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सामान्य अध्ययन-2: संघीय संरचना, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त के हस्तांतरण से संबंधित मुद्दे और चुनौतियां; शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष।
संदर्भ: हाल ही में पंचायती राज मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट’ जारी की है, जो नागरिकों की भागीदारी को प्रभावित करने वाली प्रमुख बाधाओं को रेखांकित करती है और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के उपाय सुझाती है।
अन्य संबंधित जानकारी
- यह अध्ययन पंचायती राज मंत्रालय के अनुरोध पर राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान (NIRDPR), हैदराबाद द्वारा संचालित किया गया था।
- यह ग्राम सभा भागीदारी के सबसे बड़े क्षेत्र-आधारित आकलनों में से एक है, जिसमें 26 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, 213 जिले, लगभग 400 ग्राम पंचायतें और लगभग 7,800 उत्तरदाता शामिल हैं। अध्ययन में 50 पेसा (PESA) ग्राम पंचायतें और 130 महिला-अनुकूल ग्राम पंचायतें भी शामिल थीं।
- अध्ययन ने भागीदारी, समावेशिता, शासन प्रथाओं, संचार प्रणालियों, बुनियादी ढांचे, पहुंच और ग्राम सभा की कार्यप्रणाली के संबंध में नागरिकों की धारणाओं को प्रभावित करने वाले कारकों की जांच की।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
- कम भागीदारी की बहुआयामी प्रकृति: अध्ययन में पाया गया कि ग्राम सभाओं में कम भागीदारी बहुआयामी है, जो किसी एक कारण के बजाय सामाजिक-आर्थिक, संस्थागत, शासन और व्यवहार संबंधी कारकों से प्रभावित है।
- आजीविका और समय संबंधी बाधाएं:
- आजीविका और समय संबंधी बाधाएं सबसे बड़ी बाधा (55.5%) के रूप में उभरीं, जिसके बाद जागरूकता और संचार के मुद्दे (16.2%) रहे।
- व्यस्त कार्य-अनुसूची (41.74%) और कृषि गतिविधियां (30.26%) उपस्थिति को प्रभावित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक बाधाएं मानी गईं।
- जागरूकता और प्रक्रियात्मक साक्षरता की कमी:
- अध्ययन में ग्राम सभा की बैठकों के बारे में जागरूकता और ग्राम सभा की प्रक्रियाओं की समझ के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर पाया गया।
- हालांकि बैठकों के संबंध में जागरूकता सामान्यतः उच्च थी, लेकिन नागरिक अधिकारों, कोरम (गणपूर्ति) की आवश्यकताओं, निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और ग्राम सभा की संस्थागत भूमिका का ज्ञान अपेक्षाकृत कम था।
- सामाजिक समूहों के बीच भागीदारी का अंतराल: ग्राम सभा की प्रक्रियाओं में सबसे कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों में प्रवासी परिवार (17.61%), युवा (16.73%), वरिष्ठ नागरिक (15.80%) और महिलाएं (13.40%) शामिल थे।
- “ग्राम सभा भागीदारी थकान” (Gram Sabha Participation Fatigue) का उदय:
- अध्ययन में “ग्राम सभा भागीदारी थकान” नामक एक उभरती हुई प्रवृत्ति की पहचान की गई, जहां ठोस परिणामों के अभाव, अनसुलझी शिकायतों, बार-बार होने वाली चर्चाओं और सीमित अनुवर्ती कार्रवाई के कारण लोगों का उत्साह धीरे-धीरे कम हो जाता है।
- भागीदारी में यह थकान पारदर्शिता संबंधी चिंताओं (45.46%), चर्चाओं की प्रासंगिकता की कमी (42.0%), बार-बार दोहराई जाने वाली चर्चाएं (33.4%), विश्वास का अभाव (32.7%), राजनीतिक हस्तक्षेप (27.9%) और कमजोर शिकायत निवारण प्रणाली (16.2%) के कारण उत्पन्न हुई है।
प्रमुख नीतिगत अनुशंसाएँ
- राष्ट्रीय ग्राम सभा जागरूकता और गतिशीलता मिशन: नागरिक जागरूकता, प्रक्रियात्मक समझ और लोकतांत्रिक भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए एक ‘राष्ट्रीय ग्राम सभा जागरूकता, प्रक्रियात्मक साक्षरता और गतिशीलता मिशन’ का शुभारंभ करें।
- सामुदायिक गतिशीलता को सुदृढ़ करना: व्यापक नागरिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वार्ड सदस्यों, स्वयं सहायता समूहों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं, युवा समूहों और सामुदायिक संस्थानों के माध्यम से संरचित ‘पूर्व-ग्राम सभा गतिशीलता’ (Pre-Gram Sabha Mobilisation) का संस्थागतकरण करें।
- आजीविका-संवेदनशील समय-निर्धारण: कृषि चक्रों, स्थानीय कार्य प्रतिरूपों (Work Patterns), प्रवासन की वास्तविकताओं और सामुदायिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए ग्राम सभा की बैठकों का निर्धारण करें।
- पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार: जन विश्वास बनाने के लिए अनुपालन प्रतिवेदन (Action Taken Reports), शिकायत-ट्रैकिंग प्रणालियों, सार्वजनिक समीक्षा तंत्र और कार्यसूची, लाभार्थी सूचियों तथा बजट के अग्रिम प्रकटीकरण का संस्थागतकरण करें।
- प्रौद्योगिकी और अभिसरण का लाभ उठाना: पंचायती राज संस्थाओं और संबंधित विभागों के बीच अभिसरण को सुदृढ़ करें और नागरिक जुड़ाव बढ़ाने के लिए एसएमएस अलर्ट, व्हाट्सएप समूहों, आईवीआरएस (IVRS) और ई-ग्राम स्वराज-लिंक्ड संचार प्रणालियों जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग करें।
रिपोर्ट का महत्व
- सहभागी लोकतंत्र का सुदृढ़ीकरण: यह रिपोर्ट जमीनी स्तर के लोकतंत्र और नागरिक-नेतृत्व वाले शासन की आधारशिला के रूप में ग्राम सभा को पुनर्जीवित करने के लिए साक्ष्य-आधारित रोडमैप प्रदान करती है।
- जवाबदेही और जन विश्वास में सुधार: इसकी अनुशंसाएँ पारदर्शिता, शिकायत निवारण, उत्तरदायित्व और दृश्य शासन परिणामों में सुधार करने का प्रयास करती हैं, जिससे स्थानीय संस्थानों में नागरिकों का विश्वास सुदृढ़ हो सके।
- समावेशी ग्रामीण शासन को बढ़ावा देना: महिलाओं, युवाओं, प्रवासियों और संवेदनशील समूहों के बीच भागीदारी के अंतर को संबोधित करके, यह रिपोर्ट अधिक समावेशी और प्रतिनिधि स्थानीय शासन को बढ़ावा देती है।
- समुदाय-नेतृत्व वाले विकास को बढ़ाना: सशक्त ग्राम सभाएँ स्थानीय नियोजन, सार्वजनिक सेवाओं की निगरानी और विकास प्रक्रियाओं के प्रति सामुदायिक स्वामित्व में सुधार कर सकती हैं।

