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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।
संदर्भ: सांख्यिकी दिवस के अवसर पर, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने राष्ट्रीय संकेतक ढाँचे (National Indicator Framework – NIF) के माध्यम से 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति का आकलन करने के लिए चार प्रकाशन जारी किए।
रिपोर्ट के बारे में

- सतत विकास लक्ष्य – राष्ट्रीय संकेतक ढाँचा (NIF) प्रगति रिपोर्ट, 2026: यह प्रमुख रिपोर्ट है जो राष्ट्रीय संकेतकों का उपयोग करते हुए सभी 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर भारत की प्रगति का नवीनतम समय-श्रृंखला डेटा प्रस्तुत करती है।
- यह नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और योजनाकारों को सतत विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए साक्ष्य-आधार प्रदान करती है।
- सतत विकास लक्ष्य – NIF प्रगति रिपोर्ट पर डेटा स्नैपशॉट, 2026: प्रगति रिपोर्ट से तैयार की गई एक संक्षिप्त पुस्तिका।
- यह राष्ट्रीय-स्तरीय सतत विकास लक्ष्य संकेतकों को सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल प्रारूप में प्रस्तुत करती है।
- सतत विकास लक्ष्य – राष्ट्रीय संकेतक ढाँचा, 2026 (मेटाडेटा सहित): इस पुस्तिका में सभी 277 राष्ट्रीय सतत विकास लक्ष्य संकेतकों के साथ विस्तृत मेटाडेटा, डेटा स्रोत और रिपोर्टिंग की आवधिकता समाहित है।
- जीवन में रूपांतरण: सतत विकास लक्ष्यों के ‘जन आयाम’ (People Dimension) के अंतर्गत भारत की उपलब्धियाँ: यह 2030 एजेंडा के ‘जन स्तंभ’ के अनुरूप पहली विषयगत सतत विकास लक्ष्य बुलेटिन है।
- इसमें निम्नलिखित के अंतर्गत भारत की प्रगति को कवर किया गया है:
- सतत विकास लक्ष्य (SDG) 1: गरीबी की समाप्ति
- सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2: शून्य भुखमरी
- सतत विकास लक्ष्य (SDG) 3: उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली
- सतत विकास लक्ष्य (SDG) 4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- सतत विकास लक्ष्य (SDG) 5: लैंगिक समानता
- यह मानव विकास का समर्थन करने वाली प्रमुख सरकारी पहलों और “कोई भी पीछे न छूटे” (Leaving No One Behind) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालता है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

- सामाजिक विकास: सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों के अंतर्गत आने वाली जनसंख्या 22.0% (2016) से बढ़कर 65.3% (2026) हो गई है।
- मातृ मृत्यु दर (MMR) प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 122 (2015–17) से घटकर 87 (2022–24) हो गई है।
- जन्म के समय लिंगानुपात 2015–17 और 2022–24 के बीच प्रति 1,000 जीवित पुरुष जन्मों पर 896 से बढ़कर 918 हो गया है।
- महिला पेशेवरों और तकनीकी कर्मियों की हिस्सेदारी 48.7% (2023–24) से बढ़कर 51.3% (2025) हो गई है।

- आर्थिक विकास: बेरोजगारी दर 6.1% (2017–18) से घटकर 3.1% (2025) हो गई है।
- कुल इंटरनेट सबस्क्रिपशन 302.36 मिलियन (2015) से तीन गुना से अधिक बढ़कर 969.10 मिलियन (2025) हो गए हैं।
- कृषि और खाद्य सुरक्षा: संरक्षित पादप आनुवंशिक संसाधनों की संख्या 4.33 लाख से बढ़कर 4.92 लाख (2014–15 से 2025–26) हो गई है।
- पशु आनुवंशिक संसाधनों की संख्या 1.40 लाख से बढ़कर 3.62 लाख हो गई है।
- मत्स्य आनुवंशिक संसाधनों की संख्या 47 से बढ़कर 105 हो गई है।
- पर्यावरण और जलवायु: प्रति व्यक्ति स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 64.04 वाट (2014–15) से बढ़कर 193.36 वाट (2025–26) हो गई है।
- अपशिष्ट पुनर्चक्रण संयंत्रों की संख्या 829 (2019–20) से बढ़कर 3,236 (2025–26) हो गई है।
- 2016 और 2026 के बीच रामसर स्थलों का विस्तार भारत के कुल आर्द्रभूमि क्षेत्र के 4.15% से बढ़कर 8.66% हो गया है।
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के बारे में
- सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा सितंबर 2015 में “ट्रांसफॉर्मिंग अवर वर्ल्ड: द 2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट” संकल्प के अंतर्गत अपनाया गया था।
- यह ढाँचा 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ।
- इसमें 17 सतत विकास लक्ष्य, 169 लक्ष्य (targets) और प्रगति की निगरानी के लिए एक वैश्विक संकेतक ढाँचा (Global Indicator Framework – GIF) शामिल है।
- सतत विकास लक्ष्य, “कोई भी पीछे न छूटे” के मूल सिद्धांत के साथ सतत विकास के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आयामों को एकीकृत करते हैं।
- भारत में, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) सतत विकास लक्ष्य डेटा निगरानी के लिए नोडल एजेंसी है और इसने मंत्रालयों, नीति आयोग, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और अन्य हितधारकों के परामर्श से राष्ट्रीय संकेतक ढाँचा (NIF) विकसित किया है।
- राष्ट्रीय संकेतक ढाँचा 2026 में 277 राष्ट्रीय सतत विकास लक्ष्य संकेतक शामिल हैं जो सभी 17 लक्ष्यों को कवर करते हैं और भारत के मुख्य सांख्यिकीविद् की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय संचालन समिति (High-Level Steering Committee – HLSC) द्वारा समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाती है।
- नीति आयोग ने सतत विकास लक्ष्यों को राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय नियोजन में मुख्यधारा में लाने के लिए केंद्रीय सरकारी योजनाओं के साथ इन लक्ष्यों को मैप किया है।
- वैश्विक स्तर पर, भारत सतत विकास लक्ष्य संकेतकों पर अंतर-एजेंसी और विशेषज्ञ समूह (IAEG-SDGs) में दक्षिण एशिया क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। यह वैश्विक संकेतक ढाँचे को मजबूत करने के लिए ‘सीखे गए सबक’ (Lessons Learned) पर कार्य दल का सदस्य भी है।

