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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: देश में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में संपन्न ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में सर्वोत्तम पद्धतियों और नवाचारों पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन’ में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) 2.0 दिशानिर्देश जारी किए हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK)के बारे में
- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) का उद्देश्य शीघ्र जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार के माध्यम से बच्चों के जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करना है।
- वित्तीय राहत: यह बीमारी के बोझ और चिकित्सा पर होने वाले व्यक्तिगत व्यय को कम करने पर केंद्रित है।
- कवरेज: यह कार्यक्रम जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों को कवर करता है, जिससे जीवन के विभिन्न चरणों में देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित होती है। जांच सामुदायिक और संस्थागत स्तरों पर की जाती है।
- 4Ds दृष्टिकोण: RBSK चार श्रेणियों पर आधारित है—जन्म दोष, बीमारियाँ, कमियाँ, और विकासात्मक देरी । इसमें लगभग 32 सामान्य स्वास्थ्य स्थितियों की जांच शामिल है।
- जांच तंत्र: जांच प्रसव केंद्रों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों में की जाती है। आशा (ASHA) कार्यकर्ता भी HBNC/HBYC कार्यक्रमों के तहत नवजात शिशुओं की जांच करती हैं।
- उपचार और रेफरल: स्वास्थ्य समस्याओं वाले बच्चों को निदान और उपचार के लिए जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्रों (DEICs) में भेजा जाता है। गंभीर मामलों को पैनल में शामिल निजी अस्पतालों सहित तृतीयक देखभाल केंद्रों से जोड़ा जाता है।
- निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ: सर्जरी सहित सभी सेवाएँ निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। यह समय पर उपचार सुनिश्चित करता है और परिवारों पर वित्तीय बोझ को कम करता है।
- कार्यक्रम की पहुँच: वित्तीय वर्ष 2014-15 से अब तक लगभग 160.82 करोड़ बच्चों की जांच की जा चुकी है। लगभग 5.63 करोड़ बच्चों ने माध्यमिक या तृतीयक देखभाल उपचार प्राप्त किया है।
RBSK 2.0 दिशानिर्देश
- विस्तारित कार्यक्षेत्र: RBSK 2.0 गैर-संचारी रोगों (NCDs), मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों और व्यवहार संबंधी विकारों को शामिल करके ‘4Ds’ ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करता है। यह बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में उभरती नई चुनौतियों को दर्शाता है।
- जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण: यह कार्यक्रम अब जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के व्यापक, जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण पर बल देता है। यह छिटपुट हस्तक्षेपों के बजाय निरंतर देखभाल सुनिश्चित करता है।
- बेहतर जांच: जांच के दायरे में अब विकासात्मक विकार, मानसिक स्वास्थ्य स्थितियाँ और गैर-संचारी रोगों (NCD) के जोखिम कारक भी शामिल हैं। मोबाइल स्वास्थ्य टीमें स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में अपनी पहुँच जारी रखेंगी।
- सुदृढ़ रेफरल प्रणाली: स्पष्ट रेफरल मार्ग जांच से लेकर उपचार तक का सुगम परिवर्तन सुनिश्चित करते हैं। एक ट्रैकिंग प्रणाली ‘ड्रॉपआउट’ (बीच में उपचार छोड़ना) को कम करती है और अनुवर्ती देखभाल सुनिश्चित करती है।
- डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण: दिशानिर्देशों में डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड, वास्तविक समय डेटा प्रणाली और एकीकृत प्लेटफॉर्म पेश किए गए हैं। ये निगरानी, दक्षता और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार करते हैं।
- बहु-क्षेत्रीय अभिसरण: यह कार्यक्रम स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास क्षेत्रों के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है। स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र मुख्य सेवा वितरण केंद्रों के रूप में कार्य करते हैं।
