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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी ‘नेत्रा’ (Netra) एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्रणाली के लिए अंतिम परिचालन मंजूरी (FOC) प्रमाणपत्र भारतीय वायु सेना (IAF) को सौंप दिया गया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह FOC प्रमाण-पत्र प्रणाली द्वारा 2017 में इनिशियल ऑपरेशनल क्लियरेंस (IOC) प्राप्त करने के लगभग नौ वर्षों बाद भारतीय वायु सेना को सौंपा गया, जो इस प्लेटफॉर्म को पूर्ण परिचालन सेवा के लिए प्रमाणित करता है।
  • DRDO, भारतीय वायु सेना, प्रमाणन एजेंसियों (CEMILAC और DGAQA) और भारतीय उद्योग भागीदारों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित, इस प्रणाली ने बालाकोट हवाई हमले (2019) और ऑपरेशन सिंदूर (2025) के दौरान अपनी परिचालन विश्वसनीयता प्रदर्शित की है।
  • यह भारत की हवाई निगरानी, कमान-और-नियंत्रण क्षमताओं और आत्मनिर्भर भारत के विजन को सुदृढ़ करता है।

नेत्राएयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्रणाली के बारे में

  • ‘नेत्रा’ भारत की प्रथम स्वदेशी रूप से विकसित एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्रणाली है, जिसे DRDO के सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS) द्वारा भारतीय वायु सेना और भारतीय उद्योग जगत के सहयोग से विकसित किया गया है।
  • यह ब्राजीलियाई एम्ब्रेयर EMB-145 विमान पर स्थापित है और एक हवाई निगरानी, युद्ध प्रबंधन, तथा कमान-और-नियंत्रण प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करती है—जिसे अक्सर “आसमान में आँख” (Eye in the Sky) कहा जाता है।
  • यह प्रणाली स्वदेशी एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) राडार से लैस है, जो 240° का राडार कवरेज प्रदान करती है और लगभग 375 किलोमीटर तक कम ऊँचाई पर उड़ने वाले विमानों, मिसाइलों, ड्रोनों और समुद्री लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम है।
  • यह उन्नत मिशन प्रणालियों को एकीकृत करती है, जैसे:
    • द्वितीयक सर्विलांस राडार (SSR)
    • आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड ऑर फो (IFF)
    • इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट उपाय (ESM)
    • इलेक्ट्रॉनिक काउंटर उपाय (ECM)
    • सुरक्षित संचार प्रणालियाँ
    • लाइन-ऑफ़-साइट (LOS) और बियॉन्ड-लाइन-ऑफ़-साइट (BLOS) डेटा लिंक
    • मिशन कंप्यूटर और सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट
    • विस्तारित सहनशक्ति  के लिए हवा से हवा में ईंधन भरने की क्षमता।
  •  जमीनी राडार के विपरीत, यह एयरबोर्न प्लेटफॉर्म भू-भाग और पृथ्वी की वक्रता से उत्पन्न सीमाओं को पार करता है, जिससे हवाई युद्ध क्षेत्र की रियल टाइम और एकीकृत छवि प्राप्त होती है।
  • भारत वर्तमान में तीन ‘नेत्रा’ AEW&C विमान (संख्या 200 स्क्वाड्रन, भिसियाना, पंजाब) और तीन फाल्कन (Phalcon) AWACS संचालित करता है, जबकि भारतीय वायु सेना के निगरानी नेटवर्क को और अधिक बढ़ाने के लिए छह उन्नत ‘नेत्रा’ Mk-1A प्रणालियों और छह एयरबस A321-आधारित ‘नेत्रा’ Mk-2 AEW&C विमानों को मंजूरी दी गई है।

महत्व

  • बल गुणक: युद्ध के दौरान फाइटर विमानों और वायु रक्षा संपत्तियों का मार्गदर्शन करते हुए विमानों, मिसाइलों, ड्रोनों और समुद्री खतरों के विरुद्ध प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करता है।
  • नेटवर्क-केंद्रित युद्ध: वास्तविक समय में स्थितिजन्य जागरूकता, युद्ध प्रबंधन और भारतीय वायु सेना की ‘इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम’ (IACCS) के साथ एकीकरण को बढ़ाता है।
  • परिचालन सत्यापन: FOC इस बात की पुष्टि करता है कि प्लेटफॉर्म ने सभी परिचालन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं और बालाकोट तथा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी प्रभावशीलता साबित करने के बाद पूर्ण-स्तरीय तैनाती के लिए तैयार है।
  • रणनीतिक आत्मनिर्भरता: आयातित हवाई निगरानी प्लेटफॉर्मों पर निर्भरता को कम करता है और उन्नत राडार, एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और मिशन सॉफ्टवेयर में भारत की स्वदेशी क्षमताओं को प्रदर्शित करता है।
  • भविष्य के लिए तैयार क्षमता: आगामी ‘नेत्रा’ Mk-1A और ‘नेत्रा’ Mk-2 कार्यक्रम लंबी दूरी की निगरानी, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमताएं, अधिक सहनशक्ति और बेहतर कवरेज प्रदान करेंगे, जिससे स्टील्थ विमानों, क्रूज मिसाइलों और मानव रहित हवाई प्रणालियों जैसे उभरते खतरों के विरुद्ध भारत की वायु रक्षा संरचना मजबूत होगी।
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