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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

संदर्भ: भारत सरकार ने जीनोम-आधारित और परिशुद्धता-संचालित स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से दुर्लभ आनुवंशिक विकारों के निदान, रोकथाम और प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए ‘उम्मीद’ (UMMID – यूनिक मेथड्स ऑफ मैनेजमेंट ऑफ इनहेरिटेड डिसऑर्डर्स) नेटवर्क को राष्ट्र को समर्पित किया।

उम्मीद/ UMMID (यूनिक मेथड्स ऑफ मैनेजमेंट ऑफ इनहेरिटेड डिसऑर्डर्स) के बारे में

  • ‘उम्मीद’ विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एक राष्ट्रीय पहल है।
  • इसे एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण के माध्यम से वंशानुगत आनुवंशिक विकारों के समाधान के लिए वर्ष 2019 में शुरू किया गया था।
  • यह कार्यक्रम “उपचार से बेहतर रोकथाम है” के सिद्धांत का पालन करता है।
  • इसका उद्देश्य भारत को आणविक चिकित्सा, जीनोमिक स्वास्थ्य सेवा और परिशुद्ध चिकित्सा के उभरते युग के लिए तैयार करना है।

उम्मीद के मुख्य घटक

  • आनुवंशिक निदान में फेलोशिप: सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों को डीएनए-आधारित निदान में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
    • यह प्रशिक्षण भारत भर के उन्नत आनुवंशिकी संस्थानों द्वारा प्रदान किया जाता है।
    • इस पहल का उद्देश्य आणविक आनुवंशिकी और नैदानिक आनुवंशिकी में कुशल मानव संसाधन तैयार करना है।
    • इसके अंतर्गत तीन वर्षों में लगभग 96 डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने की योजना है।
  • निदान केंद्र: ‘निदान’ का पूर्ण रूप राष्ट्रीय वंशानुगत रोग प्रशासन केंद्र है।
    • ये केंद्र उन्नत निदान, प्रसव-पूर्व जाँच, परामर्श और बहु-विषयक देखभाल प्रदान करते हैं।
    • देश भर में लगभग 30 निदान केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं।
    • ये केंद्र महानगरों से परे जीनोमिक स्वास्थ्य सेवा का विस्तार करने में सहायता करते हैं।
  • आकांक्षी जिलों में आनुवंशिक विकारों की रोकथाम: ‘उम्मीद’ पहल गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं में वंशानुगत विकारों की जांच पर केंद्रित है।
    • स्क्रीनिंग कार्यक्रमों के अंतर्गत बीटा-थैलेसीमिया और अन्य उपचार योग्य आनुवंशिक विकारों जैसी बीमारियों को लक्षित किया जाता है।
    • यह पहल आनुवंशिक सेवाओं को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के साथ एकीकृत करती है।
    • यह स्थानीय समुदायों और जिला स्तरीय स्वास्थ्य कर्मियों के बीच जागरूकता का प्रसार भी करती है।

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • स्क्रीनिंग और नैदानिक सेवाओं के माध्यम से लगभग तीन लाख व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं।
  • आनुवंशिक निदान और परामर्श के लिए एक राष्ट्रव्यापी ढांचे का विकास किया गया है।
  • इस कार्यक्रम ने नैदानिक प्रशिक्षण और सामुदायिक पहुंच को सुदृढ़ किया है।
  • आनुवंशिक सेवाओं का विस्तार आकांक्षी जिलों और दूरदराज के क्षेत्रों तक हुआ है।
  • निगरानी और सेवाओं तक पहुंच में सुधार के लिए ‘उम्मीद डैशबोर्ड’ और ‘उम्मीद कम्पेडियम’ का शुभारंभ किया गया।

‘उम्मीद’ का महत्व

  • यह वंशानुगत आनुवंशिक विकारों के प्रबंधन के लिए भारत के पहले व्यापक राष्ट्रीय प्रयास को रेखांकित करता है।
  • यह पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा से परिशुद्ध और जीनोम-आधारित चिकित्सा की ओर संक्रमण (बदलाव) का समर्थन करता है।
  • यह आनुवंशिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की सामर्थ्य और सुलभता में सुधार करता है।
  • यह निवारक स्वास्थ्य सेवा और प्रारंभिक रोग पहचान को सुदृढ़ करता है।
  • यह भविष्य के जीन-आधारित उपचारों और व्यक्तिगत उपचार पद्धतियों की नींव रखता है।
  • यह जीनोमिक्स, फार्माकोजेनेटिक्स और दुर्लभ बीमारियों के अनुसंधान में योगदान देता है।

