• संदर्भ : प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस 2026 के संबोधन में वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ‘सप्तधारा’ रोडमैप प्रस्तुत किया। इसमें विकास के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • विकसित भारत @2047 क्या है?
    • 2047 के लिए भारत का विज़न, जिसे ‘विकसित भारत’ के नाम से जाना जाता है, का लक्ष्य देश को अपनी स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाने तक एक विकसित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना है। यह अगले 25 वर्षों में भारत के विकास का एक खाका या ब्लूप्रिंट तैयार करने के लिये भारत के शीर्ष थिंक टैंक नीति आयोग द्वारा शुरू की गई एक परियोजना है।
    • इस परियोजना का लक्ष्य भारत को नवाचार एवं प्रौद्योगिकी में वैश्विक अग्रणी देश बनाना है जो मानव विकास एवं सामाजिक कल्याण के मामले में भी एक मॉडल देश होगा और पर्यावरणीय संवहनीयता का प्रबल पक्षसमर्थक होगा। इस महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी।
  • सप्तधारा के 7 प्रमुख क्षेत्र:
    • विनिर्माण शक्ति – देश में कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक पूरी उत्पादन श्रृंखला विकसित करना और उच्च गुणवत्ता वाले Zero Defect उत्पाद बनाना।
    • कृषि एवं खाद्य उत्पादन – खेत से बाजार और निर्यात तक की व्यवस्था मजबूत करना, रसायन-मुक्त कृषि को बढ़ावा देना तथा भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना।
    • प्रौद्योगिकी एवं नवाचार – AI, क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स, डेटा सेंटर और 6G जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना।
    • गतिशक्ति – हाई-स्पीड रेल, सड़क, जलमार्ग, हवाई अड्डे और बंदरगाहों को विकसित करके तेज मल्टीमॉडल परिवहन व्यवस्था तैयार करना।
    • रक्षा शक्ति – रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना तथा ड्रोन, एंटी-ड्रोन और हाइपरसोनिक तकनीक जैसी नई क्षमताओं का विकास करना।
    • हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था – ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और हरित परिवहन को बढ़ावा देना तथा समुद्री संसाधनों का बेहतर उपयोग करना।
    • भारत की सॉफ्ट पावर – योग, आयुर्वेद, संस्कृति, हस्तशिल्प, फिल्म, VFX, एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट के माध्यम से भारत की वैश्विक पहचान मजबूत करना।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति:
    • भारत ने 2026 में नए आधार वर्ष के साथ GDP श्रृंखला को संशोधित किया (वर्तमान आधार वर्ष 2022-23) है।
      • 2025–26 के लिए नाममात्र GDP को ₹357 लाख करोड़ से घटाकर ₹345 लाख करोड़ कर दिया गया, जिससे पूर्व में अधिक आकलनका संकेत मिला।
      • इस संशोधन ने भारत का GDP डॉलर के संदर्भ में लगभग $4.1 ट्रिलियन से घटाकर $3.9 ट्रिलियन कर दिया।
      • IMF World Economic Outlook (2026) के अनुसार भारत वर्तमान में विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
        • IMF के अनुमानों के अनुसार, भारत 2027 तक जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना रखता है।
        • 2031 तक भारत के जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान है।
    • भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
      • मजबूत घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा सेवा क्षेत्र भारत की वृद्धि के प्रमुख आधार हैं।
    • सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने राष्ट्रीय आय के अनंतिम अनुमान जारी किये हैं, जिससे पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर बढ़कर 7.7% हो गई है, जोकि वित्त वर्ष 2024-25 में 7.1% थी।
      • संपूर्ण वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिये भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.7% रही, जो फरवरी 2026 में जारी 7.6% के अनुमान से अधिक है।
    • आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार FY 2025-26 में वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7.4% रहने का अनुमान बताया गया है।
      • FY 2026-27 में आर्थिक वृद्धि 6.8%–7.2% के दायरे में रहने की संभावना है।
    • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट और सामान्य से कम मानसून की आशंकाओं के कारण उत्पन्न होने वाले संभावित जोखिमों के चलते वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी वृद्धि दर को 6.9% से घटाकर 6.6% रहने का अनुमान लगाया है।
    • विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves):
      • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास मजबूत स्तर पर बना हुआ है।
      • इससे आयात भुगतान, विनिमय दर की स्थिरता तथा बाह्य आर्थिक झटकों से निपटने की क्षमता मजबूत होती है।
    • मुद्रास्फीति (Inflation):
      • भारत में मई 2026 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति लगभग 3.93% दर्ज की गई है। इसके विपरीत, ईंधन और बिजली की कीमतों में उछाल के कारण थोक महंगाई दर (Wholesale Inflation/WPI) 9.68% के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
      • RBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य 4% (±2%) है।
