संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: – सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
सामान्य अध्ययन-3: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।
संदर्भ: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने ‘भारत में अपराध 2024’ और ‘भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्या (ADSI) 2024’ रिपोर्ट जारी की है, जो अपराध दर में समग्र गिरावट के साथ-साथ साइबर अपराध, सामाजिक-आर्थिक संकट से जुड़ी आत्महत्याओं और मादक द्रव्यों (ड्रग) के अत्यधिक सेवन से होने वाली मौतों में तीव्र वृद्धि पर प्रकाश डालती है।
रिपोर्ट के बारे में
- ‘भारत में अपराध’ रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का एक वार्षिक प्रकाशन है।
- यह भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय दंड संहिता (IPC) और विशेष एवं स्थानीय कानूनों (SLLs) के तहत पंजीकृत संज्ञेय अपराधों (Cognisable Crimes) पर राष्ट्रव्यापी डेटा संकलित करती है।
- यह रिपोर्ट महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SCs/STs) के विरुद्ध अपराध, साइबर अपराध, आर्थिक अपराध, किशोरों, वरिष्ठ नागरिकों, मानव तस्करी और राज्य के विरुद्ध अपराधों पर विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराती है।
- इसके साथ ही, ‘भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्या (ADSI) 2024’ रिपोर्ट आत्महत्याओं, आकस्मिक मृत्यु, मादक द्रव्यों के अत्यधिक सेवन से होने वाली मौतों और मृत्यु दर से जुड़े सामाजिक-आर्थिक पैटर्न पर डेटा प्रस्तुत करती है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

- समग्र अपराध प्रवृत्तियाँ: वर्ष 2024 में कुल 58.85 लाख संज्ञेय अपराध पंजीकृत किए गए, जिनमें वर्ष 2023 के 62.41 लाख मामलों की तुलना में 6% की गिरावट दर्ज की गई है।
- राष्ट्रीय अपराध दर 448.3 से घटकर प्रति लाख जनसंख्या 418.9 मामले हो गई है।
- कुल अपराधों में आईपीसी/बीएनएस (IPC/BNS) के तहत दर्ज अपराध 60.2% थे, जबकि विशेष और स्थानीय कानूनों (SLL) के मामलों 39.8% थे।
- साइबर अपराध: साइबर अपराध के मामलों में 17.9% की वृद्धि हुई। ऐसे मामले वर्ष 2023 के 86,420 मामलों से बढ़कर 2024 में 1,01,928 हो गए।
- धोखाधड़ी (फ्रॉड) साइबर अपराधों का मुख्य उद्देश्य रहा, जो कुल मामलों का 72.6% था।
- यौन शोषण और जबरन वसूली अन्य प्रमुख श्रेणियां रहीं।
- महिलाओं के विरुद्ध अपराध: महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 1.5% की मामूली गिरावट आई। वर्ष 2024 में ऐसे 4.41 लाख मामले दर्ज किए गए।
- “पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता” सबसे बड़ी श्रेणी बनी रही, इसके बाद अपहरण और शील भंग करने के इरादे से किए गए हमलों का स्थान रहा।
- तेलंगाना में महिलाओं के विरुद्ध अपराध की दर सर्वाधिक रही, जबकि महानगरीय शहरों में दिल्ली में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई।
- चंडीगढ़ में देश की सर्वाधिक बलात्कार अपराध दर दर्ज की गई।
- बच्चों के विरुद्ध अपराध: बच्चों के विरुद्ध अपराधों में 5.9% की वृद्धि हुई और इससे संबंधित 1,87,702 मामले पाए गए।
- बच्चों के अपहरण और व्यपहरण तथा ‘पॉक्सो’ (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज अपराधों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही।
- लापता बच्चों के मामलों में 7.8% की वृद्धि हुई, जहाँ वर्ष 2024 में 98,375 बच्चों के लापता होने की सूचना मिली।
- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अत्याचार: अनुसूचित जातियों के विरुद्ध अपराधों में 3.6% की गिरावट आई और इससे संबंधित मामले घटकर 55,698 रह गए।
- अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध अपराधों में 23.1% की तीव्र गिरावट दर्ज की गई और ऐसे अपराधों के 9,966 मामले दर्ज किए गए।
- उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जातियों (SCs) के विरुद्ध सर्वाधिक अपराध दर्ज किए गए, जबकि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों (STs) के विरुद्ध सर्वाधिक अपराध दर्ज किए गए।
- आर्थिक और अन्य अपराध: आर्थिक अपराधों में 4.6% की वृद्धि हुई और यह 2,14,379 मामलों तक पहुँच गए, जिसका मुख्य कारण जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले रहे।
- राज्य के विरुद्ध अपराधों में 6.6% की वृद्धि दर्ज की गई, जिनमें अधिकांश मामले ‘सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम’ और यूएपीए (UAPA) के तहत पंजीकृत किए गए।
- मानव तस्करी के मामलों में 2.2% की मामूली गिरावट आई, हालांकि 6,000 से अधिक पीड़ितों की तस्करी की सूचना मिली।
- किशोर और वरिष्ठ नागरिक: कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों से जुड़े मामलों में 11.2% की वृद्धि हुई, जिनमें अधिकांश किशोर 16-18 वर्ष के आयु वर्ग के थे।
- वरिष्ठ नागरिकों के विरुद्ध अपराधों में 16.9% की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई, जिनमें चोरी और धोखाधड़ी/जालसाजी प्रमुख अपराध रहे।
आत्महत्या और मादक द्रव्यों के अत्यधिक सेवन से होने वाली मौतें (ADSI रिपोर्ट)
- भारत में वर्ष 2024 में आत्महत्या के 1,70,746 मामले दर्ज किए गए।
- कुल आत्महत्याओं में दिहाड़ी मजदूरों की हिस्सेदारी लगभग 31% रही।
- कृषि क्षेत्र में आत्महत्या के 10,546 मामले दर्ज किए गए, जिनमें किसान/काश्तकार और कृषि श्रमिक शामिल हैं।
- 14,488 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की, जबकि 22,113 गृहणियों की मृत्यु आत्महत्या के कारण हुई।
- मादक द्रव्यों (ड्रग) के अत्यधिक सेवन से होने वाली मौतों में लगभग 50% की वृद्धि हुई, जो 2023 के 650 से बढ़कर 2024 में 978 हो गई।
- मादक द्रव्यों के अत्यधिक सेवन से सर्वाधिक मौतें तमिलनाडु में दर्ज की गईं।

