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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा और सड़क।
संदर्भ: भारत ने अपना पहला फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल लॉन्च किया, जो कच्चे तेल के आयात को कम करने, एथेनॉल की मांग के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और कम कार्बन वाली गतिशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अन्य संबंधित जानकारी
• भारत ने हीरो मोटोकॉर्प द्वारा अपने पहले व्यापक बाजार फ्लेक्स-फ्यूल दोपहिया वाहनों और मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड द्वारा पहले फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन (पैसेंजर व्हीकल) के शुभारंभ के साथ एथेनॉल-आधारित गतिशीलता के एक नए युग में प्रवेश किया है।
• ये नए लॉन्च किए गए वाहन एथेनॉल-पेट्रोल सम्मिश्रणों मिश्रणों की एक विस्तृत श्रृंखला पर काम कर सकते हैं, जो दोपहिया वाहनों में E20 से E85 तक और यात्री कारों में E20 से E100 तक विस्तृत है।
• ये लॉन्च सरकार के एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम का समर्थन करते हैं, जिसने सम्मिश्रण स्तर को वर्ष 2014 के लगभग 1.5% से बढ़ाकर 20% कर दिया है, और साथ ही कच्चे तेल के आयात में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत तथा कम कार्बन उत्सर्जन में योगदान दिया है।
• इसके उपयोग को सुगम बनाने के लिए, सरकार का लक्ष्य प्रमुख शहरी गलियारों में E85 ईंधन वितरण अवसंरचना का विस्तार करना और धीरे-धीरे एक राष्ट्रव्यापी फ्लेक्स-फ्यूल इकोसिस्टम विकसित करना है।
• यह पहल भारत की व्यापक मल्टी-फ्यूल गतिशीलता रणनीति का हिस्सा है जिसमें एथेनॉल, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), हाइड्रोजन, जैव ईंधन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा समाधान शामिल हैं।
फ्लेक्सिबल फ्यूल के बारे में
• यह एक ऐसी ईंधन प्रणाली को संदर्भित करता है जो वाहनों को पेट्रोल और एथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर चलने की अनुमति देती है।
• एथेनॉल एक नवीकरणीय जैव ईंधन है जो मुख्य रूप से कृषि कच्चे माल (फीडस्टॉक्स) जैसे कि गन्ना, मक्का, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न और कृषि अवशेषों से उत्पादित होता है.
• ईंधन मिश्रणों को एथेनॉल की मात्रा के अनुसार नामित किया जाता है:
- E20: 20% एथेनॉल + 80% पेट्रोल
- E85: 85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल
- E100: लगभग 100% एथेनॉल
• फ्लेक्स-फ्यूल प्रौद्योगिकी वाहनों को फ्यूल इंजेक्शन और दहन मापदंडों को स्वचालित रूप से समायोजित करने में सक्षम बनाती है, जिससे बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के विभिन्न एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों पर निर्बाध संचालन संभव हो जाता है।
• ब्राजील जैसे देशों ने बड़े पैमाने पर उच्च-एथेनॉल ईंधन प्रणालियों को सफलतापूर्वक अपनाया है।
फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल (FFVs) के बारे में
• फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल (FFVs) विशेष रूप से संशोधित आंतरिक दहन इंजन वाहन होते हैं जो पेट्रोल, एथेनॉल या इन दोनों के किसी भी मिश्रण पर चलने में सक्षम होते हैं।
• ये एक ही ईंधन टैंक और ईंधन प्रणाली का उपयोग करते हैं, लेकिन एथेनॉल के संक्षारक और नमी को अवशोषित करने वाले गुणों का सामना करने के लिए इसमें एथेनॉल-अनुकूल घटकों को शामिल किया जाता है।
• इसके मुख्य परिवर्धनों में शामिल हैं:
