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सामान्य अध्ययन-2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह; भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार; भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव, प्रवासी भारतीय।
संदर्भ: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी नॉर्वे यात्रा के दौरान ओस्लो में नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस अवसर पर दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत किया।
अन्य संबंधित जानकारी
• यह यात्रा पिछले 43 से अधिक वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी।

• गौरतलब है कि तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के आयोजन के अवसर पर भारत और पांच नॉर्डिक देश अर्थात नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड एक साथ एक मंच पर आए और इसी दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत किया।
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत-नॉर्वे संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए नॉर्वे के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से भी सम्मानित किया गया।
• भारत और नॉर्वे ने एक संयुक्त वक्तव्य अपनाया, जिसमें जलवायु कार्रवाई, समुद्री मामलों, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, सतत विकास और बहुपक्षीय शासन में विस्तारित सहयोग की रूपरेखा तैयार करना शामिल है।
यात्रा के मुख्य परिणाम
• द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत करना
- भारत और नॉर्वे ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत किया, जो जलवायु कार्रवाई, ऊर्जा संक्रमण, हरित नौवहन, सतत अवसंरचना, चक्रीय अर्थव्यवस्था और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है।
- दोनों देशों ने अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को लागू करने में सहयोग को और बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
• आर्थिक और व्यापार सहयोग
- दोनों पक्षों ने भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) के लागू होने का स्वागत किया; इससे नॉर्वे सहित भारत और EFTA (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- नवीकरणीय ऊर्जा, समुद्री उद्योगों, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण, अपतटीय ऊर्जा और सतत मूल्य श्रृंखलाओं में सहयोग के विस्तार पर चर्चा की गई।
• समुद्री और नीली अर्थव्यवस्था सहयोग
- नॉर्वे औपचारिक तौर से ‘हिंद-प्रशांत महासागर पहल’ (IPOI) में शामिल हो गया है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, महासागर शासन, सतत मत्स्य पालन और नीली अर्थव्यवस्था के विकास में भारत-नॉर्वे सहयोग को सुदृढ़ करता है।
- दोनों देशों ने हरित नौवहन, समुद्री रसद, अपतटीय पवन ऊर्जा और सतत महासागर संसाधन प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।
• विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार
- भारत और नॉर्वे उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्रौद्योगिकियां, अंतरिक्ष सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियां और आर्कटिक अनुसंधान शामिल हैं।
- दोनों पक्षों ने अनुसंधान साझेदारी, नवाचार-प्रेरित औद्योगिक सहयोग और शैक्षणिक सहयोग को भी बढ़ावा देने पर बल दिया।