      • वर्तमान में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति RBI के लक्ष्य दायरे के भीतर बनी हुई है।
  • 2047 तक विकसित भारत का एजेंडा:
    • यह एक व्यापक विजन योजना है जिसका लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र में परिवर्तित करना है, जो इसकी स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ होगी।
    • विकसित भारत के चार स्तंभ युवा, गरीब, महिला और किसान हैं।
    • इसके लिए आर्थिक विकास, सामाजिक समानता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, पर्यावरणीय स्थिरता, औद्योगिक आधुनिकीकरण और सुशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है।
    • आर्थिक विकास:
      • भारत ने सतत् आर्थिक विकास प्राप्त करने के लिए 7-8% वार्षिक GDP विकास दर का लक्ष्य रखा है।
      • नीति आयोग के अनुसार, देश की GDP 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने की संभावना है, जो इस धारणा पर टिका है कि भारत की वास्तविक GDP 9% से अधिक की वार्षिक औसत दर से बढ़ेगी।
      • पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के अनुसार, जीडीपी 2030 तक 7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो जाएगी और 2047 तक 34.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
      • प्रति व्यक्ति आय: अनुमान है कि 2030 तक यह 4,667 अमेरिकी डॉलर और 2047 तक 21,000 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगी।
      • सकल घरेलू उत्पाद में क्षेत्रीय योगदान (2047 तक):
        • कृषि: वित्त वर्ष 2023 में 20% से घटकर 12% होने का अनुमान है।
        • औद्योगिक क्षेत्र: 34% तक पहुंचने की उम्मीद है।
        • विनिर्माण क्षेत्र: 25% तक पहुंचने का लक्ष्य।
        • सेवा क्षेत्र: लगभग 54% पर स्थिर।
      • मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत (स्व-निर्भर भारत) कार्यक्रम जैसी पहल घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देती हैं और आयात निर्भरता को कम करती हैं।
      • उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती हैं।
    • सामाजिक समानता:
      • गरीबी उन्मूलन, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास चल रहे हैं।
      • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) जैसे कार्यक्रम, जो गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न प्रदान करते हैं, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, जो शिक्षा प्रणाली में सुधार करती है, इस रणनीति के प्रमुख घटक हैं।
    • औद्योगिक आधुनिकीकरण:
      • मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत सकल घरेलू उत्पाद में 25% योगदान करने के लिए विनिर्माण को बढ़ावा देना एक प्रमुख लक्ष्य है।
      • मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और अमृत काल विजन 2047 का उद्देश्य बंदरगाहों, शिपिंग एवं जलमार्गों सहित समुद्री क्षेत्र का विकास करना है।
      • बंदरगाह संचालन को आधुनिक बनाने, हरित हाइड्रोजन/अमोनिया हब विकसित करने और क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास इस रणनीति का हिस्सा हैं।
    • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता:
      • PM गति शक्ति मास्टर प्लान विकास में तीव्रता लाने के लिए सभी क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को एकीकृत करता है।
      • डिजिटल इंडिया पहल इंटरनेट एक्सेस का विस्तार करती है और फिनटेक अपनाने को बढ़ावा देती है, ई-गवर्नेंस एवं डिजिटल सेवाओं का समर्थन करती है।
    • पर्यावरणीय स्थिरता:
      • भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। ग्रीन इंडिया मिशन जैसी पहल नवीकरणीय ऊर्जा और सतत् शहरी विकास पर ध्यान केंद्रित करती है।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख शक्तियाँ:
  • चुनौतियाँ:
    • आर्थिक असमानताएँ, बुनियादी ढाँचे में कमी, नीति अनिश्चितता, पर्यावरण से जुड़ी चिंताएँ, कौशल विकास, ग्रामीण युवा और वैश्विक जोखिम जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
    • अन्य चुनौतियाँ: 
      • मध्यम आय जाल
      • वृद्ध होती जनसंख्या
      • उच्च जीडीपी विकास दर को बनाए रखना
      • रुपया-डॉलर विनिमय दर
      • भू-राजनीति और क्षेत्रीय एकीकरण
      • निम्न श्रम बल भागीदारी
  • समाधान:
    • उपर्युक्त चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों, कौशल विकास, निर्यात को बढ़ावा देने, ग्रामीण विकास एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की आवश्यकता है।
    • अन्य उपाय :
      • वृहत, तेज़ विनिवेश का लक्ष्य रखना
      • मध्यम वर्ग को बढ़ावा देना
      • श्रम बल की भागीदारी बढ़ाना
      • अवसंरचना पाइपलाइन में तेज़ी लाना
      • विनिर्माण क्षेत्र में प्रगति का लाभ उठाना
      • निजी निवेश को बढ़ावा देना
      • संरचनात्मक सुधार लागू करना
      • पूंजी संचय बढ़ाना

निष्कर्षतः विकसित भारत @2047 केवल सरकार का संकल्प नहीं, बल्कि हर भारतीय का साझा सपना है। यह पहल भारत को वैश्विक मंच पर एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करती है।

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