- एथेनॉल-प्रतिरोधी ईंधन टैंक, फ्यूल लाइन्स, पंप और इंजेक्टर।
- उन्नत इंजन नियंत्रण मॉड्यूल (ECM) अंशांकन जो एथेनॉल की मात्रा का पता लगाता है और स्वचालित रूप से ईंधन-वायु के मिश्रण तथा प्रज्वलन समय को समायोजित करता है।
- विभिन्न ईंधन मिश्रणों में कुशल दहन के लिए संशोधित फ्यूल इंज़ेक्शन प्रणालियाँ।
• फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल, पारंपरिक वाहनों की संरचना और ड्राइविंग विशेषताओं को बनाए रखते हैं, जिससे पूरी तरह से नई प्रणोदन प्रौद्योगिकियों की तुलना में इन्हें अपनाना आसान हो जाता है।
• भारत ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और अशोक लेलैंड जैसे संस्थानों के सहयोगात्मक अनुसंधान के माध्यम से डाइमिथाइल ईथर (DME)-डीजल मिश्रणों का उपयोग करके डीजल वाहनों के लिए भी फ्लेक्स-फ्यूल प्रौद्योगिकियों की संभावनाओं को तलाशा।
महत्व
• ऊर्जा सुरक्षा: फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देकर आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करते हैं।
• किसान कल्याण: एथेनॉल के कच्चे माल (फीडस्टॉक) की बढ़ती मांग किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत प्रदान करती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है।
• विदेशी मुद्रा की बचत: आयातित पेट्रोलियम को एथेनॉल से प्रतिस्थापित करने से मूल्यवान विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
• पर्यावरणीय स्थिरता: एथेनॉल का उच्च उपयोग जीवनचक्र ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों को कम करता है और भारत की जलवायु व नेट-जीरो प्रतिबद्धताओं का समर्थन करता है।
• आत्मनिर्भर भारत: फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल स्वदेशी ईंधन उत्पादन को बढ़ावा देते हैं और ऊर्जा तथा गतिशीलता क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हैं।
चुनौतियाँ
• ईंधन की सीमित उपलब्धता: E85 और उच्चतर एथेनॉल-मिश्रण वाले वितरण केंद्रों का एक व्यापक नेटवर्क विकासाधीन है।
• पारिस्थितिकी तंत्र का विकास: बड़े पैमाने पर इसे अपनाने के लिए ईंधन आपूर्तिकर्ताओं, वाहन निर्माताओं, नीति निर्माताओं और उपभोक्ताओं के बीच समन्वय की आवश्यकता है।
• उपभोक्ता जागरूकता: फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल तकनीक के बारे में सीमित जन-जागरूकता बाजार में इसकी स्वीकृति को धीमा कर सकती है।
• मूल्य निर्धारण और वहनीयता: उपभोक्ता द्वारा इसे अपनाए जाने को प्रोत्साहित करने के लिए ईंधन और वाहनों का प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण आवश्यक है।
• एथेनॉल आपूर्ति श्रृंखला: बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एथेनॉल का निरंतर उत्पादन, भंडारण और वितरण आवश्यक है।
आगे की राह
• संपूर्ण भारत में उच्च एथेनॉल मिश्रणों की सुलभता में सुधार के लिए एथेनॉल वितरण अवसंरचना का विस्तार करना।
• उपभोक्ताओं के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और एथेनॉल ईंधनों को अधिक किफायती बनाने के लिए राजकोषीय और मूल्य निर्धारण सहायता प्रदान करना।
• सरकार, उद्योग और ईंधन आपूर्तिकर्ताओं के बीच सहयोगात्मक प्रयास के माध्यम से एक व्यापक फ्लेक्स-फ्यूल इकोसिस्टम विकसित करना।
• फ्लेक्स-फ्यूल प्रौद्योगिकी की सुरक्षा, विश्वसनीयता और लाभों के संबंध में जागरूकता और विश्वास को बढ़ावा देना।
• दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विविध कच्चे माल (फीडस्टॉक्स) और उन्नत जैव ईंधन प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सतत एथेनॉल उत्पादन को बढ़ाना।
