98 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
  • कर एवं वित्तीय सुधार
    • 1 करोड़ रुपये से 10 करोड़ रुपये के बीच आय अर्जित करने वाली सहकारी समितियों के लिए अधिभार को 12% से घटाकर 7% कर दिया गया है, जबकि न्यूनतम वैकल्पिक कर को 18.5% से घटाकर 15% कर दिया गया है।
    • नकद निकासी पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये कर दी गई है।
    • प्राथमिक कृषि ऋण समितियों और प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों के लिए उच्च नकद लेनदेन सीमा का प्रावधान किया गया है।
  • श्वेत क्रांति 2.0
    • श्वेत क्रांति 2.0 का उद्देश्य 2028-29 तक दुग्ध खरीद में 50% की वृद्धि करना है।
    • कुल 25,282 डेयरी सहकारी समितियाँ पंजीकृत की गई हैं, जिसमें महिला-नेतृत्व वाली डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • राष्ट्रीय बहु-राज्य सहकारी संस्थाएँ: तीन नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की स्थापना की गई है:
    • नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCEL) ने 38 देशों को 6,295 करोड़ रुपये मूल्य का 15.4 लाख मीट्रिक टन निर्यात किया है।
    • नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड के 14,286 सदस्य सहकारी समितियाँ हैं, जबकि भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की 38,665 सदस्य सहकारी समितियाँ हैं।
  • क्षमता निर्माण
    • भारत का पहला सहकारी विश्वविद्यालय, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय, आनंद, गुजरात में स्थापित किया गया है।
  • सहकारी वित्तपोषण
    • वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) ने 1.55 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी दी और 1.27 लाख करोड़ रुपये का वितरण किया।
    • इसने किसान उत्पादक संगठनों और क्लस्टर-आधारित व्यावसायिक संगठनों को 2,320 करोड़ रुपये जारी किए।
  • भारत टैक्सी (Bharat Taxi)
    • ‘भारत टैक्सी’ भारत का पहला सहकारी-आधारित मोबिलिटी प्लेटफॉर्म है।
    • इसमें 6.37 लाख पंजीकृत ड्राइवर और 35.77 लाख पंजीकृत ग्राहक हैं।

महत्व

  • यह ग्रामीण भारत में सहकारी शासन को सुदृढ़ करने और जमीनी स्तर की संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक है।
  • विविध पीएसीएस (PACS) के माध्यम से किफायती ऋण, भंडारण, स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल सेवाओं और बाजारों तक पहुँच में सुधार करता है।
  • डिजिटलीकरण और ईआरपी-आधारित (ERP-based) शासन के माध्यम से पारदर्शिता और कार्यक्षमता में वृद्धि करता है।
  • भंडारण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार पहुँच सुनिश्चित करके किसानों की आय को बढ़ाने में मदद करता है।
  • कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन और मोबिलिटी सेवाओं जैसे सहकारी-नेतृत्व वाले उद्यमों के माध्यम से रोजगार के नए अवसरों का सृजन करता है।
  • डेयरी सहकारी समितियों और ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देता है।
  • “सहकार से समृद्धि” के माध्यम से समावेशी, सतत और ग्रामीण-संचालित विकास में योगदान देता है, जो ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को बल प्रदान करता है।
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