दुर्लभ आनुवंशिक विकार / दुर्लभ बीमारियाँ

  • दुर्लभ बीमारियाँ जीर्ण, दुर्बल करने वाली और प्रायः जीवन के लिए घातक स्थितियाँ होती हैं, जो जनसंख्या के एक बहुत छोटे हिस्से को प्रभावित करती हैं।
  • इनमें से अधिकांश बीमारियाँ मूल रूप से आनुवंशिक होती हैं और कई बीमारियाँ बाल्यावस्था के दौरान ही आरंभ हो जाती हैं।
  • इनके लिए आमतौर पर दीर्घकालिक उपचार, निरंतर निगरानी और विशेष स्वास्थ्य देखभाल सहायता की आवश्यकता होती है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्रति 1,000 की जनसंख्या पर एक या उससे कम व्यक्ति को प्रभावित करने वाले रोग को दुर्लभ बीमारी माना जाता है। भारत में, दुर्लभ बीमारी को परिभाषित करने के लिए सुझाया गया मानदंड प्रति 10,000 व्यक्तियों में लगभग एक व्यक्ति है।
  • आनुवंशिक विकार: आनुवंशिक विकार जीनों में हानिकारक परिवर्तनों (उत्परिवर्तन) के कारण या आनुवंशिक सामग्री में असामान्यताओं के कारण उत्पन्न होते हैं।
    • जीन डीएनए (DNA) से बने होते हैं, जिसमें कोशिका के कार्य करने और मानवीय विशेषताओं के लिए निर्देश निहित होते हैं।
    • ये उत्परिवर्तन माता-पिता से वंशानुक्रम में मिल सकते हैं या समय के साथ विकसित हो सकते हैं। कुछ आनुवंशिक विकार जन्म के समय उपस्थित होते हैं, जबकि अन्य जीवन में बाद में प्रकट होते हैं।

आनुवंशिक विकारों के प्रकार

  • गुणसूत्रीय विकार: ये विकार गुणसूत्र सामग्री की कमी, अतिरिक्त उपस्थिति या उसके द्विगुणन के कारण उत्पन्न होते हैं। चूंकि गुणसूत्र कोशिकाओं के भीतर जीन और डीएनए को वहन करते हैं, इसलिए ऐसी असामान्यताएं सामान्य वृद्धि और विकास को प्रभावित कर सकती हैं।
    • उदाहरणों में डाउन सिंड्रोम, टर्नर सिंड्रोम और क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम सम्मिलित हैं।
  • जटिल / बहुकारकीय विकार: ये विकार आनुवंशिक उत्परिवर्तन और पर्यावरणीय कारकों जैसे कि आहार, धूम्रपान, मद्यपान, रासायनिक एक्सपोजर तथा औषधियों के संयुक्त प्रभाव के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।
    • उदाहरणों में मधुमेह, कैंसर, कोरोनरी धमनी रोग (हृदय रोग) और ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार सम्मिलित हैं।
  • एकल-जीन विकार: ये विकार किसी एक जीन में उत्परिवर्तन के कारण होते हैं और आमतौर पर परिवारों में वंशानुक्रम के माध्यम से स्थानांतरित होते हैं।
    • उदाहरणों में सिस्टिक फाइब्रोसिस, सिकल सेल रोग, ड्यूशिन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और टे-सैक्स रोग सम्मिलित हैं।

वैश्विक और भारतीय परिदृश्य

  • वैश्विक स्तर पर, लगभग 6,000-8,000 दुर्लभ बीमारियों की पहचान की जा चुकी है।
  • इनमें से लगभग 80% बीमारियाँ प्रकृति में आनुवंशिक हैं, और लगभग आधी बीमारियाँ बच्चों को प्रभावित करती हैं।
  • भारत में, व्यापक महामारी विज्ञान संबंधी डेटा और रोग रजिस्ट्रियों के अभाव के कारण केवल सीमित संख्या में ही दुर्लभ बीमारियों को व्यवस्थित रूप से प्रलेखित किया गया है।
  • भारत में आमतौर पर रिपोर्ट की जाने वाली दुर्लभ बीमारियों में गौचर रोग, पोम्पे रोग, सिस्टिक फाइब्रोसिस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी और लाइसोसोमल स्टोरेज विकार सम्मिलित हैं।

Source:
Pib
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